भिवानी: स्कूली शिक्षा निदेशालय की कार्यशैली का भी कोई जवाब नहीं. निदेशालय ने नियम तो स्कूलों के लिए बनाए गए, लेकिन नियमों को बनाकर खुद शिक्षा विभाग ही भूल गया. यह चौंकाने वाला खुलासा एक आरटीआई में हुआ है. जिसमें शिक्षा निदेशालय से प्रदेश भर में चल रहे निजी स्कूलों के ऑडिट संबंधी जानकारी मांगी गई थी. लेटलतीफ शिक्षा निदेशालय से जवाब आया कि आज तक किसी भी निजी स्कूल का शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तरफ से कोई ऑडिट नहीं किया गया.
डीईओ को कार्रवाई के निर्देश
निदेशालय की तरफ हर साल निजी स्कूलों से ऑडिट रिपोर्ट मांगे जाने के बावजूद भी नहीं दी जा रही है. अब इस मामले में रोहतक मंडल के आयुक्त ने भिवानी जिले के 26 निजी स्कूलों के ऑडिट जांच संबंधी शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
26 स्कूलों पर होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि रोहतक मंडल आयुक्त ने उसकी शिकायत पर अब जिला शिक्षा अधिकारी को भिवानी जिले के 26 निजी स्कूलों के ऑडिट जांच संबंधी मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी की तरफ से भी शिकायत में दर्शाए गए संबंधित निजी स्कूलों के खातों की ऑडिट, कमेटी गठित कर करवाई जाएगी. जिसकी रिपोर्ट भी फिर मंडल आयुक्त को भेजी जाएगी.
बृजपाल परमार ने बताया कि आरटीआई में मांगी गई सूचना के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि अधिकांश बड़े स्कूल हर साल करोड़ों रुपयों के स्टूडेंट फंड की राशि को किसी दूसरे ट्रांजेक्शन में स्थानांतरण और इस्तेमाल कर रहे हैं.जबकि हरियाणा एजुकेशन एक्ट 1995 के सेक्शन 4 के अंतर्गत गैर कानूनी और नियमों के विरुद्ध हैं. ऐसा करने वाले निजी स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है और संबंधित मैनेजमेंट कमेटी सदस्यों पर धोखाधड़ी का आपराधिक केस भी दर्ज हो सकता है.