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मुख्यमंत्री की विधानसभा में राम भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं, खराब मशीनें दे रहीं 'दर्द' - Dehradun News

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की विधानसभा डोइवाला में ही स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं. विधानसभा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए साल 2017 में हिमालयन हॉस्पिटल जॉलीग्रांट अस्पताल से एमओयू साइन हुआ था. बावजूद इसके यहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है

मुख्यमंत्री की विधानसभा में राम भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं
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Published : Jul 1, 2019, 6:29 PM IST

डोइवाला: पीपीपी मोड पर दिये जाने के बाद भी डोइवाला स्वास्थ्य केंद्र की हालत सुधर नहीं पाई है. हॉस्पिटल के लिए जरूरी मानी जाने वाली अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें खराब स्थिति में हैं. आलम ये है कि ये मशीनें काम करते-करते बंद हो जाती हैं. जिसके कारण मरीजों और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. डोइवाला स्वास्थ्य केंद्र की ये हालत तब है जब यहां की एक दिन की ओपीडी 300 से लेकर 500 तक है.

मुख्यमंत्री की विधानसभा में राम भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की विधानसभा डोइवाला में ही स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं. विधानसभा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए साल 2017 में हिमालयन हॉस्पिटल जॉलीग्रांट अस्पताल से एमओयू साइन हुआ था. बावजूद इसके यहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है. हालांकि जॉलीग्रांट के डॉक्टर और स्टाफ यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन अस्पताल में मौजूद उपकरणों की हालत ने डॉक्टरों के हाथ बांध दिये हैं. हॉस्पिटल की मुख्य मशीनें अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीन पुरानी होने के चलते खराब स्थिति में हैं. मशीनें चलते चलते काम करना बंद कर देती हैं.

पढ़ें-धर्मनगरी में कबाड़ के गोदाम में लगी आग, लाखों का सामान जलकर राख

वहीं ऑपरेशन थिएटर के लिए भी कोई व्यवस्था हॉस्पिटल में नहीं है. बात अगर नार्मल ऑपरेशन या नॉर्मल डिलीवरी की करें तो उसके लिए भी अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है. अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों और उनके तिमारदारों को बड़ी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं. जिसके चलते मरीजों को बाहर महंगा इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है.

पढ़ें-प्रदेश में नए पर्यटन सर्किट और होमस्टे को लेकर सतपाल महाराज ने बताई ये बात, यहां होगा झील का निर्माण

डोइवाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी निरीक्षक डॉ. कुंवर सिंह भंडारी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें पुरानी हो गई हैं. जिसके चलते मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर पा रही हैं. वहीं उन्होंने कहा कि नई मशीनों के लिए अभी कोई बजट की व्यवस्था सरकार की तरफ से नहीं मिल पाई है. डॉ. कुंवर सिंह भंडारी ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के चलते तीन-तीन डॉक्टरों का कार्य उन्हें अकेले संभालना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टरों की नियुक्ति होनी आवश्यक है.

डोइवाला: पीपीपी मोड पर दिये जाने के बाद भी डोइवाला स्वास्थ्य केंद्र की हालत सुधर नहीं पाई है. हॉस्पिटल के लिए जरूरी मानी जाने वाली अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें खराब स्थिति में हैं. आलम ये है कि ये मशीनें काम करते-करते बंद हो जाती हैं. जिसके कारण मरीजों और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. डोइवाला स्वास्थ्य केंद्र की ये हालत तब है जब यहां की एक दिन की ओपीडी 300 से लेकर 500 तक है.

मुख्यमंत्री की विधानसभा में राम भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की विधानसभा डोइवाला में ही स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं. विधानसभा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए साल 2017 में हिमालयन हॉस्पिटल जॉलीग्रांट अस्पताल से एमओयू साइन हुआ था. बावजूद इसके यहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है. हालांकि जॉलीग्रांट के डॉक्टर और स्टाफ यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन अस्पताल में मौजूद उपकरणों की हालत ने डॉक्टरों के हाथ बांध दिये हैं. हॉस्पिटल की मुख्य मशीनें अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीन पुरानी होने के चलते खराब स्थिति में हैं. मशीनें चलते चलते काम करना बंद कर देती हैं.

