खजुराहो: ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होना हमेशा ही खुशी की बात होती है. साल 2025 अनूठा है. खजुराहो के भव्य मंदिर धरती पर अपने अस्तित्व के एक हजार साल पूरे कर रहे हैं और पत्थरों पर अनूठी नक्काशी के जरिये मानव ज्ञान और अभिव्यक्ति के रहस्यों को आज भी बयां कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी होने का गौरव प्राप्त इस स्थान पर हर साल भारत की नृत्य परंपराओं को जीवित रखने, समृद्ध करने और बढ़ावा देने के लिए नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाता है. इस साल यह 51वां खजुराहो नृत्य महोत्सव था और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने का यादगार अवसर था.
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आयोजकों ने 20 फरवरी को यह दुर्लभ रिकॉर्ड बनाने के लिए मंच तैयार कर लिया था. यह एक सुखद शाम थी. बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक खजुराहो के दो भव्य मंदिरों के सामने बैठे थे और मंदिर रंग-बिरंगी लाइटों की चमक में जगमगा रहे थे. चमकीले झिलमिलाते परिधानों में कथक नर्तकों का विशाल समूह पंक्तिबद्ध होकर दर्शकों की ओर मुख करके खड़ा था.
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के आयोजन में पहुंचने के साथ ही औपचारिक घोषणा का समय आ गया था. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की एक प्रतिनिधि ने मंच पर आकर घोषणा की कि महोत्सव में 24 घंटे के शास्त्रीय नृत्य मैराथन का रिकॉर्ड स्थापित किया गया है. उन्होंने ऐलान किया कि आदिवर्त जनजातीय संग्रहालय में 100 नर्तकियों ने बिना रुके 24 घंटे और 9 मिनट तक नृत्य किया. उन्होंने इस आयोजन को रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधियों के बारे में बताया, जिससे यह विश्व रिकॉर्ड बना.
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सीएम यादव को प्रशस्ति पत्र मिलने पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी. इसके बाद वे एक स्पोर्ट कैप्टन की तरह नर्तकियों के बीच में गए और दोनों हाथों में प्रशस्ति पत्र को विजयी भाव से उठाया. सभी कैमरे मंच की तरफ थे.
उन्होंने कहा, "मुझे इस ऐतिहासिक अवसर पर यहां आकर गर्व है. यह क्षण भारत में, विशेष रूप से मध्य प्रदेश में कला और संस्कृति की ऐतिहासिक परंपराओं को संजोने और बनाने में लंबा रास्ता तय करेगा." उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'जय श्री राम' के नारे से की, जो उनकी पार्टी भाजपा भीतर एक लोकप्रिय नारा है. उन्होंने कहा, "हम भारत की शास्त्रीय नृत्य विरासत के मशालवाहक हैं."
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नृत्य महोत्सव 2025 के आयोजकों- मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड और संस्कृति विभाग - ने इस कार्यक्रम का उपयोग यूनेस्को की सूची में शामिल खजुराहो के मंदिरों को प्रदर्शित करने के लिए किया, जो विदेशी यात्रियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.
कश्मीरी शॉल व्यापारी मसूद अहमद ने ईटीवी भारत को बताया, "इस साल, कोविड-19 के बाद पहली बार हमने पर्यटकों की बड़ी आमद देखी है. भले ही विदेशी पर्यटक अभी भी बड़ी संख्या में नहीं आ रहे हैं, लेकिन पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है." अहमद ने तीन दशक पहले यहां कश्मीरी हस्तशिल्प की अपनी दुकान शुरू की थी.
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26 फरवरी को कलाकारों ने नृत्य कौशल का अनोखा प्रदर्शन किया और इसके साथ उत्सव का शानदार समापन हुआ. पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला कहते हैं, "51वां खजुराहो नृत्य महोत्सव भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है. कलाकारों और दर्शकों से मिली जबरदस्त भागीदारी हमें आने वाले वर्षों में इस परंपरा को और भी अधिक उत्साह के साथ जारी रखने के लिए प्रेरित करती है."
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उत्सव की अंतिम रात
कथक: पीयूष राज और सुनील शंकर (महाराष्ट्र) की जोड़ी ने भावपूर्ण कहानी के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाला प्रदर्शन किया.
भरतनाट्यम: प्रसिद्ध मीनाक्षी शेषाद्रि (महाराष्ट्र) ने पवित्र मंदिर नृत्य परंपरा को श्रद्धांजलि देते हुए अपने सुंदर गायन से दर्शकों को प्रफुल्लित किया.
कुचिपुड़ी: राजा-राधा रेड्डी (दिल्ली) के जोरदार प्रदर्शन के साथ भव्य समापन अपने चरम पर पहुंच गया, जिनकी नृत्य कला ने दर्शकों को अचंभित कर दिया.
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