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राजस्थान का नटवरलाल: एक संविदाकर्मी नियमों को ताक पर रखकर बन गया CEO और कर डाला करोड़ों रुपए का घोटाला

एसीबी की जयपुर यूनिट ने गुरुवार को एक बड़ी (ACB Trap in Jaipur) कार्रवाई को अंजाम देते हुए बायोफ्यूल अथॉरिटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. मामले में एसीबी की जांच जारी है और लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. मामले में अब तक क्या खुलासा हुआ है, यहां जानिए...

Biofuel Authority CEO Trap Case
Biofuel Authority CEO Trap Case
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Published : Apr 9, 2022, 11:58 AM IST

Updated : Apr 9, 2022, 1:42 PM IST

जयपुर. बायोफ्यूल अथॉरिटी के सीईओ सुरेंद्र सिंह राठौड़ की कारगुजारियों में सबसे दिलचस्प मामला यह निकल कर यह आया है कि पांच साल पहले तक वह केवल एक संविदाकर्मी था, जिसको कुछ हजार रुपए का वेतन मिलता होगा. उसको पता था कि सिस्टम में कहां-कहां छेद हैं जिसका उसने भरपूर फायदा उठाया और सारे नियमों को धत्ता बताते हुए एक सीईओ जैसे उच्च पद पर जा बैठा.

बता दें, एसीबी जयपुर टीम ने गुरुवार को 5 लाख रुपए की रिश्वत राशि लेते हुए बायोफ्यूल अथॉरिटी के सीईओ सुरेंद्र सिंह राठौड़ को रंगे हाथों गिरफ्तार (ACB Trap in Jaipur) किया था. मामले में सीईओ के खिलाफ जारी जांच में लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे (Biofuel Authority CEO Trap Case) हो रहे हैं. एसीबी ट्रैप के दौरान 1000 करोड़ रुपए के टर्नओवर की धमकी देने वाले राठौड़ की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

सीईओ राठौड़ 5 साल पहले तक एक मिडिल क्लास आदमी की तरह सामान्य तरीके से अपना जीवन यापन कर रहा था. लेकिन करोड़ों रुपए की मासिक बंधी लेने का खेल चालू करते ही उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई और वह करोड़ों रुपए की काली कमाई का मालिक बन गया. राठौड़ की लाइफ स्टाइल पूरी तरह से बदल गई और देखते ही देखते उसने 100 करोड़ रुपए की संपत्ति गैर कानूनी तरीके से अर्जित कर ली.

पढ़ें- Biofuel Authority CEO trap case: ACB के सर्च में बरामद हुई 3.62 करोड़ सहित 102 विदेशी शराब की बोतलें

राठौड़ नियम विरुद्ध बना सीईओ: सुरेंद्र सिंह राठौड़ वर्ष 2000 में एयरफोर्स से सार्जेंट के पद पर रिटायर होने के बाद पंचायती राज विभाग में एक प्रोजेक्ट के जरिए जुड़ा. उसके बाद वर्ष 2007 में पंचायती राज विभाग में संविदा के तहत भर्ती हो गया और यह भर्ती तमाम नियमों को ताक पर रखकर की गई. इसके बाद राठौड़ वर्ष 2009 में बायोफ्यूल अथॉरिटी से जुड़ गया और डिप्टी सीईओ और जॉइंट सीईओ के पद पर रहा. इसके बाद वर्ष 2019 में राठौड़ को सीईओ के पद पर पदोन्नत कर दिया गया.

इसके बाद तब से लेकर अब तक वह बायोफ्यूल अथॉरिटी के सीईओ के पद पर लगातार बना रहा. इससे पूर्व सीईओ के पद पर आईएएस अधिकारियों को तैनात किया जाता था, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर राठौड़ को सीईओ बनाया गया. राठौड़ बायोफ्यूल की मैन्युफैक्चरिंग करने वाले और उसके डिस्ट्रीब्यूशन का काम करने वाले सप्लायर्स से हर महीने 5 करोड़ रुपए की मासिक बंधी वसूल रहा था और लगातार अपनी काली कमाई में बढ़ोतरी कर रहा था. ताज्जुब की बात यह है कि प्रदेश में बायोफ्यूल का काम करने वाली 12 फर्म कार्यरत हैं, लेकिन किसी ने भी राठौड़ के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई.

