चूरू. स्थायीकरण और न्यूनतम मजदूरी सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट के सामने 46 दिनों से धरने पर बैठी आशा सह्योगिनियों के सब्र का बांध अब टूटता जा रहा है. कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठी आशाओं ने अब प्रदेश की गहलोत सरकार को पांच दिनों का अल्टीमेटम दिया है. चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं पूरी की जाती है, तो वे भूख हड़ताल के साथ सड़कें जाम कर उग्र प्रदर्शन करेंगी. आशा सह्योगिनियों ने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.
राजस्थान आशा सहयोगिनी यूनियन के बैनर तले धरने पर बैठी है. आशाओं ने कहा कि 2004 से वह कार्यरत हैं. सरकार द्वारा उन्हें मानदेय श्रेणी में रखा गया है. इतने समय बाद भी उन्हें ना तो स्थाई किया गया और ना ही संविदा श्रेणी में रखा गया है. धरने पर बैठी आशाओं की मांग है कि दो विभाग से उन्हें एक विभाग में नियुक्त किया जाए. आशा सह्योगिनियों ने कहा कि उन्हें केंद्र सूची जोड़ा जाए और आशाओं को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए.
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जिला कलेक्ट्रेट के आगे धरने पर बैठी आशाओं ने कहा कि कोरोना काल में उन्होंने विभाग द्वारा दिए काम में कोई कमी नहीं रखी है. चाहे वो सर्वे का काम हो या फिर अन्य कोई कार्य. बावजूद इसके वह अपनी मांगों के समर्थन में पिछले 46 दिनों से धरना दे रही है और सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है.