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मधेपुरा: कड़ाके की ठंड पर आस्था भारी, भक्तों ने शिवगंगा में लगाई आस्था की डुबकी - बाबा मनोकामना लिंग

मंदिर के पुजारी संजीव ठाकुर ने कहा कि बाबा सिंघेश्वर नाथ बाबा मनोकामना लिंग के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हैं. भक्त यहां अपनी मुरादे लेकर आते हैं. चाहे कोई भी मौसम हो यहां भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है.

Madhepura
शिव मंदिर
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Published : Dec 31, 2019, 8:49 PM IST

मधेपुरा: जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक सिंघेश्वर स्थान कई मायनों में शिव भक्तों की आस्था का प्रतीक है. ऐसे में कड़ाके की ठंड में भी श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए यहां आ रहे हैं. मान्यताओं के अनुसार सिंघेश्वर के इस शिव मंदिर को किसी काल में भगवान विष्णु ने बनवाया था. शिव पुराण के रूद्र संहिता खंड में वर्णित महर्षि दधीचि और राजा ध्रुत के बीच अंतिम लड़ाई यहीं हुई थी. सिंघेश्वर मंदिर में शिवलिंग की कामना लिंग के रूप में पूजा की जाती है.

भक्तों ने शिवगंगा कुंड में लगाई डुबकी
बता दें कि मान्यताओं के अनुसार यहां राजा दशरथ के लिए श्रृंगी ऋषि ने पुत्र श्री यज्ञ कराया था. इसलिए संतान की चाहत के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु बाबा के पास आते हैं. तापमान में हो रही लगातार गिरावट के बीच शिव भक्तों की आस्था साल के अंतिम दिन सुबह से ही देखने को मिली. घने कोहरे के बीच भक्त शिवगंगा कुंड में स्नान कर बाबा को जल चढ़ाते नजर आए. वहीं, श्रद्धालु प्रभास आनंद झा ने कहा की बीते 14 सालों से वह प्रत्येक मंगलवार को शिवगंगा कुंड में स्नान करने के बाद बाबा को जल चढ़ाते हैं.

ईटीवी भारत की रिपोर्ट

मुरादे लेकर यहां आते हैं भक्त
मंदिर के पुजारी संजीव ठाकुर ने कहा कि हमारी सभ्यता और संस्कृति विदेशी प्रभाव की वजह से खत्म होती जा रही है. यही वजह है कि समाज में विसंगतियां फैल रही है. उन्होंने कहा कि हमें सनातन धर्म से जुड़ी आस्था का सम्मान और पालन करना चाहिए. साथ ही कहा कि बाबा सिंघेश्वर नाथ बाबा मनोकामना लिंग के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हैं. भक्त यहां अपनी मुरादे लेकर आते हैं. चाहे कोई भी मौसम हो यहां भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है.

मधेपुरा: जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक सिंघेश्वर स्थान कई मायनों में शिव भक्तों की आस्था का प्रतीक है. ऐसे में कड़ाके की ठंड में भी श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए यहां आ रहे हैं. मान्यताओं के अनुसार सिंघेश्वर के इस शिव मंदिर को किसी काल में भगवान विष्णु ने बनवाया था. शिव पुराण के रूद्र संहिता खंड में वर्णित महर्षि दधीचि और राजा ध्रुत के बीच अंतिम लड़ाई यहीं हुई थी. सिंघेश्वर मंदिर में शिवलिंग की कामना लिंग के रूप में पूजा की जाती है.

भक्तों ने शिवगंगा कुंड में लगाई डुबकी
बता दें कि मान्यताओं के अनुसार यहां राजा दशरथ के लिए श्रृंगी ऋषि ने पुत्र श्री यज्ञ कराया था. इसलिए संतान की चाहत के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु बाबा के पास आते हैं. तापमान में हो रही लगातार गिरावट के बीच शिव भक्तों की आस्था साल के अंतिम दिन सुबह से ही देखने को मिली. घने कोहरे के बीच भक्त शिवगंगा कुंड में स्नान कर बाबा को जल चढ़ाते नजर आए. वहीं, श्रद्धालु प्रभास आनंद झा ने कहा की बीते 14 सालों से वह प्रत्येक मंगलवार को शिवगंगा कुंड में स्नान करने के बाद बाबा को जल चढ़ाते हैं.

ईटीवी भारत की रिपोर्ट

मुरादे लेकर यहां आते हैं भक्त
मंदिर के पुजारी संजीव ठाकुर ने कहा कि हमारी सभ्यता और संस्कृति विदेशी प्रभाव की वजह से खत्म होती जा रही है. यही वजह है कि समाज में विसंगतियां फैल रही है. उन्होंने कहा कि हमें सनातन धर्म से जुड़ी आस्था का सम्मान और पालन करना चाहिए. साथ ही कहा कि बाबा सिंघेश्वर नाथ बाबा मनोकामना लिंग के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हैं. भक्त यहां अपनी मुरादे लेकर आते हैं. चाहे कोई भी मौसम हो यहां भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है.

Intro:वर्ष 2019 अपने समापन की ओर है।वहीं दूसरी तरफ कड़ाके की ठंड में भी मधेपुरा जिले के सिंघेश्वर स्थान पहुंचकर श्रद्धालु साल का अंतिम दिन शिव की उपासना कर मना रहे हैं।


Body:sub title भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकी,सिंघेश्वर नाथ करते हैं भक्तों की मनोकामना पूरी, साल के अंतिम दिन आस्था का प्रतीक। वी.ओ मधेपुरा जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक सिंघेश्वर स्थान कई मायनों में शिव भक्तों की आस्था का प्रतीक है। मान्यताओं के अनुसार सिंहेश्वर के इस शिव मंदिर को किसी काल में स्वयं भगवान विष्णु ने बनवाया था। शिव पुराण के रूद्र संहिता खंड में वर्णित महर्षि दधीचि और राजा ध्रुत के बीच अंतिम संघर्ष यही हुआ था। सिंघेश्वर मंदिर स्थित शिवलिंग की कामना लिंग के रूप में पूजा की जाती है। राजा दशरथ के लिए श्रृंगी ऋषि ने पुत्र श्री यज्ञ कराया था इसलिए संतान की चाहत के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु बाबा के पास आते हैं। तापमान में हो रही लगातार गिरावट के बीच शिव भक्तों की आस्था साल के अंतिम दिन सुबह से ही देखने को मिली। घने कोहरे के बीच शिव भक्त शिवगंगा कुंड में स्नान कर बाबा को जल चढ़ाते नजर आए। वही श्रद्धालु प्रभास आनंद झा ने कहा की विगत 14 वर्षों से वह प्रत्येक मंगलवार को शिवगंगा कुंड में स्नान करने के बाद बाबा को जल चढ़ाते हैं। हमारी सभ्यता और संस्कृति विदेशी प्रभाव की वजह से विलुप्त होती जा रही है। यही कारण है कि समाज में विसंगतियां फैल रही है।हम सभी को पूर्वजों और सनातन धर्म से जुड़ी आस्था का सम्मान और पालन करना चाहिए। बाईट आभास आनंद झा, श्रद्धालु वही पुजारी संजीव ठाकुर ने कहा कि बाबा सिंघेश्वर नाथ बाबा मनोकामना लिंग के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हैं।भक्त यहां अपनी मुरादे लेकर आते हैं। चाहे कोई भी मौसम हो भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है। बाईट-2 संजीव ठाकुर,पुजारी


Conclusion:कड़ाके की ठंड के बीच भक्तों की आस्था भारत की संस्कृति और सभ्यता का सबसे बड़ा उदाहरण बन रहा है।
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