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नन्हें बच्चों ने मिलकर भरी हुंकार, जागरूक बनकर करेंगे निमोनिया पर वार

झुंझुनू में सांस अभियान के तहत बुधवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में नन्हे बच्चों ने मिलकर निमोनिया को हराने के लिए हुंकार भरी.

निमोनिया को लेकर जागरूक कार्यक्रम आयोजित, Awareness program for pneumonia
निमोनिया को लेकर जागरूक कार्यक्रम आयोजित
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Published : Jan 13, 2021, 7:58 PM IST

झुंझुनू. बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए शुरू किए गए सांस अभियान के तहत बुधवार को देरवाला स्थित इंदोरिया गुरुकुल स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में नन्हे बच्चों ने मिलकर निमोनिया को हराने के लिए हुंकार भरी.

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के जिला आईईसी समन्वयक डॉ. महेश कड़वासरा ने बच्चों को निमोनिया के लक्षणों की जानकारी देकर जागरूक किया. उन्होंने बताया कि जैसे ही बच्चों को सर्दी जुकाम हो, सांस लेने में तकलीफ हो, छाती अंदर धस जाए और तेज बुखार हो तो निमोनिया हो सकता है. ऐसे बच्चों को तुरंत बिना किसी देरी के डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए.

14 फीसदी बच्चों की निमोनिया से होती है अकाल मौत

डॉ. महेश कड़वासरा ने बताया कि पांच साल तक के बच्चों की होने वाली अकाल मौत में 14 फीसदी निमोनिया की वजह से मर जाते है, यानी साल भर में प्रदेश में 9400 सौ बच्चे अकाल मौत का शिकार हो जाया करते है. बच्चों को निमोनिया के लक्षण दिखने पर किसी प्रकार का झाड़ फूंक, टोटके के चक्कर में समय खराब नहीं करना चाहिए. उन्होंने बताया कि बच्चे ये जानकारी अपने अभिभावकों, आसपास के लोगों को भी देनी है.

पढ़ें- जानलेवा जामः भरतपुर में जहरीली शराब पीने से 2 लोगों की मौत, 7 गंभीर बीमार

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक अमित इंदोरिया बताया कि स्कूल के बच्चों को समय-समय पर निमोनिया के लक्षणों की जानकारी स्कूल में दी जाती रहेगी. ताकि निमोनिया की वजह से किसी बच्चे की जान न जा सके. इस अवसर पर संस्थान के मुकेश हर्षवाल, कैलाश शर्मा, राजेश्वरी शर्मा, कुलदीप जांगिड़ सहित अनेक स्टॉफ सदस्य मौजूद थे.

झुंझुनू. बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए शुरू किए गए सांस अभियान के तहत बुधवार को देरवाला स्थित इंदोरिया गुरुकुल स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में नन्हे बच्चों ने मिलकर निमोनिया को हराने के लिए हुंकार भरी.

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के जिला आईईसी समन्वयक डॉ. महेश कड़वासरा ने बच्चों को निमोनिया के लक्षणों की जानकारी देकर जागरूक किया. उन्होंने बताया कि जैसे ही बच्चों को सर्दी जुकाम हो, सांस लेने में तकलीफ हो, छाती अंदर धस जाए और तेज बुखार हो तो निमोनिया हो सकता है. ऐसे बच्चों को तुरंत बिना किसी देरी के डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए.

14 फीसदी बच्चों की निमोनिया से होती है अकाल मौत

डॉ. महेश कड़वासरा ने बताया कि पांच साल तक के बच्चों की होने वाली अकाल मौत में 14 फीसदी निमोनिया की वजह से मर जाते है, यानी साल भर में प्रदेश में 9400 सौ बच्चे अकाल मौत का शिकार हो जाया करते है. बच्चों को निमोनिया के लक्षण दिखने पर किसी प्रकार का झाड़ फूंक, टोटके के चक्कर में समय खराब नहीं करना चाहिए. उन्होंने बताया कि बच्चे ये जानकारी अपने अभिभावकों, आसपास के लोगों को भी देनी है.

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इस अवसर पर संस्थान के निदेशक अमित इंदोरिया बताया कि स्कूल के बच्चों को समय-समय पर निमोनिया के लक्षणों की जानकारी स्कूल में दी जाती रहेगी. ताकि निमोनिया की वजह से किसी बच्चे की जान न जा सके. इस अवसर पर संस्थान के मुकेश हर्षवाल, कैलाश शर्मा, राजेश्वरी शर्मा, कुलदीप जांगिड़ सहित अनेक स्टॉफ सदस्य मौजूद थे.

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