संविदाकर्मी निकला राठौड़ का निजी आदमी: एसीबी ने राठौड़ के साथ ही देवेश शर्मा नामक एक संविदा कर्मी को राठौड़ के लिए 5 लाख रुपए की रिश्वत राशि लेते हुए गिरफ्तार किया था. जब इस पूरे प्रकरण की पड़ताल (Disclosures in Biofuel Authority CEO Trap Case) की गई तो यह तथ्य सामने आए हैं कि देवेश शर्मा बायोफ्यूल अथॉरिटी (Biofuel Authority) में संविदा कर्मी के पद पर कार्यरत ही नहीं है बल्कि उसे राठौड़ ने ही बायोफ्यूल की विभिन्न फर्म से अवैध वसूली करने के लिए रखा था. यहां तक कि राठौड़ ने बायोफ्यूल अथॉरिटी के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों तक को इसकी भनक नहीं लगने दी कि देवेश शर्मा संविदा कर्मी न होकर एक प्राइवेट व्यक्ति है. राठौड़ ने बायोफ्यूल अथॉरिटी के अन्य तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों को देवेश शर्मा के बारे में यही बता रखा था कि उसे संविदा पर लगाया गया है जो कि पिछले 3 वर्ष से काम कर रहा है.

पढ़ें-ACB Big Action : बायोफ्यूल अथॉरिटी का प्रोजेक्ट डायरेक्टर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार...घर से मिला 3.50 करोड़ कैश

दुष्कर्म का आरोपी है देवेश: प्रकरण में एसीबी की जांच (Biofuel Authority CEO Trap Case) लगातार जारी है, जिसमें परत दर परत कई खुलासे हो रहे हैं. राठौड़ के लिए अवैध वसूली करने वाले देवेश शर्मा का भी एक मामला सामने आया है, जिसमें उसने खुद को आरएएस अधिकारी बताकर एक युवती से दुष्कर्म किया था. 1 साल का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक उसे गिरफ्तार नहीं किया. ऊंची रसूख के चलते शिप्रापथ थाने में देवेश के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले में जांच को पिछले 1 साल से पेंडिंग रखा हुआ है.

वहीं, देवेश ने राठौड़ के साथ मिलकर जांच अधिकारी तक को बदलवा दिया और मामला महिला अनुसंधान सेल साउथ में ट्रांसफर करवा लिया, जिसकी भनक पीड़िता तक को नहीं है. पिछले 1 साल से देवेश लगातार पीड़िता पर राजीनामा करने का दबाव बनाता रहा और राठौड़ भी पीड़िता से देवेश का चाचा बनकर मिला. जिसमें खुद को एक बैंक अधिकारी बता कर मामले में राजीनामा करने का दबाव बनाया. फिलहाल, मामले में एसीबी की जांच-पड़ताल जारी है.

जयपुर. बायोफ्यूल अथॉरिटी के सीईओ सुरेंद्र सिंह राठौड़ की कारगुजारियों में सबसे दिलचस्प मामला यह निकल कर यह आया है कि पांच साल पहले तक वह केवल एक संविदाकर्मी था, जिसको कुछ हजार रुपए का वेतन मिलता होगा. उसको पता था कि सिस्टम में कहां-कहां छेद हैं जिसका उसने भरपूर फायदा उठाया और सारे नियमों को धत्ता बताते हुए एक सीईओ जैसे उच्च पद पर जा बैठा.

बता दें, एसीबी जयपुर टीम ने गुरुवार को 5 लाख रुपए की रिश्वत राशि लेते हुए बायोफ्यूल अथॉरिटी के सीईओ सुरेंद्र सिंह राठौड़ को रंगे हाथों गिरफ्तार (ACB Trap in Jaipur) किया था. मामले में सीईओ के खिलाफ जारी जांच में लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे (Biofuel Authority CEO Trap Case) हो रहे हैं. एसीबी ट्रैप के दौरान 1000 करोड़ रुपए के टर्नओवर की धमकी देने वाले राठौड़ की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

सीईओ राठौड़ 5 साल पहले तक एक मिडिल क्लास आदमी की तरह सामान्य तरीके से अपना जीवन यापन कर रहा था. लेकिन करोड़ों रुपए की मासिक बंधी लेने का खेल चालू करते ही उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई और वह करोड़ों रुपए की काली कमाई का मालिक बन गया. राठौड़ की लाइफ स्टाइल पूरी तरह से बदल गई और देखते ही देखते उसने 100 करोड़ रुपए की संपत्ति गैर कानूनी तरीके से अर्जित कर ली.

