लखनऊ : वर्ल्ड रैंकिंग में सुधार के लिए केजीएमयू व पीजीआई अपने एलुमिनाई (पूर्व छात्र) से मदद लेगा. क्यूएस (क्वाकरेल्ली सायमोंड्स) रैंकिंग सहित विश्व की दूसरी रैंकिंगस में अच्छे फीडबैक का बहुत महत्व होता है. इसके लिए अपने पूर्व छात्र जो विदेशों में बसे हैं उनकी मदद दोनों संस्थान लेंगे. प्रदेश सरकार इन दोनों मेडिकल कॉलेजों को टॉप 100 में लाना चाहती है. इसके लिए इनकी जो भी मदद होगी, वह उपक्रम के माध्यम से मुहैया कराया जाएगा. पिछले कुछ सालों में इन दोनों बड़े अस्पतालों की रैंकिंग कम हुई है.
उपक्रम के डायरेक्टर जनरल (डीजी) प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि एक उच्च शिक्षण संस्थान के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार की मान्यताओं के साथ और भी कई मान्यताएं महत्वपूर्ण हैं. इस प्रकार से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को दी गई रेटिंग या ग्रेड उनकी विश्वसनीयता में इजाफा करते हैं, जिसका सीधा फायदा छात्र को भी होता है. इसके अतिरिक्त, यह बेहतर प्लेसमेंट के लिए अधिक अवसर सुनिश्चित करता है क्योंकि कंपनियां उच्च श्रेणी के शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों की भर्ती को प्राथमिकता देती हैं. QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बुनियादी सुविधाओं, फैकल्टी की क्वालिटी, डाइवर्सिटी ऑफ स्टूडेंट्स, आदि सहित विभिन्न श्रेणियों का मूल्यांकन करके एक संस्थान की विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है.
2023 की यह है तैयारी : प्रो. पूनम ने बताया कि वर्ष 2023 को लेकर पूरी तैयारी है ताकि 2022 की तुलना में 2023 की वर्ल्ड रैंकिंग में केजीएमयू और पीजीआई अच्छे स्थान पर आए. वर्ष 2022 की क्यूएस रैंकिंग में पीजीआई 501-550 और केजीएमयू 601-650 पायदान पर आया था. रैंकिंग को लेकर इस बार विशेष तैयारी हैं सभी डाटा ऑनलाइन भेज दिया गया है. इस बार उपक्रम ने सारे एलुमिनाई जो विश्व के अलग-अलग जगह पर हैं उनसे परसेप्शन मांगा जाएगा. जो अच्छी रैंक दिलाने में मदद करेगा. विश्व में हर जगह जॉर्जियन हैं केजीएमयू का नाम विश्व स्तर पर प्रख्यात है. वहीं पीजीआई अपने आप में सर्वश्रेष्ठ हैं. इस बार कोशिश है कि दोनों ही मेडिकल कॉलेज टॉप 500 के अंदर आए बल्कि इससे भी अच्छी रैंक पर आए.
उन्होंने बताया कि किसी भी संस्थान का बुनियादी ढांचा उस पर्याप्त परिसर सुविधाओं की उपलब्धता का एक और इंडिकेटर है, जो संस्थान में एक स्वस्थ अध्ययन वातावरण के लिए आवश्यक है. क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग द्वारा छात्रों को उपलब्ध आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी), पुस्तकालयों, खेल, चिकित्सा सुविधाओं, आवास और भोजन की गुणवत्ता जैसी कई सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाता है. रिसर्च कार्य पर जोर देने के साथ, वर्तमान एचईआई बड़े पैमाने पर बौद्धिक संपदा बनाने, पेटेंट को वैध करने, व्यावसायीकरण करने और स्पिन-ऑफ संस्थाओं के गठन में निवेश की दिशा में योगदान देता है. इसके अलावा, रिसर्च वैश्विक स्तर पर एचईआई के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण तरीका है. इसलिए क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग संस्थान में फैकल्टी के अंदर रिसर्च क्वालिटी, प्रकाशित पत्रों की संख्या, संबंधित फैकल्टीज के कागजात कैसे मान्यता प्राप्त और संदर्भित हैं, साथ रिसर्च परियोजनाओं के लिए प्राप्त होने वाले धन का आदि मूल्यांकन करती है. डॉक्टरेट की पढ़ाई करने का लक्ष्य रखने वाले छात्रों के लिए यह काफी जरूरी और हाइली इंटरेस्टिंग है.
क्या हैं क्यूएस रैंकिंग : क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग क्वाकरेल्ली सायमोंड्स (Quacquarelli Symonds: QS द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक प्रकाशन है, जो विश्वविद्यालयों की रैंकिंग प्रदान करता है. पूर्व में इसे टाइम्स हायर एजुकेशन-क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के नाम से जाना जाता था. वर्ष 2004 में शुरू हुई QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, दुनियाभर में उच्च शिक्षण संस्थानों की संपूर्ण विषयों और यूनिवर्सिटी एक्टिविटीज रैंकिंग का एक वार्षिक प्रकाशन है.
