लखनऊः उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने राज्य में भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार की कुपोषण संकट से बच्चों को बचाने की नीति पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सवार्धिक कुपोषण 46 के अनुपात से उत्तर प्रदेश के बच्चों का ग्रसित होना यह साबित करता है कि सरकार का पोषण मिशन पूरी तरह कागजों पर है. जमीनी सच्चाई से उसका कोई लेना देना नही है.
उन्होंने कहा कि छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की दर 46 फीसदी दर से यह समझा जा सकता है कि सरकार का पोषण मिशन पूरी तरह भ्रष्टाचार का शिकार हो चुका है. प्रतिदिन लगभग 700 बच्चे असमय सरकारी लापरवाही के चलते मौत के मुंह में जा रहे हैं. सरकार अपना गाल बजाने में मस्त है.
पहले पायदान पर है उत्तर प्रदेश
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि ताजा आंकड़े बताते हैं कि शिशु मृत्यु दर में उत्तर प्रदेश देश मे पहले पायदान पर खड़ा होकर विकास की गाथा की झूठी कहानी बता रहा है. जबकि जमीनी सच यह है कि कुपोषण के चलते हर 10 में 4 बच्चे गम्भीर रूप से अतिकुपोषित हैं. इनसे उनके शारीरिक विकास में भी बाधा आती है, जबकि इस समस्या से निपटने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार कुपोषण से लड़ने के लिये जच्चा व बच्चे के लिये महिला बाल विकास व पुष्टाहार विभाग को भारी भरकम रकम बजट समग्र विकास योजना में आवंटित है. इसके बाद भी यह समस्या बढ़ती जा रही है.
उन्होंने कहा कि आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है? कुपोषण जैसी गम्भीर समस्या को हल्के में लेकर आवंटित बजट का दुरुपयोग किया जाना समस्या को अतिगंभीर बनाने में राज्य सरकार की भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाली अनीति की महत्वपूर्ण भूमिका से कौन इनकार कर सकता है.
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यूपी की स्थिति चिंताजनक
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि डिजेबीलिटी एडजस्टमेंट लाइफ ईयर्स की रिपोर्ट के अनुसार सवार्धिक कुपोषण उत्तर प्रदेश के बच्चों में पाया जाना चिंताजनक है. यही नहीं नेशनल न्यूट्रिशन मिशन की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के उस दावे को खारिज करती है जिसमें उन्होंने कहा है कि 2022 तक कुपोषण पर विजय प्राप्त कर लेंगे. जिस तरह राज्य सरकार के स्तर पर लापरवाही बरती गई है उससे यह सम्भव नहीं है.
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि जच्चा को पोषण युक्त आहार न मिलने का कारण गर्भ में ही बच्चे कुपोषित होने को विवश हैं. वहीं दूसरी तरफ बच्चे जन्म के बाद पुष्टाहार की सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं, जिसके चलते प्रतिदिन औसतन 700 बच्चों की मौतें हो रही हैं. इन मौतो के लिये सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही 17.09 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं तो अन्य जनपदों व दूरस्थ ग्रामीण इलाकों की तस्वीर कितनी भयावह होगी?
सरकार को नियमों की भी परवाह नहीं
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उत्तरप्रदेश में 3,98,359 बच्चे अतिगम्भीर कुपोषण का शिकार हैं. यह आंकड़े सरकार की पोल खोलने के लिये पर्याप्त हैं. बच्चों के मामले में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को पार करने वाली यह सरकार केवल झूठे सपने दिखाती है. उसे संविधान की मर्यादा व विधायी नियमों की भी चिंता नही रहती.