जबलपुर। कोरोना वायरस संकट काल के दौरान सबसे बड़ी समस्या स्कूली बच्चों के सामने आई है. स्कूल बंद हो जाने की वजह से बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पा रहे. शहरी इलाकों में लोगों के पास मोबाइल थे, इसलिए ऑनलाइन क्लास हो गई और बच्चों ने पढ़ाई कर ली, लेकिन दूरदराज के गांवों में लोगों के पास मोबाइल नहीं थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित ही रही.
जिले के सहजपुर गांव में भी बच्चों को पढ़ाई करने में काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ा. इन बच्चों की मदद करने के लिए सामने आईं अर्चना सोलंकी. अर्चना गांव की ही घरेलू महिला हैं और वो पढ़ी-लिखी हैं. पढ़े-लिखे होने के कारण शुरुआत में अर्चना के पास पढ़ने के लिए 4 बच्चे आए. अर्चना ने सहमति दी और चार बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ने लगी और आज इनकी क्लास में 200 से ज्यादा बच्चे पढाई कर रहे हैं. इतना ही नहीं अर्चना के साथ उनके परिवार के दूसरे सदस्य भी इन बच्चों को पढ़ाते हैं. अर्चना ने पढ़ाने की शुरुआत अपने घर के बरामदे से की थी, इनका घर कच्चा है. जब बच्चे बढ़ने लगे तो सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत सामने आई, तो घर काे आंगन और दालान समेत कमरों को स्कूल में तब्दील कर दिया.
बढ़ती हुई संख्या और बच्चों की पढ़ाई के मद्देनजर सरकारी स्कूल के शिक्षक भी समय-समय पर इस मोहल्ला क्लास को देखने के लिए पहुंच रहे हैं. अर्चना ने बताया कि उन्हें इस काम से पैसा नहीं मिला, लेकिन बच्चों को शिक्षा मिली.
कोरोनाकाल के बाद भी जारी रहेगी क्लास
अर्चना और उनके परिवार ने कहा कि भले ही कोरोनाकाल खत्म हो जाए, लेकिन यह क्लास अब बंद नहीं होगी.