QS world Medical university ranking : वर्ल्ड रैंकिंग में सुधार के लिए केजीएमयू व पीजीआई लेगा पूर्व छात्रों का सहयोग - वर्ल्ड रैंकिंग में मेडिकल कॉलेज
वर्ल्ड रैंकिंग में सुधार के लिए केजीएमयू और पीजीआई (QS world Medical university ranking) अपने पूर्व छात्रों की मदद लेगा. दरअसल प्रदेश सरकार इन दोनों मेडिकल कॉलेजों को टॉप 100 में लाना चाहती है. बता दें, पिछले कुछ सालों में इन दोनों बड़े अस्पतालों की रैंकिंग कम हुई है. ऐसे में सरकार कोई कोर कसर छोड़ना नहीं चाहती है. ऐसे दबाव दोनों मेडिकल कॉलेजों पर भी है.
लखनऊ : वर्ल्ड रैंकिंग में सुधार के लिए केजीएमयू व पीजीआई अपने एलुमिनाई (पूर्व छात्र) से मदद लेगा. क्यूएस (क्वाकरेल्ली सायमोंड्स) रैंकिंग सहित विश्व की दूसरी रैंकिंगस में अच्छे फीडबैक का बहुत महत्व होता है. इसके लिए अपने पूर्व छात्र जो विदेशों में बसे हैं उनकी मदद दोनों संस्थान लेंगे. प्रदेश सरकार इन दोनों मेडिकल कॉलेजों को टॉप 100 में लाना चाहती है. इसके लिए इनकी जो भी मदद होगी, वह उपक्रम के माध्यम से मुहैया कराया जाएगा. पिछले कुछ सालों में इन दोनों बड़े अस्पतालों की रैंकिंग कम हुई है.
उपक्रम के डायरेक्टर जनरल (डीजी) प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि एक उच्च शिक्षण संस्थान के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार की मान्यताओं के साथ और भी कई मान्यताएं महत्वपूर्ण हैं. इस प्रकार से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को दी गई रेटिंग या ग्रेड उनकी विश्वसनीयता में इजाफा करते हैं, जिसका सीधा फायदा छात्र को भी होता है. इसके अतिरिक्त, यह बेहतर प्लेसमेंट के लिए अधिक अवसर सुनिश्चित करता है क्योंकि कंपनियां उच्च श्रेणी के शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों की भर्ती को प्राथमिकता देती हैं. QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बुनियादी सुविधाओं, फैकल्टी की क्वालिटी, डाइवर्सिटी ऑफ स्टूडेंट्स, आदि सहित विभिन्न श्रेणियों का मूल्यांकन करके एक संस्थान की विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है.
2023 की यह है तैयारी : प्रो. पूनम ने बताया कि वर्ष 2023 को लेकर पूरी तैयारी है ताकि 2022 की तुलना में 2023 की वर्ल्ड रैंकिंग में केजीएमयू और पीजीआई अच्छे स्थान पर आए. वर्ष 2022 की क्यूएस रैंकिंग में पीजीआई 501-550 और केजीएमयू 601-650 पायदान पर आया था. रैंकिंग को लेकर इस बार विशेष तैयारी हैं सभी डाटा ऑनलाइन भेज दिया गया है. इस बार उपक्रम ने सारे एलुमिनाई जो विश्व के अलग-अलग जगह पर हैं उनसे परसेप्शन मांगा जाएगा. जो अच्छी रैंक दिलाने में मदद करेगा. विश्व में हर जगह जॉर्जियन हैं केजीएमयू का नाम विश्व स्तर पर प्रख्यात है. वहीं पीजीआई अपने आप में सर्वश्रेष्ठ हैं. इस बार कोशिश है कि दोनों ही मेडिकल कॉलेज टॉप 500 के अंदर आए बल्कि इससे भी अच्छी रैंक पर आए.
उन्होंने बताया कि किसी भी संस्थान का बुनियादी ढांचा उस पर्याप्त परिसर सुविधाओं की उपलब्धता का एक और इंडिकेटर है, जो संस्थान में एक स्वस्थ अध्ययन वातावरण के लिए आवश्यक है. क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग द्वारा छात्रों को उपलब्ध आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी), पुस्तकालयों, खेल, चिकित्सा सुविधाओं, आवास और भोजन की गुणवत्ता जैसी कई सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाता है. रिसर्च कार्य पर जोर देने के साथ, वर्तमान एचईआई बड़े पैमाने पर बौद्धिक संपदा बनाने, पेटेंट को वैध करने, व्यावसायीकरण करने और स्पिन-ऑफ संस्थाओं के गठन में निवेश की दिशा में योगदान देता है. इसके अलावा, रिसर्च वैश्विक स्तर पर एचईआई के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण तरीका है. इसलिए क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग संस्थान में फैकल्टी के अंदर रिसर्च क्वालिटी, प्रकाशित पत्रों की संख्या, संबंधित फैकल्टीज के कागजात कैसे मान्यता प्राप्त और संदर्भित हैं, साथ रिसर्च परियोजनाओं के लिए प्राप्त होने वाले धन का आदि मूल्यांकन करती है. डॉक्टरेट की पढ़ाई करने का लक्ष्य रखने वाले छात्रों के लिए यह काफी जरूरी और हाइली इंटरेस्टिंग है.
क्या हैं क्यूएस रैंकिंग : क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग क्वाकरेल्ली सायमोंड्स (Quacquarelli Symonds: QS द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक प्रकाशन है, जो विश्वविद्यालयों की रैंकिंग प्रदान करता है. पूर्व में इसे टाइम्स हायर एजुकेशन-क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के नाम से जाना जाता था. वर्ष 2004 में शुरू हुई QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, दुनियाभर में उच्च शिक्षण संस्थानों की संपूर्ण विषयों और यूनिवर्सिटी एक्टिविटीज रैंकिंग का एक वार्षिक प्रकाशन है.