वाराणसी: सर्व विद्या की राजधानी कहे जाने वाले काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के महामना सभागार में ''वैदिक विज्ञान केंद्र द्वारा वैदिक विज्ञान के विविध आयाम" पर 10 दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप का शुक्रवार को समापन हुआ.
यह कार्यशाला 10 फरवरी से प्रारंभ होकर 20 फरवरी को समाप्त हुई. उत्तर प्रदेश शिक्षा परिषद के पूर्व चेयरमैन प्रो. बीएस कार्यशाला के समापन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए. मंच से संबोधन करते हुए उन्होंने कहा शून्य और अनंत दोनों भारत की देन है. इसे सभी मानते हैं. साथ ही चारों उपवेद आयुर्वेद, धनुवेद, स्थापत्यवेद,और गंधर्ववेद का वैज्ञानिक आधार किया.
विश्वविद्यालय के मानवीय विज्ञान संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, प्रौद्योगिक संस्थान, आयुर्वेद संकाय, संस्कृत संकाय से भी 10 से अधिक अध्यापक और छात्र शामिल हुए. उस कार्यशाला के अंतर्गत 16 फरवरी को वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री ने राजीव विज्ञान केंद्र के नए भवन का उद्घाटन किया.
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10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला वैदिक विज्ञान के विविध आयाम है, जिसका आज समापन किया गया. आधुनिक विज्ञान कि वह लोग वैदिक हैं, जिनका वैदिक विज्ञान में रूचि है.आधुनिक विज्ञान और वैदिक विज्ञान को लेकर अपने विधा में कार्य किया है. ऐसे लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है.
-डॉ. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी, वैदिक विज्ञान केंद्र