डोइवाला: पीपीपी मोड पर दिये जाने के बाद भी डोइवाला स्वास्थ्य केंद्र की हालत सुधर नहीं पाई है. हॉस्पिटल के लिए जरूरी मानी जाने वाली अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें खराब स्थिति में हैं. आलम ये है कि ये मशीनें काम करते-करते बंद हो जाती हैं. जिसके कारण मरीजों और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. डोइवाला स्वास्थ्य केंद्र की ये हालत तब है जब यहां की एक दिन की ओपीडी 300 से लेकर 500 तक है.
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की विधानसभा डोइवाला में ही स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं. विधानसभा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए साल 2017 में हिमालयन हॉस्पिटल जॉलीग्रांट अस्पताल से एमओयू साइन हुआ था. बावजूद इसके यहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है. हालांकि जॉलीग्रांट के डॉक्टर और स्टाफ यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन अस्पताल में मौजूद उपकरणों की हालत ने डॉक्टरों के हाथ बांध दिये हैं. हॉस्पिटल की मुख्य मशीनें अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीन पुरानी होने के चलते खराब स्थिति में हैं. मशीनें चलते चलते काम करना बंद कर देती हैं.
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वहीं ऑपरेशन थिएटर के लिए भी कोई व्यवस्था हॉस्पिटल में नहीं है. बात अगर नार्मल ऑपरेशन या नॉर्मल डिलीवरी की करें तो उसके लिए भी अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है. अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों और उनके तिमारदारों को बड़ी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं. जिसके चलते मरीजों को बाहर महंगा इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है.
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डोइवाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी निरीक्षक डॉ. कुंवर सिंह भंडारी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें पुरानी हो गई हैं. जिसके चलते मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर पा रही हैं. वहीं उन्होंने कहा कि नई मशीनों के लिए अभी कोई बजट की व्यवस्था सरकार की तरफ से नहीं मिल पाई है. डॉ. कुंवर सिंह भंडारी ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के चलते तीन-तीन डॉक्टरों का कार्य उन्हें अकेले संभालना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टरों की नियुक्ति होनी आवश्यक है.