नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट के बाद ट्रक आपरेटरों के संगठन आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने सरकार से ईंधन कीमतों में कटौती की मांग की है. एआईएमटीसी ने इसके साथ ही टोल संग्रह भी स्थगित करने की मांग की है. ट्रक आपरेटरों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से उन्हें गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में राजमार्गों पर टोल संग्रह को तत्काल स्थगित किया जाए.
एआईएमटीसी का कहना है कि कोविड-19 महामारी की वजह से लागू राष्ट्रव्यापी बंद से ट्रांसपोर्ट क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है, ऐसे में उसे राहत की दरकार है. एआईएमटीसी ट्रांसपोर्टरों का संगठन है. इसके सदस्यों में 95 लाख ट्रक आपरेटरों और इकाइयों शामिल हैं.
एआईएमटीसी के अध्यक्ष कुलतरन सिंह अटवाल ने कहा, "डीजल और पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी से हमारी स्थिति और खराब हुई है. ईंधन कीमतों में कटौती नहीं की जा रही. इन पर कर और मूल्य वर्धित कर (वैट) की दरें बढ़ा दी गई हैं."
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है. 17 अप्रैल, 2020 को भारत द्वारा खरीदे जाने वाले कच्चे तेल की लागत 20.56 डॉलर प्रति बैरल थी. यह लागत ओमान, दुबई और ब्रेंट कच्चे तेल का औसत है.
अटवाल ने कहा, "इस साल की शुरुताअ से ब्रेंट तेल के दाम करीब 60 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं. वहीं इस दौरान डीजल के दाम सिर्फ 10 प्रतिशत घटे हैं."
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आईएमटीसी ने कहा कि मई, 2014 से सरकार ने कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिया है. इसके उलट उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी कर पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) का मुनाफा बढ़ाने का काम किया है. अटवाल ने कहा कि कच्चे तेल कीमतों में वैट और उत्पाद शुल्क से भी ईंधन का दाम तय होता है. हम एक नवंबर, 2014 को पेट्रोल पर 9.20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.46 रुपये प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क दे रहे थे.
"आज पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 22.98 रुपये प्रति लीटर (सड़क उपकर सहित) और डीजल पर 18.83 रुपये प्रति लीटर हो गया है."
उन्होंने कहा कि दिल्ली में पेट्रोल की खरीद पर हम प्रति लीटर 37.84 रुपये और डीजल पर 28.01 रुपये प्रति लीटर का कर देते हैं.
(पीटीआई-भाषा)