भदोही: बाल विवाह एक ऐसी कुप्रथा है, जिसने कई बेटियों की जिंदगी बर्बाद कर दी. किसी के जीवन को लील गई तो किसी की हंसी को छीन लिया, लेकिन कुछ ऐसी भी बेटियां है जो अपने हक की लड़ाई को लड़ना भी जानती हैं और समुद्र जैसी जिंन्दगी में तैरना भी जानती है. हम ऐसी ही एक बेटी से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो बाल विवाह जैसे कुप्रथा की शिकार हुई है.
इस बेटी को राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया है. पूर्व माध्यमिक विद्यालय महाराजगंज औराई की बालिका सुमन पाण्डेय ने अपने जनपद भदोही का गौरव बढ़ाया. बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय सेमिनार एवं सी.एस.आर. कॉन्क्लेव का भव्य आयोजन 4 और 5 मार्च को डॉक्टर राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में किया गया था. यह सेमिनार बेसिक शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था. मीना प्रेरक के रूप में बाल विवाह जैसे विषय पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा स्मृति चिह्न देकर सुमन को सम्मानित किया गया.
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मीना मंच की जनपद मास्टर ट्रेनर एवं सुगमकर्ता डॉक्टर माया त्रिपाठी ने बताया महाराजगंज निवासी माता तुलसी देवी और पिता ओम प्रकाश पाण्डेय की पुत्री सुमन पाण्डेय "बाल विवाह" जैसी बुराई कुप्रथा से बचने के लिए जागरुक कर रही हैं. भविष्य में कोई भी बच्चियां इस बुराई से पीड़ित न हो, उनका शारीरिक और मानसिक शोषण न हो, इसके लिए वह बाल विवाह के क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रही है.
सुमन पुनः शिक्षा की धारा से जुड़ गयी हैं और लोगों से मिलकर "बाल विवाह" का पुरजोर विरोध करती हुई पुनीत कार्य कर रही हैं. सुमन के इस कदम ने कहीं न कहीं उन बेटियों को भी जागरूक करेगी जो इस तरह के कुप्रथा शिकार खुद में टूट जाती है और गलत रास्ते को अख्तियार कर लेती है. समाज मे सुमन जैसी बेटियां ही लोगों के मन को जीतने के साथ परिवर्तन लाने में सक्षम हैं.