नई दिल्ली: राजधानी में पुलिस और वकीलों के बीच छिड़ी जंग के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने दिल्ली के सभी बार एसोसिएशन से हड़ताल वापस लेने का आह्वान किया है, बीसीआई की ओर से चेयरमैन मनन मिश्रा ने पत्र लिखकर कहा है कि कोर्ट परिसर में हिंसा तुरंत बंद हो.
![Bar Council of India appealed lawyers to withdraw the strike](https://etvbharatimages.akamaized.net/etvbharat/prod-images/4966914_barcouncilofindia.jpg)
'न बने हंसी का पात्र'
बीसीआई ने कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ बार एसोसिएशन आफ दिल्ली को लिखी चिट्ठी में कहा है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आपने न्यायिक जांच की मांग की थी और हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच का आदेश भी दे दिया है, बीसीआई ने कहा कि हमने कोर्ट से आरोपी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने की मांग की थी जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच से दिल्ली पुलिस अलग हो गई है और जस्टिस एसपी गर्ग के नेतृत्व में बनी जांच कमेटी को आईबी, BCI और विजिलेंस सहयोग करेगा. ऐसी स्थिति में कोआर्डिनेशन कमेटी का हड़ताल जारी रखने का फैसला औचित्यहीन है. BCI ने कहा है कि बार एसोसिएशन को इसके कानूनी पहलुओं पर विचार करना चाहिए ताकि हम आम लोगों की नजरों में हंसी का पात्र न बनें.
'चुनाव कारण तो नहीं?'
BCI ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली बार काउंसिल के सभी बड़े नेता खुश थे लेकिन 24 घंटे में ही क्या बदल गया, क्या बार एसोसिएशंस के चुनाव नजदीक हैं जिसकी वजह से हड़ताल जारी रखा जा रहा है. बीसीआई ने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हमें सही फैसला लेना चाहिए.
न्यायिक जांच के दौरान ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे कोई असहज स्थिति पैदा हो. हमारी कोशिश में होनी चाहिए कि किसी वकील को दोषी नहीं ठहराया जाए. हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद हड़ताल के दौरान साकेत कोर्ट में हिंसा की गई. पत्रकारों के साथ बदतमीजी की गई.
बता दें कि पिछले 3 नवंबर को बीसीआई ने सभी वकीलों से 5 नवंबर से काम पर लौटने की अपील की थी. लेकिन 4 नवंबर को कोआर्डिनेशन कमेटी ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया.