उदयपुर.देशभर में स्वतंत्रता दिवस को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है. आजादी के इस पर्व को मनाने के लिए हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है तो वहीं राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्म कलाकार इकबाल सक्का ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर एक और नायाब चीज बनाई है. जिसको उन्होंने देश को समर्पित किया है. अब तक 110 वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके इकबाल इस बार देश की आन-बान-शान का प्रतीक विश्व का सबसे छोटा सोने का अशोक चक्र व भारतीय तिरंगा झंडा बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं. अपनी सूक्ष्म स्वर्ण शिल्पकारी (Gold Miniature Artist) से इकबाल सक्का ने पूरी दुनिया में पहचान बना ली है.
मां भारती को किया समर्पित : इकबाल ने बताया कि देश का सबसे बड़ा अशोक चक्र यमुनानगर के टॉपर कला गांव में स्थापित है. स्टील से बने गोल्डन कलर में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज भारत का सबसे बड़ा अशोक चक्र है. 30 फीट के अशोक चक्र का वजन 6 टन है. उदयपुर के इकबाल ने ठीक इसके विपरीत लाखों गुना छोटा लेंस की मदद से देखे जाने वाला 24 कैरेट सोने का 3 एमएम साइज का वजन 0. 00 मिलीग्राम सोने का भारत का सबसे छोटा हवा से भी हल्का 24 तिलीयों के साथ अशोक चक्र बनाया. अशोक चक्र के साथ एक मिलीमीटर का भारतीय तिरंगा झंडा भी बनाया है. उन्होंने बताया कि इसको बनाने में तीन से चार दिन का वक्त लगा है. जिसे बड़ी कठिन परिश्रम और लगन के साथ उन्होंने दिन-रात एक कर बनाया है. लिम्का बुक में दावा पेश करते हुए 77वीं वर्षगांठ पर बनाई गई अपनी इन कलाकृतियों को देश के नाम कर दिया है.
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को लिखा पत्र : बता दें कि उदयपुर के इकबाल ने इतनी नायाब चीज़ बनाई है कि इसे देखने के लिए आपको लेंस के प्रयोग करना पड़ेगा. अन्य देशवासियों को उनके द्वारा बनाई गई सूक्ष्म कलाकृतियां आसानी से दिख सके, इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है. इकबाल ने पत्र में लिखा कि राजस्थान का उदयपुर जो दुनिया भर में पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है. उनके द्वारा बनाई गई है नायाब चीज अगर किसी संग्रहालय में रखी जाए तो देशवासी उसे देख सकेंगे. इकबाल ने भावुक मन से बताया कि उन्होंने अब तक 110 से ज्यादा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं, जिसमें उन्होंने कई देशों के बड़े से बड़े कलाकारों के वर्ल्ड रिकॉर्ड को भी तोड़ने का काम किया है. लेकिन उनकी नायाब चीजें सिर्फ धूल फांक रही हैं. हालांकि कई बार उन्होंने मंत्रियों को भी पत्र लिखा लेकिन अभी तक किसी भी संग्रहालय में उनकी इन नायाब चीज को रखने के लिए जगह नहीं मिल पाई है, जिसको लेकर उन्हें काफी अफसोस है.
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