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भाकपा माले की मांग- दिहाड़ी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपये भेजे बिहार सरकार

देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे बिहार के दैनिक मजदूरों की सकुशल घर वापसी और बिहार सरकार से गरीब दिहाड़ी मजदूरों के खाते में 3 महीने के लिये राशन-पानी की व्यवस्था करने के लिए महबूब आलम ने सभी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपया भेजने की मांग की है.

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Published : Apr 28, 2020, 10:07 AM IST

कोरोना संकट
कोरोना संकट

कटिहार: कोरोना संकट के बीच राज्य के लाखों मजदूर दूसरे राज्य में फंसे हुये हैं. उनके सामने खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है. इस संकट में सबसे ज्यादा दिक्कत दिहाड़ी मजदूरों को हो रही है. दूसरे राज्यों में फंसे कई मजदूरों की ह्रदय विदारक तस्वीरें सामने आयी हैं. जिसमें वो बिहार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. ऐसे में कटिहार के बलरामपुर से भाकपा माले विधायक महबूब आलम ने दूसरे राज्यों में फंसे दिहाड़ी मजदूरों के लिए सरकार से उचित व्यवस्था करने की मांग की है. साथ ही सरकार से उन्होंने सभी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपये तत्काल सहायता राशि भेजने की मांग की है.

गौरतलब है कि देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे बिहार के दैनिक मजदूरों की सकुशल घर वापसी और बिहार सरकार से गरीब दिहाड़ी मजदूरों के खाते में 3 महीने के लिये राशन-पानी की व्यवस्था करने के लिए उन्होंने सभी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपये भेजने की मांग की है. अपनी इन्हीं मांगों को लेकर भाकपा माले विधायक महबूब आलम पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं.

कटिहार
भाकपा माले विधायक महबूब आलम

मजदूरों के राशन पानी की हो व्यवस्था
विधायक महबूब आलम ने ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए बताया कि दूसरे राज्यों से प्रवासी मजदूर और दिहाड़ी मजदूरों की जो तस्वीर सामने आ रही है. उस तस्वीर को देखकर हम शांत नहीं बैठ सकते. इसलिए बिहार सरकार से मांग करते हैं कि इन दिहाड़ी प्रवासी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपये भेजने के साथ ही उनके लिए राशन पानी की व्यवस्था की जाए.

ईटीवी भारत की रिपोर्ट

'सामंतों और अपराधियों की सरकार'
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य में फंसे मजदूरों के खाते में एक हजार रुपये भेजकर मुख्यमंत्री डींग-हांक रहे हैं. मुंबई जैसे बड़े शहरों में एक हजार में मजदूर कितने दिन खाना खाएंगे? उन्होंने बिहार सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आखिर दूसरे राज्य में फंसे मजदूरों का सर्वे क्यों नहीं कराते कि बिहार के कितने मजदूर फंसे हुए हैं. अगर सरकार की नीयत ठीक होती तो सरकार सर्वे करा चुकी होती, लेकिन यह सरकार गरीबों और मजदूरों की नहीं बल्कि सामंतों और अपराधियों की सरकार है.

कटिहार: कोरोना संकट के बीच राज्य के लाखों मजदूर दूसरे राज्य में फंसे हुये हैं. उनके सामने खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है. इस संकट में सबसे ज्यादा दिक्कत दिहाड़ी मजदूरों को हो रही है. दूसरे राज्यों में फंसे कई मजदूरों की ह्रदय विदारक तस्वीरें सामने आयी हैं. जिसमें वो बिहार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. ऐसे में कटिहार के बलरामपुर से भाकपा माले विधायक महबूब आलम ने दूसरे राज्यों में फंसे दिहाड़ी मजदूरों के लिए सरकार से उचित व्यवस्था करने की मांग की है. साथ ही सरकार से उन्होंने सभी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपये तत्काल सहायता राशि भेजने की मांग की है.

गौरतलब है कि देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे बिहार के दैनिक मजदूरों की सकुशल घर वापसी और बिहार सरकार से गरीब दिहाड़ी मजदूरों के खाते में 3 महीने के लिये राशन-पानी की व्यवस्था करने के लिए उन्होंने सभी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपये भेजने की मांग की है. अपनी इन्हीं मांगों को लेकर भाकपा माले विधायक महबूब आलम पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं.

कटिहार
भाकपा माले विधायक महबूब आलम

मजदूरों के राशन पानी की हो व्यवस्था
विधायक महबूब आलम ने ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए बताया कि दूसरे राज्यों से प्रवासी मजदूर और दिहाड़ी मजदूरों की जो तस्वीर सामने आ रही है. उस तस्वीर को देखकर हम शांत नहीं बैठ सकते. इसलिए बिहार सरकार से मांग करते हैं कि इन दिहाड़ी प्रवासी मजदूरों के खाते में 10 हजार रुपये भेजने के साथ ही उनके लिए राशन पानी की व्यवस्था की जाए.

ईटीवी भारत की रिपोर्ट

'सामंतों और अपराधियों की सरकार'
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य में फंसे मजदूरों के खाते में एक हजार रुपये भेजकर मुख्यमंत्री डींग-हांक रहे हैं. मुंबई जैसे बड़े शहरों में एक हजार में मजदूर कितने दिन खाना खाएंगे? उन्होंने बिहार सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आखिर दूसरे राज्य में फंसे मजदूरों का सर्वे क्यों नहीं कराते कि बिहार के कितने मजदूर फंसे हुए हैं. अगर सरकार की नीयत ठीक होती तो सरकार सर्वे करा चुकी होती, लेकिन यह सरकार गरीबों और मजदूरों की नहीं बल्कि सामंतों और अपराधियों की सरकार है.

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