पटना : बिहार सरकार का वित्त विभाग इन दिनों सीएफएमएस के अपग्रेड वर्जन के कारण मुश्किलों में फंसा है. इसके कारण मंत्री से लेकर लाखों कर्मचारियों की सैलरी और अन्य भुगतान फंस गया है. पिछले 20 दिनों से वित्त विभाग के अकाउंट फ्रीज हो गए हैं. दिसंबर महीने में भी शिक्षक सहित लाखों कर्मचारियों के वेतन भी फंसे हुए हैं. वहीं जनवरी महीने की सैलरी को लेकर पूरे बिहार सहित सचिवालय के कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती है.
CFMS नए वर्जन के कारण आ रही समस्या : बिहार सरकार अपना वित्तीय कामकाज कंप्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (CFMS) के माध्यम से करती है. इसकी शुरुआत 2019 में हुई थी. इसको अपग्रेड किया जा रहा है और नए वर्जन के कारण ही यह समस्या पिछले 20 दिनों से वित्त विभाग को झेलना पड़ रहा है.
''बिहार में CFMS 1.0 पर काम हो रहा था जिसे अपग्रेड कर CFMS 2.0 किया जा रहा है पिछली बार जब CFMS 1.0 को अमली जामा में लाया गया था तो वित्त विभाग को 3 महीने तक परेशानी झेलनई पड़ी थी. इसे जल्द ठीक करने की कोशिश हो रही है. वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 27 जनवरी तक जो भी समस्या है उसे दूर कर ली जाएगी.''- सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री
मंत्री से लेकर कर्मचारी तक परेशान : मिल रही जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार सहित कई मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के बिल फंसे हुए हैं तो वहीं कई ठेकेदारों का भी भुगतान लटका हुआ है. दिसंबर महीने के भी लगभग आठ लाख कर्मचारियों की सैलरी अब तक नहीं मिल पाई है.
तकनीकी खामियों से हो रही परेशानी : नए सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियां हैं. सरकार का पुराना डेटा नए सिस्टम में ट्रांसफर नहीं हो पाया है. इसके अलावा HRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है, जिससे कर्मचारियों की जानकारी, जैसे- अकाउंट नंबर आदि, सिस्टम में नहीं आ रही है.
हर महीने 6 हजार करोड़ रुपए वेतन भुगतान : बिहार सरकार सालाना 75 हजार करोड़ रुपए से अधिक अपने कर्मचारियों के वेतन पर खर्च करती है. हर महीने करीब 6 हजार करोड़ रुपए वेतन भुगतान के लिए ट्रांसफर किए जाते हैं. तकनीकी समस्या के चलते इस बार यह प्रक्रिया बाधित हो गई है.
13.5 हजार करोड़ से अधिक राशि अटकी : पोर्टल के सही तरीके से काम नहीं करने से पूरे बिहार में 13.5 हजार करोड़ रुपये अटके हुए हैं. कई विभागों के वेतन और पेंशन भी शामिल है. इनमें विश्वविद्यालयों के 100 करोड़ से अधिक राशि भी शामिल है.
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