बांसवाड़ा. बागीदौरा विधानसभा से निर्वाचित विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीय राज्य मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा शामिल नहीं किए जाने का दर्द अब भी पाले हुए हैं. इस दर्द का एक नजारा लोकसभा प्रचार के दौरान आयोजित एक सभा में देखने को मिला.
गहलोत कैबिनेट में बांसवाड़ा से चुने गए अर्जुन सिंह बामनिया को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया था जबकि मालवीय लगातार तीसरी बार भारी मतों से बागीदौरा से चुने गए थे. गत गहलोत सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा हासिल करने वाले मालवीय अपनी उपेक्षा से आहत है. पार्टी द्वारा उन्हें महत्व नहीं दिए जाने का दर्द सोमवार को उनके गृह क्षेत्र में आने वाले उदयपुरा बड़ा में लोकसभा चुनाव प्रचार की पहली सभा के दौरान मंच पर सामने आ गया.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पहले अपने संबोधन के दौरान गहलोत के प्रति भी नाराजगी जताते हुए इशारों ही इशारों में मालवीय का दर्द साफ झलका. उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे की ओर मुखातिब होते हुए खुद को जंगल में नाचने वाला मोर निरूपित किया जिसे कोई नहीं देखता. भले ही नाच-नाच कर मोर की आंखों से आंसू छलक रहे हैं. पिछले 3 माह से दबे दर्द को अपनी जुबान पर लाते हुए मालवीय ने इसे आजमाने का आह्वान करते हुए कहां की वे लंबी रेस के घोड़े हैं.
इसके तुरंत बाद संबोधन के लिए आए उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने सबसे पहले मालवीय को जवाब दिया जिसकी उनके समर्थकों को भी उम्मीद नहीं थी. पायलट ने संबोधन की शुरुआत में ही मोर वाले वक्तव्य का जवाब देते हुए कहा कि सभा में आए सब लोग हमारे परिवार के हैं इन लोगों का तो मैं नहीं कह सकता लेकिन यह बात कह सकता हूं कि आपका नाच जिला प्रमुख जरूर देखती होंगी.
पायलट के इस जवाब की ने मालवीय और न ही उनके समर्थकों को उम्मीद थी. आपको बता दे की जिला प्रमुख रेशमा मालवीय पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह मालवीय की धर्मपत्नी है. मंच से ही हाथों हाथ पायलट के जवाब को लेकर जनसभा में पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चा का बाजार गरम रहा.