भरतपुर. कोरोना संक्रमण के इस दौर में देशभर में लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं. लोग शहरों से पलायन कर वापस अपने गांव और घरों की ओर लौट रहे हैं. ऐसे में लोगों को रोजगार मिलना सबसे बड़ी समस्या बन चुका है. भारत में बेरोजगारी की दर तेजी से बढ़ती जा रही है. साल 2011-12 में ये दर केवल 2.2 फीसदी थी. जो 2020 में बढ़कर 6.1 फीसदी हो गई है.
रोजगार की तलाश में लाखों लोग इधर उधर भटक रहे हैं. ऐसे में कोरोना संक्रमण काल में अपनी नौकरी गंवाने वाले लोग अब नौकरी करने के बजाय खुद का उद्योग-धंधा खोलने की कवायद कर रहे हैं. यही वजह है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए जिला उद्योग केंद्र में अब आवेदनों की संख्या बढ़ने लगी है. इन आवेदनकर्ताओं में शहर के साथ ही गांव के लोग भी शामिल हैं.
'रोजगार के अवसर प्रदान कर रहीं ये योजनाएं'
भरतपुर के जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक बीएल मीणा बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के चलते काफी लोग बेरोजगार हो गए हैं. ऐसे में सरकार की दो योजनाएं लोगों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने वाली साबित हो रही है. ये योजनाएं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (MLUPY) है.
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'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम'
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) केंद्र सरकार की स्वरोजगार योजना है. PMEGP के तहत उद्योग लगाने पर 25 लाख और सेवा क्षेत्र में निवेश करने पर 10 लाख रुपये कर्ज मिलता है. अगर आप ग्रामीण इलाके में उद्योग लगाते हैं, तो सब्सिडी की यह रकम बढ़कर 25-35 फीसदी हो जाती है. PMEGP खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा 15 अगस्त, 2008 से शुरू की गई है.
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'किसे मिल सकता है PMEGP में लोन?'
- 18 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति
- कम से कम 8वीं कक्षा पास हो.
- PMEGP के तहत शुरू नए प्रोजेक्ट पर ही स्कीम का मिलेगा लाभ
- सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG), जिन्हें किसी अन्य योजना में मदद नहीं मिल रही हो.
- सोसाइटी एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत सोसाइटी
- सहकारी संस्थान और धर्मार्थ संस्था
ईटी की ही एक खबर के मुताबिक पिछले तीन साल में PMEGP से 11.13 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिली है.
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'PMEGP के उद्देश्य'
केंद्र सरकार इस योजना के माध्यम से युवाओं में स्व रोजगार को बढ़ावा देना चाहती है. जिसका उद्देश्य यह है कि लोग ग्रामीण, कस्बाई या शहरी इलाके में छोटे-छोटे कारोबार शुरू कर अपने जीवनयापन के लिए साधन बना सकें. साथ ही अपने रोजगार से दो-चार और भी लोगों को जीविका का साधन उपलब्ध करा सकें.
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PMEGP के तहत किस तरह के उद्योग लग सकते हैं?
- खनिज आधारित उद्योग
- वनाधारित उद्योग
- कृषि आधारित और खाद्य उद्योग
- रसायन आधारित उद्योग
- इंजीनियरिग और गैर पराम्परागत ऊर्जा वस्त्र उद्योग
- (खादी को छोड़कर) सेवा उद्योग
महाप्रबंधक बीएल मीणा ने बताया कि कोरोना के कारण उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों में यह योजनाएं रोजगार के नवीन अवसर प्रदान करने और पूर्व में स्थापित उद्योगों को फिर से पटरी पर लाने में मददगार साबित होंगी.
'मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना'
राजस्थान के उद्यमों की सरल स्थापना और राज्य के सभी वर्गों के व्यक्तियों को रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए यह योजना 17 दिसंबर 2019 को शुरू की गई. जिसके तहत बैंकों के माध्यम से ब्याज अनुदान युक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है. इस योजना का उद्देश्य स्वयं के उद्यम (विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार) की स्थापना या स्थापित उद्यम के विस्तार, विविधीकरण आधुनिकीकरण के लिए कम लागत में ऋण उपलब्ध कराना है. इसके तहत 10 करोड़ तक का लोन मिल सकता है.