पढ़ें- Biofuel Authority CEO trap case: ACB के सर्च में बरामद हुई 3.62 करोड़ सहित 102 विदेशी शराब की बोतलें

राठौड़ नियम विरुद्ध बना सीईओ: सुरेंद्र सिंह राठौड़ वर्ष 2000 में एयरफोर्स से सार्जेंट के पद पर रिटायर होने के बाद पंचायती राज विभाग में एक प्रोजेक्ट के जरिए जुड़ा. उसके बाद वर्ष 2007 में पंचायती राज विभाग में संविदा के तहत भर्ती हो गया और यह भर्ती तमाम नियमों को ताक पर रखकर की गई. इसके बाद राठौड़ वर्ष 2009 में बायोफ्यूल अथॉरिटी से जुड़ गया और डिप्टी सीईओ और जॉइंट सीईओ के पद पर रहा. इसके बाद वर्ष 2019 में राठौड़ को सीईओ के पद पर पदोन्नत कर दिया गया.

इसके बाद तब से लेकर अब तक वह बायोफ्यूल अथॉरिटी के सीईओ के पद पर लगातार बना रहा. इससे पूर्व सीईओ के पद पर आईएएस अधिकारियों को तैनात किया जाता था, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर राठौड़ को सीईओ बनाया गया. राठौड़ बायोफ्यूल की मैन्युफैक्चरिंग करने वाले और उसके डिस्ट्रीब्यूशन का काम करने वाले सप्लायर्स से हर महीने 5 करोड़ रुपए की मासिक बंधी वसूल रहा था और लगातार अपनी काली कमाई में बढ़ोतरी कर रहा था. ताज्जुब की बात यह है कि प्रदेश में बायोफ्यूल का काम करने वाली 12 फर्म कार्यरत हैं, लेकिन किसी ने भी राठौड़ के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई.

संविदाकर्मी निकला राठौड़ का निजी आदमी: एसीबी ने राठौड़ के साथ ही देवेश शर्मा नामक एक संविदा कर्मी को राठौड़ के लिए 5 लाख रुपए की रिश्वत राशि लेते हुए गिरफ्तार किया था. जब इस पूरे प्रकरण की पड़ताल (Disclosures in Biofuel Authority CEO Trap Case) की गई तो यह तथ्य सामने आए हैं कि देवेश शर्मा बायोफ्यूल अथॉरिटी (Biofuel Authority) में संविदा कर्मी के पद पर कार्यरत ही नहीं है बल्कि उसे राठौड़ ने ही बायोफ्यूल की विभिन्न फर्म से अवैध वसूली करने के लिए रखा था. यहां तक कि राठौड़ ने बायोफ्यूल अथॉरिटी के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों तक को इसकी भनक नहीं लगने दी कि देवेश शर्मा संविदा कर्मी न होकर एक प्राइवेट व्यक्ति है. राठौड़ ने बायोफ्यूल अथॉरिटी के अन्य तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों को देवेश शर्मा के बारे में यही बता रखा था कि उसे संविदा पर लगाया गया है जो कि पिछले 3 वर्ष से काम कर रहा है.

पढ़ें-ACB Big Action : बायोफ्यूल अथॉरिटी का प्रोजेक्ट डायरेक्टर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार...घर से मिला 3.50 करोड़ कैश

दुष्कर्म का आरोपी है देवेश: प्रकरण में एसीबी की जांच (Biofuel Authority CEO Trap Case) लगातार जारी है, जिसमें परत दर परत कई खुलासे हो रहे हैं. राठौड़ के लिए अवैध वसूली करने वाले देवेश शर्मा का भी एक मामला सामने आया है, जिसमें उसने खुद को आरएएस अधिकारी बताकर एक युवती से दुष्कर्म किया था. 1 साल का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक उसे गिरफ्तार नहीं किया. ऊंची रसूख के चलते शिप्रापथ थाने में देवेश के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले में जांच को पिछले 1 साल से पेंडिंग रखा हुआ है.

वहीं, देवेश ने राठौड़ के साथ मिलकर जांच अधिकारी तक को बदलवा दिया और मामला महिला अनुसंधान सेल साउथ में ट्रांसफर करवा लिया, जिसकी भनक पीड़िता तक को नहीं है. पिछले 1 साल से देवेश लगातार पीड़िता पर राजीनामा करने का दबाव बनाता रहा और राठौड़ भी पीड़िता से देवेश का चाचा बनकर मिला. जिसमें खुद को एक बैंक अधिकारी बता कर मामले में राजीनामा करने का दबाव बनाया. फिलहाल, मामले में एसीबी की जांच-पड़ताल जारी है.

Last Updated : Apr 9, 2022, 1:42 PM IST
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