देहरादूनः अटल आयुष्मान योजना के तहत गड़बड़ियां रोकने और निजी चिकित्सालयों को इलाज करने पर भुगतान करने के लिए राज्य को पहला स्थान मिला है. यह पहला मौका नहीं है, जब भारत सरकार की तरफ से उत्तराखंड में चल रही अटल आयुष्मान योजना की तारीफ की गई हो. इससे पहले भी प्रदेश में योजना के बेहतर संचालन के लिए प्रदेश को सराहा जा चुका है.
उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना के 2 साल पूरे हो गए हैं. उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को योजना का लाभ दिया जा रहा है. इसमें केंद्र सरकार की तरफ से जो लोग योजना के तहत छूट गए थे, उन्हें राज्य सरकार ने अपनी योजना में शामिल किया है. अटल आयुष्मान योजना के तहत उत्तराखंड में कई अस्पतालों पर पेनल्टी भी लगाई गई है. खास बात ये है कि उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना के लिए मॉनिटरिंग का एक अलग से भिन्न तैयार किया गया है जो कि न केवल आम लोगों की समस्याओं को लेकर काम करता है, बल्कि अस्पतालों के भुगतान और गड़बड़ियों पर भी देख-रेख करता है.
उत्तराखंड के बेहतर संचालन के चलते ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण अटल आयुष्मान योजना के 2 साल पूरे होने पर उत्तराखंड की विशेष प्रस्तुति रखने जा रहा है. जिसे दूसरे राज्यों के साथ भी साझा किया जाएगा. उत्तराखंड में 23 लाख परिवारों को आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख तक के इलाज की सुविधा मिल रही है. वहीं, अस्पतालों को एक हफ्ते में क्लेम का भुगतान भी किया जा रहा है.
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कोरोना संकटकाल के दौरान भी अटल आयुष्मान योजना में प्रदेश में बेहतर काम किया है. कोरोना मरीजों का भी अटल आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज निजी अस्पतालों में किया जा रहा है. जिसका लाभ आसानी से लाभार्थी ले पा रहे हैं. हालांकि कोरोना के दौरान लगने वाले महंगे इंजेक्शन को विभिन्न निजी अस्पताल अटल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के लिए मुफ्त नहीं दे रहे हैं. कॉविड के मरीजों को करीब 5 हजार रुपए के इस इंजेक्शन के लिए खुद अलग से भुगतान करना पड़ रहा है. इस मामले में अटल आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारी इस जंक्शन का भी रिजल्ट वालों को भुगतान करने की बात कह रहे हैं और अस्पतालों द्वारा अलग से इसका बिल दिए जाने पर योजना के तहत इसके भुगतान का दावा कर रहे हैं.