आगरा : सन 1931 में क्रांतिकारी देश की आजादी के लिए आवाज उठा रहे थे. रैली और सभाएं कर रहे थे. अंग्रेजी हुकूमत ने कड़ा पहरा कर दिया था. इन सबके बावजूद दिलेर हौसलों वाले शहर के 2 भाइयों ने 26 जनवरी को आगरा किले पर तिरंगा फहरा दिया था. दोनों भाइयों की जांबाजी और देशभक्ति से आगरा से लेकर इंग्लैंड तक खलबली मच गई थी. 94 साल पहले की ये कहानी गुम हो गई. आइए, गणतंत्र दिवस पर जानते हैं दोनों क्रांतिकारियों की कहानी...
भाइयों के ऐलान को लोगों ने समझा था मजाक : वरिष्ठ इतिहासकार राजकिशोर 'राजे' ने बताया कि, सन 1931 में आगरा की एत्मादपुर तहसील के गांव धीरपुरा (अब ये गांव फिरोजाबाद जिले में है) के सगे भाई महाराज सिंह और सोबरन सिंह ने गांव में ऐलान किया था कि अंजाम चाहे जो कुछ भी हो मगर वे आगरा किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराएंगे. गांव वालों ने दोनों की बात हो हंसी में टाल दिया. देशभक्त और दिलेर महाराज सिंह और सोबरन सिंह के सिर पर आगरा किला पर तिरंगा फहराने का जुनून सवार था. उस दौर में अंग्रेजी हुकूमत के लिए कई हिंदुस्तानी भी नौकरी करते थे. इसका दोनों भाइयों ने फायदा उठाया. दोनों भाइयों ने आगरा किला में प्रवेश के लिए हिंदुस्तानी नौकर के जरिए ही योजना बनाई.
डाक देने के बहाने पहुंचे आगरा किले में : वरिष्ठ इतिहासकार राजकिशोर 'राजे' ने बताया कि दोनों भाइयों ने डाक देने के बहाने किले में घुसने की योजना बनाई. दोनों भाइयों ने अंग्रेजी हुकूमत में चपरासी की नौकरी करने वाले व्यक्ति से आगरा किले में प्रवेश की पूरी प्रक्रिया जानी. 26 जनवरी 1931 को महाराज सिंह और सोबरन सिंह ने कपड़ों में तिरंगा छिपाया. महाराज सिंह चपरासी बन गए. जबकि सोबरन सिंह दिव्यांग बनकर हाथ में लाठी थाम ली. इसके बाद डाक देने की कहकर आगरा किला के दिल्ली गेट तक पहुंचे.
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आगरा किले की प्राचीर पर फहराया था तिरंगा : वरिष्ठ इतिहासकार बताते हैं कि किले के अंदर मौका मिलते ही महाराज सिंह और सोबरन सिंह आगरा किले की प्राचीर पर पहुंच गए. वहां अंग्रेजी हुकूमत का झंडा उतारकर दोनों ने अपने साथ छिपाकर लाए तिरंगे को लाठी में लगाकर फहरा दिया. इसके बाद दोनों आराम से वहां से निकल गए. इन दोनों ही भाइयों की देशभक्ति और साहस इतिहास के पन्नों में गुम हो गई. उन्होंने बताया कि इन दोनों ही भाइयों की देशभक्ति का जिक्र उन्होंने अपनी किताब 'तवारीख-ए-आगरा' में किया है.

आगरा से इंग्लैंड तक मच गई थी खलबली : राजकिशोर 'राजे' ने बताया कि देशभक्त महाराज सिंह और सोबरन सिंह के आगरा किला की प्राचीर पर तिरंगा फहराने से अंग्रेजी हुकूमत में खलबली मच गई. इसके बाद आगरा किले पर पहरा कड़ा कर दिया गया था. अंग्रेज अधिकारी ने आगरा किले में किसी भी भारतीय के प्रवेश पर रोक लगा दी थी. आगरा किला के आसपास दिखने वाले हर भारतीय को संदिग्ध मानकर चेकिंग की जाती थी. तिरंगा फहराने वाले के बारे में अंग्रेजी हुकूमत ने खूब छानबीन की. जांच में रात दिन एक कर दिया. इसके बावजूद दोनों भाइयों की पहचान नहीं कर सकी. दोनों भाई पकड़े भी नहीं गए.
दोनों भाइयों के नाम पर बनाया जाए स्मारक : वरिष्ठ इतिहासकार ने बताया कि आजादी के एक जुलूस के दौरान अंग्रेजी सेना ने फायरिंग कर दी थी. इसमें दोनों भाई शहीद हो गए. मगर, इतिहास में दोनों क्रांतिकारी भाइयों को वो सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे. मेरी मांग है कि सरकार दोनों भाइयों के सम्मान में कोई स्मृति चिह्न बनाए. जिससे आगे आने वाली नई पीढ़ी भी उनकी यशगाथा जान सकें. उनकी दिलेरी, त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें.
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