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कबाड़ का कारोबार कर लखपति बनीं पलामू की नाजिया, जानें सफलता की पूरी कहानी - MILLIONAIRE BY JUNK BUSINESS

जेएसएलपीएस के प्रयास से पलामू की एक महिला की तकदीर बदली है. अपना कारोबार कर महिला आज हर माह लाखों की कमाई कर रही हैं.

Palamu Lakhpati Didi Nazaiya
पलामू की नाजिया बीबी. (फोटो-ईटीवी भारत)

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : Feb 7, 2025, 3:45 PM IST

पलामूःकबाड़ का कारोबार कर पलामू की एक महिला लखपति बन गई हैं. महिला का कारोबार आज दिल्ली, कानपुर और कोलकाता तक फैला हुआ है. महिला कोलकाता से कबाड़ मंगवाती हैं और दूसरे राज्यों में बेचती हैं. यह कहानी है पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर की रहने वाली नाजिया बीबी की.

लखपति दीदी की सूची में शामिल हुईं नाजिया

कबाड़ का कारोबार चुनौती पूर्ण क्षेत्र है, लेकिन नाजिया ने कबाड़ का कारोबार कर महिला सशक्तिकरण का उदाहरण पेश किया है. नाजिया बीबी आज लखपति दीदी की सूची में शामिल हो गई हैं. कारोबार को बढ़ाने में झारखंड सरकार मदद कर रही है और झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से नाजिया बीबी को ऋण भी उपलब्ध करवाया गया है.

कबाड़ का कारोबार कर लखपति बनीं नाजिया बीबी से बात करते ईटीवी भारत संवाददाता नीरज कुमार. (वीडियो-ईटीवी भारत)

2018 में शुरू किया था कबाड़ का कारोबार

नाजिया बीबी ने 2018 में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ऋण लिया था. ऋण लेकर उन्होंने कबाड़ के कारोबार की शुरुआत की थी. आज नाजिया बीबी का महीने का टर्नओवर पांच लाख रुपये से भी अधिक का है. कबाड़ का कारोबार कर नाजिया बीबी अपने बच्चों को पढ़ा रही हैं. नाजिया के पति पारालाइज्ड हैं, बीमार पति का भी नाजिया इलाज करवा रही हैं. पूरे परिवार की जिम्मेवारी नाजिया बीबी के कंधों पर आ गई है.

कानपुर और दिल्ली भेजती हैं कबाड़

नाजिया बीबी बताती हैं कि वह 20-20 रुपये स्वयं सहायता समूह में जमा करती थीं. बाद में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लिया था और कबाड़ का कारोबार शुरू किया था. वह बताती हैं कि कई लोग उनके पास अपना कबाड़ बेचने आते हैं. प्लास्टिक के कबाड़ का वह दिल्ली, जबकि अन्य कबाड़ को वह कानपुर भेजती हैं.

पलामू की नाजिया बीबी. (फोटो-ईटीवी भारत)

नाजिया के कारोबार से 12 महिलाएं जुड़ी हैं

नाजिया के इस कारोबार से कई अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं. उनके समूह का नाम चांद है. इस समूह से 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. नाजिया अपने स्वयं सहायता समूह में सचिव हैं. उन्होंने बताया कि जेएसएलपीएस ने उन्हें तीन लाख का ऋण दिया था. इसके बाद उनका कारोबार और बढ़ा है. नाजिया में बताया कि वह कबाड़ को खरीदकर पटना, दिल्ली और कानपुर समेत कई शहरों में बेच देती हैं.

एसएचजी से जुड़ने के बाद बदल गए हालात

स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद नाजिया बीबी के हालात बदल गए. नाजिया बीबी को झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया था. जेएसएलपीएस के लिए चैनपुर के शाहपुर के इलाके को देखने वाले सीसी आलोक कुमार तिवारी ने बताया कि नाजिया बीवी को शुरुआत में स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया था. समूह के माध्यम से होने वाले फायदे के बारे में उन्हें जानकारी दी गई थी. छोटे ऋण से उन्होंने कारोबार की शुरुआत की थी. आज हर महीने पांच लाख से भी अधिक का कारोबार हो रहा है. नाजिया बीबी झारखंड सरकार की लखपति दीदी की सूची में भी शामिल हैं.

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