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स्पेशल रिपोर्ट: 100 रुपए किलो बिकने वाले टमाटर डेढ़ रुपए को तरसे, ट्रेक्टर से फसलें नष्ट कर रहे किसान - चलाना पड़ा ट्रैक्टर

जालोर के गांवों में इस बार टमाटरों की पैदावार काफी अच्छी थी. जिसे देखकर किसानों को उम्मीद थी कि इस बार सेठ साहूकारों से लिया कर्ज चुका पाएंगे. लेकिन, टमाटर की पैदावार शुरू होते ही भाव अचानक गिर गए. अब कम भावों में भी खरीदार आनाकानी कर रहे हैं. जिसके कारण किसान अब खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर फसल नष्ट कर रहे हैं.

Jalore News, टमाटर के खरीददार
जालोर में नहीं मिल रहे टमाटर के खरीददार
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Published : Mar 11, 2020, 2:03 PM IST

Updated : Mar 11, 2020, 4:54 PM IST

जालोर. कभी 100 रुपये में बिकने वाले टमाटर को खरीदने के लिए अब एक रुपये किलो में भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं. टमाटर के दामों में आई गिरावट से किसानों बेहद परेशान हैं. यहां के किसानों को खरीदार नहीं मिल पाने के बाद 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव टमाटर बेचने को मजबूर हैं. फिर भी किसानों के खून पसीने से उगाई फसल के खरीददार नहीं मिलने की वजह से किसान अब खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उन्हें नष्ट कर रहे हैं.

जालोर में नहीं मिल रहे टमाटर के खरीददार

पढ़ें: किसान महापड़ाव: अब तक 22 किसानों ने ली भूमि समाधि, 221 सामूहिक अनशन पर

बता दें कि पिछली बार टमाटर के अच्छे दाम मिलने के बाद किसानों ने अच्छी-खासी बुवाई की थी, जिसके कारण बंम्पर पैदावार हुई. लेकिन, पैदावार के बाद टमाटर के भाव औधे मुंह गिर गए हैं. किसानों ने बताया कि हर साल किसानों के खेतों से फसल की आवक शुरू होते ही भाव जमीन पर आ जाते हैं. जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र में सब्जियां अच्छी खासी बोई जाती हैं. लेकिन, इसके नजदीक बड़ी मंडी नहीं है. इस कारण किसानों को उनकी फसल की उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. उनका कहना है कि बडगांव में एक छोटी सब्जी मण्डी है. जिसमें आस-पास के 12 से ज्यादा गांवों के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भरकर टमाटर ले जाते हैं. लेकिन, टमाटर के खरीददार नहीं मिलने के चलते किसानों को अपनी फसल गायों को खिलानी पड़ रही हैं.

पढ़ें: स्पेशल: संकट में राजस्थान का पोल्ट्री उद्योग, 3 महीने से कुक्कुट किसानों को लाखों का नुकसान

वहीं, व्यापारियों ने विभिन्न गांवों में टमाटर खरीदने के लिए कैंप तो लगा दिए. लेकिन, कई बड़े शहरों में टमाटरों की मांग नहीं होने के कारण टमाटर की खरीद शुरू नहीं हो पाई है. बड़गांव के अलावा सांचौर और भीनमाल शहर के आस-पास के गावों से छोटे-मोटे खरीदार जरूर पहुंच रहे हैं, लेकिन टमाटरों की आवक ज्यादा होने से किसानों से पूरे टमाटर नहीं खरीद पा रहे हैं और दाम भी कम मिल रहे हैं. इससे किसानों को नुकसान उठाकर टमाटर बेचना पड़ रहे हैं.

किसानों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से अपने बच्चों की तरह फसल की निदाई, गुड़ाई और पानी देकर फसल को पकाया था. लेकिन, बंपर पैदावार होने के बावजूद दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर फसल को खेत में छोड़ दें तो टमाटर के रस से खेत की जमीन पर परत जम जाती है, जिससे आगे फसल नहीं पाती है और टमाटर की फसल पर ट्रैक्टर चलाकर नष्ट करते हैं तो अलग से खर्चा भी लगता है. ऐसे में अब किसान टमाटर की खेती करके परेशान हो रहे हैं.

जालोर. कभी 100 रुपये में बिकने वाले टमाटर को खरीदने के लिए अब एक रुपये किलो में भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं. टमाटर के दामों में आई गिरावट से किसानों बेहद परेशान हैं. यहां के किसानों को खरीदार नहीं मिल पाने के बाद 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव टमाटर बेचने को मजबूर हैं. फिर भी किसानों के खून पसीने से उगाई फसल के खरीददार नहीं मिलने की वजह से किसान अब खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उन्हें नष्ट कर रहे हैं.

जालोर में नहीं मिल रहे टमाटर के खरीददार

पढ़ें: किसान महापड़ाव: अब तक 22 किसानों ने ली भूमि समाधि, 221 सामूहिक अनशन पर

बता दें कि पिछली बार टमाटर के अच्छे दाम मिलने के बाद किसानों ने अच्छी-खासी बुवाई की थी, जिसके कारण बंम्पर पैदावार हुई. लेकिन, पैदावार के बाद टमाटर के भाव औधे मुंह गिर गए हैं. किसानों ने बताया कि हर साल किसानों के खेतों से फसल की आवक शुरू होते ही भाव जमीन पर आ जाते हैं. जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र में सब्जियां अच्छी खासी बोई जाती हैं. लेकिन, इसके नजदीक बड़ी मंडी नहीं है. इस कारण किसानों को उनकी फसल की उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. उनका कहना है कि बडगांव में एक छोटी सब्जी मण्डी है. जिसमें आस-पास के 12 से ज्यादा गांवों के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भरकर टमाटर ले जाते हैं. लेकिन, टमाटर के खरीददार नहीं मिलने के चलते किसानों को अपनी फसल गायों को खिलानी पड़ रही हैं.

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वहीं, व्यापारियों ने विभिन्न गांवों में टमाटर खरीदने के लिए कैंप तो लगा दिए. लेकिन, कई बड़े शहरों में टमाटरों की मांग नहीं होने के कारण टमाटर की खरीद शुरू नहीं हो पाई है. बड़गांव के अलावा सांचौर और भीनमाल शहर के आस-पास के गावों से छोटे-मोटे खरीदार जरूर पहुंच रहे हैं, लेकिन टमाटरों की आवक ज्यादा होने से किसानों से पूरे टमाटर नहीं खरीद पा रहे हैं और दाम भी कम मिल रहे हैं. इससे किसानों को नुकसान उठाकर टमाटर बेचना पड़ रहे हैं.

किसानों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से अपने बच्चों की तरह फसल की निदाई, गुड़ाई और पानी देकर फसल को पकाया था. लेकिन, बंपर पैदावार होने के बावजूद दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर फसल को खेत में छोड़ दें तो टमाटर के रस से खेत की जमीन पर परत जम जाती है, जिससे आगे फसल नहीं पाती है और टमाटर की फसल पर ट्रैक्टर चलाकर नष्ट करते हैं तो अलग से खर्चा भी लगता है. ऐसे में अब किसान टमाटर की खेती करके परेशान हो रहे हैं.

Last Updated : Mar 11, 2020, 4:54 PM IST
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