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'त्रिदेव' भी नहीं बचा सके कांग्रेस की जमानत, महागठबंधन के भविष्य पर छाए हैं संकट के बादल - कांग्रेस की हार

बिहार विधानसभा उपचुनाव में जदयू ने दोनों सीटों पर कब्जा जमा लिया है. इस दौरान राजद और कांग्रेस गठबंधन में फूट पड़ी. राजद ने तो अपनी इज्जत बचा ली लेकिन कांग्रेस जमानत भी नहीं बचा सकी. स्टार प्रचारक के रूप में आए 'त्रिदेव' कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी भी कांग्रेस की नैया पार नहीं लगा पाए.

बिहार उपचुनाव
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Published : Nov 3, 2021, 10:15 PM IST

पटना: बिहार में उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं और दोनों सीटों पर जदयू ने कब्जा जमाया है. उपचुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और राजद में ठन गई. दोनों दलों ने तारापुर और कुशेश्वरस्थान (Tarapur And Kusheshwarsthan Assembly By-Election) में उम्मीदवार खड़े कर दिए थे. राजद की प्रतिष्ठा तो बच गई लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गयी. कांग्रेस का प्रचार करने पहुंचे 'त्रिदेव' कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी के प्रचार का भी असर नहीं हुआ.


यह भी पढ़ें- नीतीश कैबिनेट की बैठक में 23 एजेंडों पर लगी मुहर

बता दें कि उपचुनाव में कांग्रेस और राजद के बीच आर-पार की लड़ाई छिड़ गई थी. हालांकि नुकसान दोनों दलों को हुआ. दोनों दल खाता नहीं खोल पाए. दोनों सीटें जदयू के खाते में चली गई. गत विधानसभा चुनाव में भी दोनों सीटें जदयू के कब्जे में थीं.

देखें वीडियो

युवा वोटरों को लुभाने के लिए राजद की तरफ से जहां तेजस्वी यादव ने कमान संभाल रखी थी, वहीं कांग्रेस पार्टी की ओर से कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी मैदान में उतरे थे. राजद ने चुनाव में तो इज्जत बचा ली लेकिन दोनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई. तारापुर में जहां कांग्रेस प्रत्याशी को 3000 वोट मिले वहीं कुशेश्वरस्थान में 5000 मतों से संतोष करना पड़ा.

'राजद की जिद की वजह से गठबंधन टूटा. नुकसान महागठबंधन का हुआ. राजद में लालू यादव के करीबी कुछ ऐसे मित्र हैं, जो यह नहीं चाहते कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनें.' -राजेश राठौर, मुख्य प्रवक्ता, कांग्रेस

'चुनाव से संकेत मिले हैं कि राजद के बिना विपक्ष की राजनीति नहीं हो सकती है. तेजस्वी यादव युवा चेहरे हैं और उन्हीं के नेतृत्व में राजनीतिक दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को टक्कर दे सकते हैं.' -एजाज अहमद, राजद प्रवक्ता

'कांग्रेस में जिन तीन युवा ब्रिगेड को मैदान पर उतारा था, वह पूरी तरह फेल साबित हुए हैं. कन्हैया कुमार बेगूसराय लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकते हैं, वे कांग्रेस की नैया कैसे पार लगाएंगे. दोनों सीटों पर कांग्रेस जमानत भी नहीं बचा पाई.' -संजय टाइगर, भाजपा प्रवक्ता

'कांग्रेस और राजद के बीच गठबंधन बरकरार रहेगा. लालू प्रसाद यादव ने भी संकेत दे दिए हैं. दोनों दल धीरे-धीरे एक फोरम पर आ जाएंगे. अलग-अलग जाकर दोनों दल नीतीश कुमार के सामने चुनौती पेश नहीं कर सकते.' -रवि उपाध्याय, राजनीतिक विश्लेषक

वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र का मानना है कि बिहार में कांग्रेस लालू प्रसाद यादव के कंधों पर ही राजनीति कर सकती है. चुनाव के नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है. कांग्रेस अगर यह लड़ाई आगे खींच लेती है तो संभवतः उसके जीवंत होने की संभावना बनी रहेगी. नहीं तो बिहार में उसे राजद के भरोसे ही राजनीति करनी होगी.

