बेतिया: पश्चिमी चंपारण जिले के योगापट्टी प्रखंड के बैरागी सिसवा पंचायत के लोग एक भ्रम के कारण एक भी उम्मीदवार वार्ड और पंच के चुनाव में भाग नहीं ले रहे हैं. भ्रम है कि जो भी व्यक्ति चुनाव में खड़ा होता है उसकी या उसकी पत्नी की मौत हो जाती है. जिसके कारण बैरागी सिसवा पंचायत के वार्ड और पंच दोनों पद खाली हैं.
चुनाव लड़ने पर हो जाती है पत्नी की मौत!: इस बार फिर 28 दिसंबर को होने वाले पंचायत उपचुनाव के लिए किसी ने नामांकन दाखिल नहीं किया. इस संबंध में गांव के लोगों ने बताया कि जो व्यक्ति चुनाव में खड़ा हो रहा है उसकी या उसकी पत्नी की चुनाव के बाद मौत हो जाती है. इस भय के कारण कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है.
पूर्व वार्ड सदस्य की पत्नी की भी हो चुकी है मौत: पूर्व वार्ड सदस्य हीरामन यादव ने भी अपनी आप बीती सुनाई. उन्होंने कहा कि "जो भी यहां से वार्ड सदस्य रहता है उसकी पत्नी की मौत हो जाती है. इन पदों के लिए सामान्य कर देना चाहिए. ताकि दूसरे लोग यहां से खड़े हो सके. अति पिछड़ा के लिए आरक्षित है और हमारे बीच के लोग यहां से खड़ा होना नहीं चाहते. सभी को अपने और अपनी पत्नी की मौत का डर बना रहता है."
वार्ड सदस्य और पंच के पद खाली: यह सिलसिला लगभग 10- 15 वर्षों से चला आ रहा है. जब भी कोई चुनाव लड़ता है उसकी पत्नी की मौत हो जाती है. वार्ड नंबर 3 के उप मुखिया शेष यादव ने बताया कि लगातार तीन बार वार्ड का चुनाव हुआ है और तीनों की पत्नी का देहांत हो गया. यही कारण है कि कोई भी चुनाव नहीं लड़ता है. इस वार्ड में वार्ड और पंच के पद खाली हैं.
'तीन सदस्यों की पत्नी की हो चुकी है मृत्यु'- उप मुखिया: इस अंधविश्वास को लेकर जब ईटीवी भारत ने उप मुखिया से बात की तो उन्होंने बताया कि इससे पहले यहां से तीन लोगों ने चुनाव लड़ा था. उन तीनों की पत्नियों की मौत हो गई. अब बीमारी से या किसी अन्य कारण से मौत हुई हो लेकिन लोगों के मन में डर बैठ गया है.
"पिछली बार कोमल शाह ने चुनाव लड़ा था. चुनाव के आखिरी समय में उसकी पत्नी की मौत हो गई. यही कारण है कि कोई चुनाव नहीं लड़ रहा है. ये अंधविश्वास नहीं है सत्य है. दो चार लोगों ने चुनाव लड़ा था और उनकी पत्नी मर चुकी हैं."- शेष यादव, उप मुखिया
'अफवाहों के कारण खाली रह जाते हैं पद'- मुखिया: बैरागी सिसवा पंचायत के मुखिया केदार राम ने बताया कि वार्ड और पंच का कोई भी चुनाव नहीं लड़ रहा है. जो भी चुनाव लड़ता है उसकी पत्नी मर जाती है या वह मर जाता है. यही अफवाह के कारण कोई भी चुनाव नहीं लड़ता है. मैंने लोगों को बहुत समझाया बुझाया लेकिन कोई चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है.
"पूरे वार्ड में एक भ्रम फैला दिया गया है. इसलिए किसी ने नामांकन नहीं भरा. जिन भी लोगों की मौत हुई है, बीमारी से हुई होगी. लेकिन लोगों में एक भ्रम है. इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए किसी प्रकार का कोई मुहिम प्रशासन की ओर से नहीं चलाया गया."- केदार राम, मुखिया, बैरागी सिसवा पंचायत
ग्रामीणों का बयान: वहीं इस बाबत ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है. पत्नी की मौत हो जाती है. जिस कारण गांव का कोई भी शख्स चुनाव लड़ने को तैयार नहीं होता. अगर कोई अंधविश्वास को दरकिनार कर अपना नाम आगे बढ़ा भी दे तो उसकी पत्नी उसे नाम नहीं देने देती है. इन सारी अफवाहों के कारण पंचायत के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं.
"अगर कोई चुनाव में खड़ा होता है तो उसकी पत्नी मर जाती है. यही एक समस्या है दूसरी कोई परेशानी नहीं है. दस पंद्रह साल से ऐसा ही हो रहा है. जब चुनाव होता है तब मौत होती है. जो चुनाव लड़ता है और जीतता है उसकी भी मौत की संभावना बनी रहती है. उसी डर के कारण लोग चुनाव में खड़ा होना नहीं चाहते हैं."- फूलमती देवी, ग्रामीण
जो भी खड़ा होता है उसकी पत्नी मर जाती है. लगभग 25 साल से ऐसा ही हो रहा है. सबसे पहले व्यास शर्मा की पत्नी की मौत हुई. उसके बाद मैनेजर यादव 2011 में वार्ड सदस्य का चुनाव लड़े थे, उनकी पत्नी नगीना देवी की मौत हो गई. कई लोगों की मौत हुई है.- नीरज पटेल, ग्रामीण
चुनाव जीतने के मौत: लोगों का कहना है कि चंन्द्रौल गांव वार्ड नंबर 3 से हीरामन यादव 2006 चुनाव लड़े थे, उनकी पत्नी पासपति देवी की मौत हो गई. मैनेजर यादव 2011 में वार्ड सदस्य का चुनाव लड़ें थे, उनकी पत्नी नगीना देवी की मौत हो गई. रविंदर साह की पत्नी रघुमीनी देवी 2016 में चुनाव लड़ी थी. माध्यमिक चुनाव में रघुमीनी देवी की मौत हो गई. वहीं व्यास शर्मा की पत्नी की भी मौत हो गई. रामचंद्र ठाकुर जब वार्ड सदस्य का चुनाव जीते तो कुछ ही दिनों में उनकी पत्नी की भी मौत हो गई.
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