'पात्रता की शर्तें'
- व्यक्ति की न्यूनतम आयु 18 साल या इससे अधिक होनी चाहिए.
- भागीदारी फर्म, LLP फर्म या कंपनी होने की स्थिति में नियमानुसार पंजीकृत होना अनिवार्य है.
- इसी के साथ स्वयं सहायता समूह का राज्य सरकार के किसी भी विभाग में पंजीकरण आवश्यक है.
यह योजना 17 दिसंबर 2019 से 31 मार्च 2024 तक प्रभावी रहेगी. इस मुख्यमंत्री लघु उद्योग (Enterprise) प्रोत्साहन योजना (Mukhyamantri Laghu Protsahan Yojana) के अंतर्गत बैंको की माध्यम से स्वयं के नए उद्यम की स्थापना या स्थापित उद्यम के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए कम लागत पर ऋण उपलब्ध करवाना है. सभी जिलों में कार्यरत जिला उद्योग केंद्र ही इस योजना के क्रियान्यवन के लिए नोडल एजेंसी होगी.
'नौकरी गई तो उद्यम के लिए किया आवेदन'
भरतपुर शहर के सुभाष नगर निवासी मोहम्मद अनस ने बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से पहले वह मिल्क प्रोडक्ट की मार्केटिंग का काम करते थे. लेकिन लॉकडाउन के दौरान उनकी नौकरी चली गई. ऐसे में अब वह खुद का डेयरी उद्योग शुरू करना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना के तहत जिला उद्योग केंद्र में आवेदन किया है.
वहीं उच्चैन निवासी पवन ने बताते हैं कि वह अभी स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं. लेकिन वर्तमान हालात में रोजगार मिलना मुश्किल है. ऐसे में वह अपने पिता के दूध के काम को ही विस्तार देने के लिए खुद का डेयरी उद्योग शुरू करना चाहते हैं. इसी के लिए पवन ने जिला उद्योग केंद्र में आवेदन किया है.
'हर दिन आ रहे आवेदन'
उद्योग प्रसार अधिकारी सूर्यकांत पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना के तहत जिला उद्योग केंद्र में हर दिन आवेदन आ रहे हैं. इस वर्ष अब तक प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में 33 आवेदवन और मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना में 70 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं. इन आवेदनों को विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद लोन के लिए बैंकों में भेज दिया गया है. इतना ही नहीं योजनाओं की जानकारी के लिए जिला उद्योग केंद्र में हर दिन 30 से 40 लोग पहुंच रहे हैं.
- मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना में व्यापार क्षेत्र में 1 करोड़ रुपए तक मिल सकता है लोन
- सेवा क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र में 10 करोड़ तक ऋण मिलने का है प्रावधान
- मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना के तहत मांस मदिरा, मादक पदार्थों से बने उत्पादों का निर्माण और विक्रय एवं विस्फोटक पदार्थ से संबंधित कार्यों को माना गया है अपात्र
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उद्यम स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपए तक मिल सकता है लोन
- आवेदनकर्ताओं को अलग-अलग श्रेणी के अनुसार 15 से 30% तक अनुदान का है प्रावधान
'इन उद्योगों की ओर रुझान ज्यादा'
उद्योग प्रसार अधिकारी सूर्यकांत पांडेय ने बताते हैं कि दोनों योजनाओं में शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी आवेदन कर रहे हैं. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में टेंट हाउस, सीमेंट ब्लॉक, टाइल्स निर्माण और डेयरी उद्योग के लिए सर्वाधिक आवेदन कर रहे हैं. मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना में रेडीमेड गारमेंट, जनरल स्टोर और डेयरी उद्योग स्थापित करने के लिए आवेदन कर रहे हैं.