यह भी पढ़ें- बिहार उपचुनावः जनता ने जदयू को दिया दिवाली का तोहफा, तारापुर और कुशेश्वरस्थान सीट पर मिली जीत

पटना: बिहार में उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं और दोनों सीटों पर जदयू ने कब्जा जमाया है. उपचुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और राजद में ठन गई. दोनों दलों ने तारापुर और कुशेश्वरस्थान (Tarapur And Kusheshwarsthan Assembly By-Election) में उम्मीदवार खड़े कर दिए थे. राजद की प्रतिष्ठा तो बच गई लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गयी. कांग्रेस का प्रचार करने पहुंचे 'त्रिदेव' कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी के प्रचार का भी असर नहीं हुआ.


यह भी पढ़ें- नीतीश कैबिनेट की बैठक में 23 एजेंडों पर लगी मुहर

बता दें कि उपचुनाव में कांग्रेस और राजद के बीच आर-पार की लड़ाई छिड़ गई थी. हालांकि नुकसान दोनों दलों को हुआ. दोनों दल खाता नहीं खोल पाए. दोनों सीटें जदयू के खाते में चली गई. गत विधानसभा चुनाव में भी दोनों सीटें जदयू के कब्जे में थीं.

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युवा वोटरों को लुभाने के लिए राजद की तरफ से जहां तेजस्वी यादव ने कमान संभाल रखी थी, वहीं कांग्रेस पार्टी की ओर से कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी मैदान में उतरे थे. राजद ने चुनाव में तो इज्जत बचा ली लेकिन दोनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई. तारापुर में जहां कांग्रेस प्रत्याशी को 3000 वोट मिले वहीं कुशेश्वरस्थान में 5000 मतों से संतोष करना पड़ा.

'राजद की जिद की वजह से गठबंधन टूटा. नुकसान महागठबंधन का हुआ. राजद में लालू यादव के करीबी कुछ ऐसे मित्र हैं, जो यह नहीं चाहते कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनें.' -राजेश राठौर, मुख्य प्रवक्ता, कांग्रेस

'चुनाव से संकेत मिले हैं कि राजद के बिना विपक्ष की राजनीति नहीं हो सकती है. तेजस्वी यादव युवा चेहरे हैं और उन्हीं के नेतृत्व में राजनीतिक दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को टक्कर दे सकते हैं.' -एजाज अहमद, राजद प्रवक्ता

'कांग्रेस में जिन तीन युवा ब्रिगेड को मैदान पर उतारा था, वह पूरी तरह फेल साबित हुए हैं. कन्हैया कुमार बेगूसराय लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकते हैं, वे कांग्रेस की नैया कैसे पार लगाएंगे. दोनों सीटों पर कांग्रेस जमानत भी नहीं बचा पाई.' -संजय टाइगर, भाजपा प्रवक्ता

'कांग्रेस और राजद के बीच गठबंधन बरकरार रहेगा. लालू प्रसाद यादव ने भी संकेत दे दिए हैं. दोनों दल धीरे-धीरे एक फोरम पर आ जाएंगे. अलग-अलग जाकर दोनों दल नीतीश कुमार के सामने चुनौती पेश नहीं कर सकते.' -रवि उपाध्याय, राजनीतिक विश्लेषक

वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र का मानना है कि बिहार में कांग्रेस लालू प्रसाद यादव के कंधों पर ही राजनीति कर सकती है. चुनाव के नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है. कांग्रेस अगर यह लड़ाई आगे खींच लेती है तो संभवतः उसके जीवंत होने की संभावना बनी रहेगी. नहीं तो बिहार में उसे राजद के भरोसे ही राजनीति करनी होगी.

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