भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर और भोपाल में कमिश्नर प्रणाली (Police Commissioner System) लागू किए जाने के सरकार के फैसले का रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों ने स्वागत किया है. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मध्यप्रदेश में पुलिस कमिश्नर सिस्टम का स्वरूप क्या होगा. पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद लाॅ एंड ऑर्डर की स्थिति में पुलिस को कलेक्टर और एसडीए से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली होगी लागू, सीएम शिवराज ने किया ऐलान
क्या होंगे कमिश्नर सिस्टम के फायदे
रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यदि दूसरे राज्यों की तरह मध्यप्रदेश के दो शहरों में कमिश्नर सिस्टम लागू हुआ तो पुलिस को कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर पुलिस कमिश्नर ही निर्णय ले सकेंगे.
- पुलिस कमिश्नर (Police Commissioner System)लागू होने के बाद कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार को दी गई मजिस्ट्रियल पावर पुलिस को मिल जाएगी.
- इससे पुलिस शांति भंग होने की आशंका में धारा 155 के तहत व्यक्ति पर कार्रवाई कर सकती है. ऐसी स्थिति में अभी जमानत के अधिकार एसडीएम को होते हैं, लेकिन कमिश्नरी के बाद यह अधिकार खत्म हो जाएंगे.
- गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका लगाने के लिए अभी थाने से पुलिस अधिक्षक से यह प्रस्ताव डीआईजी को भेजे जाते हैं और फिर इन्हें कलेक्टर कार्यालय भेजा जाता है, इसके बाद कलेक्टर के विवेक पर कार्रवाई की जाती है. पुलिस कमिश्नरी के बाद पुलिस कमिश्नर इस पर निर्णय ले सकेंगे.
- कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने का सीधा अधिकारी पुलिस दे सकेगी और नगर निगम को इस पर अमल करना होगा.
- धरना-प्रदर्शन की अनुमति देने का अधिकारी पुलिस के पास आ जाएगा.
- आर्म्स, आबकारी को लेकर भी एनओसी देने के अधिकार पुलिस के पास आ जाएंगे.
- सरकार जरूरत के हिसाब से डीसीपी की नियुक्ति कर सकती है जो एसपी रैंक के होंगे.
- कार्रवाई के मामलों में मजिस्ट्रेट के अधिकार डीसीपी और एसीपी के पास होंगे.
- भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के अंतर्गन जिलाधिकारी यानी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास पुलिस पर नियंत्रण के अधिकार होते हैं. इस पद पर आईएएस अधिकारी बैठता है, लेकिन पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद यह अधिकार पुलिस के पास आ जाएंगे. इसकी कमान आईपीएस अधिकारी के पास होगी.
सीएम शिवराज ने आखिर क्यों कहा- कोरोना तो बहाना है...
अभी यह है भोपाल-इंदौर में पुलिस सेटअप
मौजूदा समय में भोपाल-इंदौर में आईजी के पद पर एडीजी स्तर के अधिकारी की पदस्थापना की जा रही है, हालांकि इनका पद नाम आईजी है.
- एडीजी के बाद दो डीआईजी, जिसमें एक डीआईजी ग्रामीण और दूसरा डीआईजी शहर होते हैं.
- शहरी क्षेत्र में तीन एसपी होते हैं. पहला, एसपी मुख्यालय होता है और इसके अलावा शहर को दो भागों में बांट कर अलग-अलग भाग के दो एसपी हैं.
कमिश्नरी के बाद यह होगा सेटअप
पुलिस कमिश्नर सिस्टम (Police Commissioner System) लागू होने के बाद एडीजी स्तर के सीनियर आईपीएस को पुलिस कमिश्नर बनाया जाता है.
- पुलिस कमिश्नर के बाद आईजी स्तर का अधिकारी होता है, जिसे ज्वाइंट कमिश्नर या जेसीपी कहा जाता है.
- शहर को अलग-अलग भाग में बांटकर इसमें एसपी स्तर के अधिकारी तैनात किये जाते हैं. इन्हें डिप्टी कमिश्नर यानी डीसीपी कहा जाता है.
- एसपी के बाद अभी एडिशनल एसपी होते हैं, इन्हें सहायक आयुक्त यानी एसीपी कहा जाता है.
- थाना स्तर पर थाना प्रभारी होते हैं इन्हें पुलिस इंस्पेक्टर कहा जाता है.
दिग्गी का 'प्रहार', सिर्फ दो व्यक्ति चला रहे सरकार, 700 किसानों की मौत का कौन जिम्मेदार
रिटायर्ड अधिकारी बोले पुलिसिंग में मिलेगा फायदा
भोपाल-इंदौर (Bhopal-Indore) में पुलिस कमिश्नर सिस्टम (Police Commissioner System) लागू किए जाने के सरकार के ऐलान का रिटायर्ड डीजीपी ने स्वागत किया है, लेकिन फिलहाल इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है. रिटायर्ड डीजीपी और पूर्व सीबीआई डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला के मुताबिक, फिलहाल इसका स्वरूप सामने दीजिए, इसके बाद ही कुछ बोलना ठीक होगा. उधर रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी और जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता निर्मला बुच ने भी अभी इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि अभी फिलहाल इस पर बोलना जल्दबाजी होगी. उधर रिटायर्ड डीजी अरूण गुर्टू के मुताबिक सरकार ने कई सालों के इंतजार के बाद इसे लेकर फैसला किया है, यह स्वागत योग्य कदम है. देश के कई बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया गया, जिसके बेहतर नतीजे भी सामने आए हैं. प्रदेश के इंदौर और भोपाल शहर तेजी से बढ़ रहे हैं और इस दिशा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद यहां पुलिसिंग में और सुधार देखने को मिलेगा.
करीब 20 सालों से चल रही खींचतान
मध्यप्रदेश में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लागू किए जाने को लेकर करीब 20 सालों से मशक्कत चल रही है. इसको लेकर कई बार आईएएस और आईपीएस सामने आ चुके हैं. यही वजह है कि कई बार इसको लेकर सरकार फैसला लेने से पीछे हटती रही है. हर बार विवाद की वजह यही रही है कि कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के अधिकार कम हो जाते हैं. पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने को लेकर मुख्यमंत्री कई बार अधिकारियों को इसको लेकर तैयारी करने के निर्देश दे चुके थे.