अनूपपुर: मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में महाशिवरात्रि पर भक्तों ने आस्था के साथ नर्मदा में डुबकी लगाई. सुबह से ही अमरकंटक मंदिर प्रांगण और रामघाट समेत अन्य जगहों पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. अमरकंटक में अमरकंठेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही यहां पर ज्वालेश्वर महादेव मंदिर में भी लोग पूजा अर्चना करने तथा जल अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. इसी के पास अमरेश्वर महादेव मंदिर भी स्थापित है, जहां 11 फुट के भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग स्थापित है.
अमरकंटक में 5 दिवसीय मेला शुरू
महाशिवरात्रि पर अमरकंटक में 5 दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है. जिसके बारे में बताया जाता है कि यह मेला हजारों वर्ष पुराना है. इस मेले को साल 1772 में राजकीय संरक्षण मिला था. मंडला के रामपुर रियासत के राजा हृदय शाह गौड़ ने यहां मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रहने और सुरक्षा के लिए सैनिकों की व्यवस्था की थी. 5 दिवसीय मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे.
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महाशिवरात्रि पर होती है विशेष पूजा अर्चना
नर्मदा मंदिर के पुजारी पंडित सुनील द्विवेदी ने बताया कि "महाशिवरात्रि का पर्व यहां बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. महाशिवरात्रि माता गौरी का विवाह उत्सव भी है. इसके कारण यहां नर्मदा स्नान का विशेष महत्व है. देवासुर संग्राम में देवताओं ने राक्षसों का वध किया था. जिसके बाद पाप से मुक्ति के लिए उन्होंने यहां नर्मदा स्नान करने के बाद मुक्ति पाई थी. इस वजह से मां नर्मदा की भूमि में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है. 5 दिनों तक यहां महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जहां महाभिषेक के साथ ही रात्रि जागरण कर पूजा अर्चना की जाती है."