नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय को पांच वर्षीय एकीकृत कानून पाठ्यक्रमों में छात्रों को केवल वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2023-24 के लिए CLAT-2022 स्कोर के आधार पर प्रवेश देने की अनुमति दी. अंतरिम आदेश पारित करते हुए मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस तथ्य पर विचार किया कि इस वर्ष के लिए अन्य सभी विश्वविद्यालयों में कक्षाएं शुरू हो गई है.
पीठ ने आदेश दिया कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए सभी विश्वविद्यालयों में कक्षाएं पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए अंतरिम राहत के रूप में डीयू को क्लैट 2022 परिणामों के आधार पर केवल इस वर्ष प्रवेश देने की अनुमति है. हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि इस मामले में एक मुख्य मुद्दा यह भी शामिल है कि क्या सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए सीयूईटी अनिवार्य होना चाहिए या क्या ऐसे विश्वविद्यालयों को प्रवेश के मामले में निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.
बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय विधि संकाय के एक छात्र द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि डीयू के विधि संकाय में पांच वर्षीय एकीकृत कानून पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए लगाई गई शर्त पूरी तरह से अनुचित और मनमानी है. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विधि संकाय में पांच वर्षीय एकीकृत कानून पाठ्यक्रमों में प्रवेश के उद्देश्य के साथ कोई तर्कसंगत संबंध नहीं है. सुनवाई के दौरान, पीठ ने अदालत के पहले के निर्देशों के अनुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष द्वारा दायर हलफनामे पर गौर किया.
यूजीसी के प्रस्तुतीकरण के अनुसार, यह समाधान किया गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सभी सामान्य डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी अनिवार्य होगा. इसके अलावा हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण भारद्वाज को न्याय मित्र नियुक्त किया गया था. इस मामले की आगे की सुनवाई 23 नवंबर को होगी.
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