भोपाल। क्यों जरूरी है तराशा हुआ बदन और खूबसूरत नैन नक्श, क्यों जरुरी है चेहरे पर इस्माईल. आखिर क्यों लड़की उस मैदान में नहीं आ सकती, जहां पुरुषों की तरह वो भी मजबूत कसरती बदन दिखाए. साथ ही दिखाए अपनी ताकत. एमपी की एक लड़की के दिमाग में ये सवाल कौंधा था. इस सवाल का असर इतना हुआ कि उसने रैम्प पर उतरने के बजाए पॉवर का वो मैदान चुना जो अमूमन पुरुषों की जागीर समझा जाता है. जी हां हम बात कर रहे हैं दो बार बॉडी बिल्डिंग में मिस इंडिया का टाइटिल जीतने वाली प्रियंका वैश्य की. इसके अलावा जिसने पांच बार स्ट्रांग वूमन का खिताब भी अपने नाम किया है. प्रियंका अकेली हैं जिन्होंने पुरुषों की कही जाने वाली अलग-अलग प्रतियोगिताओं में नेशनल अवार्ड जीता. (bhopal priyanka is an inspiration for girls) (International Girl Child Day 2022)(international day of the girl child 2022 theme) (International Day of the Girl Child history)
एक सवाल ने दिलाया स्ट्रांग महिला का खिताबः घर परिवार, समाज में अमूमन लड़कियों से जो काम कहे जाते हैं कि ये तुमसे ना हो पाएगा. प्रियंका ने हर उस काम के लिए तय किया कि ये तो मैं ही करूंगी. लिहाजा वो भारी से भारी वजन उठाने भी तैयार हो गई. इसके लिए पावर लिफ्टिंग के मैदान में उतरी प्रियंका. इसके साथ ही उसने बॉडी बिल्डिंग भी जारी रखी. 2013 में जब वह इस पावर की दुनिया में आई तो इस जिद के साथ कि अनूपपुर जैसे छोटे जिले में रहने वाले अपने माता-पिता को उसे ये बताना था कि तुम्हारी बेटी बाकी दुनिया से अलग है. (bhopal story of power lifter and bodybuilder) (International Day of the Girl Child significance)
पहली बार हार से नहीं टूटी हिम्मतः उसने तीन साल कड़ी मेहनत की. 2016 में पॉवर लिफ्टिंग मुकाबले में हिस्सा लिया लेकिन हार गई. इसके बाद उसका हौसला नहीं टूटा. फिर डिस्ट्रिक लेवल से शुरू हिस्सा किया और स्टेट लेवल में खेलते हुए नेशनल चैम्पियन बन गई. 2018 में प्रियंका ने लखनऊ में बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में भी लिया और पहली बार में ही मिस इंडिया का खिताब अपने नाम कर लिया. 2019 में फिर एक बार उन्हें बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशिप में मिस इंडिया के खिताब से नवाजा गया. ईटीवी भारत से बातचीत में प्रियंका बताती हैं, पॉवर लिफ्टिंग और बॉडी बिल्डिंग दोनों अलग अलग हैं. बॉडी बिल्डिंग में डाईट कंट्रोल रखना होता है. पॉवर लिफ्टिंग में वजन उठाना है. लिहाजा अच्छी डाईट जरूरी. मैंने अलग-अलग अलग तरह की प्रतियोगिता होने के बावजूद इनमें नेशनल अवार्ड जीते. पांच बार स्ट्रांग वूमन का खिताब हासिल किया. (courage not break due to defeat for first time)(international day of the girl child)
भाईयों को कहा बहन बोझ नहीं ताकत हैः तीन बहन भाईयों में सबसे बड़ी है प्रियंका. लेकिन समाज में जैसी परिपाटी है. बहन बड़ी भी हो तो भी छोटे भाईयों की जिम्मेदारी मानी जाती है. प्रियंका कहती है मैने शुरुआत से ही अपने भाईयों को ये बता दिया कि मैं उन पर बोझ नहीं हूं. मैने परिवार का मान बनने की ही कोशिश की. प्रियंका कहती है मेरे सपनों को मैं जी सकूं ये मौका मेरे माता-पिता ने भी मुझे दिया. (told brothers sister is not a burden but strength) (power girl strong women)
सोचा शादी के बाद लगेगा ब्रेक पर पंख मिल गएः प्रियंका बताती है, कोरोना के दौरान जब लॉकडाउन हुआ तो जिम भी बंद हो गया सब एक्टिविटी ठप्प हो गईं थीं. माता-पिता मेरी शादी की जिद पर अड़ गए. बीती जुलाई महीने में सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रदीप गुप्ता से प्रियंका की शादी हो गई. प्रियंका ने शादी तो कर ली लेकिन उसने ये तय मान लिया था कि उसके जिंदगी अब 360 डिग्री के कोण पर घूम जाने वाली है. लेकिन हुआ कुछ अलग. प्रियंका चहकते हुए बताती है कि ऐसा हुआ नहीं. सीन तो एकदम ही उलट गया. प्रदीप ने मेरे माता-पिता से कहा कि प्रियंका बॉडी बिल्डिंग और पॉवर लिफ्टिंग में आगे बढ़ चुकी है. उसे शादी के बाद भी इसी में आगे बढ़ने देना है. शादी के लिए ब्रेक लिया है प्रियंका ने. लेकिन जल्द फिटनेस के साथ पॉवर लिफ्टिंग करते हुए उसी मैदान में होगी जिसे पुरुषों का मैदान कहा जाता है. (power girl strong women) (bhopal story of power lifter and bodybuilder) (why international girl child day celebrated)