डिंडौरी।बैगा एवं गोंड आदिवासी बाहुल्य जिले डिंडौरी में अब महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं. महिला सशक्तिकरण सिर्फ शहरी कामकाजी महिलाओं तक ही सीमित नहीं है. दूरदराज के गांवों में भी आदिवासी महिलाएं अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं. वे पढ़ी-लिखी हों अथवा न हों, महिलाएं अब किसी भी मायने में कम नहीं हैं. महिलाएं अपने हुनर के दम पर अपनी उपस्थिति समाज में दर्ज करवा रही हैं. कलेक्टर विकास मिश्रा भी महिलाओं को आगे लाने के लिए प्रयासरत हैं.
रेवा कैंटीन में टेस्टी व पौष्टिक भोजन मिलता है
कलेक्ट्रेट परिसर में तेजस्वनी समूह की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित "रेवा केंटीन" में मिलेट्स उत्पादों से बने व्यंजन जैसे खीर ,खिचड़ी, भजिये, पराठे, इडली आदि लोगों को खूब पसंद कर रहे हैं. जिला प्रशासन के सहयोग से ये महिलाएं आर्थिक रूप से समृद्ध बन रह हैं. तेजस्विनी स्व सहायता समूह की रजनी मंदे का कहना है कि रेवा कैंटीन में टेस्टी फूड मिलता है. अब काफी लोग यहां खाना खाने के लिए आने लगे हैं. इससे कई लोगों को रोजगार मिला है.
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