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वहीं ऑपरेशन थिएटर के लिए भी कोई व्यवस्था हॉस्पिटल में नहीं है. बात अगर नार्मल ऑपरेशन या नॉर्मल डिलीवरी की करें तो उसके लिए भी अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है. अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों और उनके तिमारदारों को बड़ी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं. जिसके चलते मरीजों को बाहर महंगा इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है.

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डोइवाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी निरीक्षक डॉ. कुंवर सिंह भंडारी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें पुरानी हो गई हैं. जिसके चलते मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर पा रही हैं. वहीं उन्होंने कहा कि नई मशीनों के लिए अभी कोई बजट की व्यवस्था सरकार की तरफ से नहीं मिल पाई है. डॉ. कुंवर सिंह भंडारी ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के चलते तीन-तीन डॉक्टरों का कार्य उन्हें अकेले संभालना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टरों की नियुक्ति होनी आवश्यक है.

Intro:डोईवाला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मशीनों की हालत खराब चलते चलते बंद हो जाती हैं अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें ।

पीपीपी मोड पर देने के बाद भी डोईवाला स्वास्थ्य केंद्र की हालत अच्छी नहीं हो पाई है हॉस्पिटल के लिए जरूरी मानी जाने वाली अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें खराब स्थिति में हैं और यह मशीनें कार्य करते करते बंद हो जाती हैं जिससे मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है जबकि इस हॉस्पिटल में 300 से लेकर 500 की ओपीडी रोजाना होती है ।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की डोईवाला विधानसभा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को विगत अगस्त 2017 में एक एमओयू हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट और स्वास्थ्य विभाग के बीच हुआ था जिसमें डोईवाला स्वास्थ्य केंद्र में हिमालय हॉस्पिटल जोली ग्रांट ने अपनी सेवाएं देने के लिए एमओयू पर साइन किया था और तब से हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट के डाक्टर और स्टाफ अपनी सेवाएं इस हॉस्पिटल को दे रहे हैं और हॉस्पिटल के प्रभारी निरीक्षक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नियुक्त किए गए हैं लेकिन हिमालय हॉस्पिटल जोली जोलीग्रांट के अपनी सेवाये देने के बाद तथा सरकार की तरफ से कई घोषणाएं होने के बाद भी डोईवाला हॉस्पिटल में सुविधाओं में अभी तक कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है हॉस्पिटल की मुख्य मशीने अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीन पुरानी होने के चलते खराब स्थिति में आ गई हैं और यह मशीनें चलते चलते कार्य करना बंद कर देती हैं वही ऑपरेशन थिएटर के लिए भी कोई व्यवस्था हॉस्पिटल में नहीं है वही नॉरमल सर्जरी के अलावा बड़े ऑपरेशन की भी कोई व्यवस्था नहीं है ना ही महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी के लिए अलावा बड़े ऑपरेशन के लिए सुविधाएं उपलब्ध है जिसके चलते मरीजों को बहार महंगा इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है ।


Body:डोईवाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी निरीक्षक डॉ कुंवर सिंह भंडारी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीने पुरानी हो गई है जिसके चलते यह मशीन सही तरीके से काम नहीं कर पा रही हैं और मशीनें कार्य करते करते बीच में बंद हो जाती हैं जिससे मशीनों को बार-बार रिपेयर कराना पढ़ रहा है और ऐसे में मरीजों को थोड़ी परेशानी हो रही है वही हॉस्पिटल में संसाधनों की कमी के चलते महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी ही इस हॉस्पिटल में हो पा रही है वही नई मशीनों के लिए अभी कोई बजट की व्यवस्था सरकार की तरफ से नहीं मिल पाई है ।


Conclusion:डॉ कुँवर सिंह भंडारी ने बताया कि ईएमओ के अनुसार दो डॉक्टरों की नियुक्ति होनी आवश्यक है और डॉक्टरों की कमी के चलते तीन तीन डॉक्टरों का कार्य उनको अकेले संभालना पढ़ रहा है जिससे उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।

बाइट डॉ कुंवर सिंह भंडारी प्रभारी निरीक्षक डोईवाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

पीटीसी
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