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भीलवाड़ा: लाखों पेड़ों और वन्यजीवों को बचाने के लिए मोदी को लिखेंगे 1 लाख पत्र - land allotment

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बक्सवाहा में हीरे मिलने की संभावना के चलते 382 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया है. इसका विरोध हो रहा है. पीपुल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी और इन्टेक चेप्टर कन्वीनर बाबूलाल जाजू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 1 लाख पोस्टकार्ड लिखकर भेजे जाएंगे.

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पीपुल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू
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Published : Jun 23, 2021, 12:05 AM IST

भीलवाड़ा: पीपुल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी और इन्टेक चेप्टर कन्वीनर बाबूलाल जाजू ने बकस्वाहा में हीरे की तलाश के लिए किए गए भूमि आवंटन का विरोध किया है. जाजू ने कहा है कि भूमि आवंटन रद्द कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को 1 लाख पत्र लिखे जाएंगे. लाखों पेड़ों और वन्यजीवों को बचाने का प्रयास किया जाएगा.

जाजू के मुताबिक भीलवाड़ा से 5 हजार और प्रदेशभर से 1 लाख पोस्टकार्ड पीएम मोदी को भेजे जाएंगे. फिर भी मध्य प्रदेश सरकार भूमि आवंटन रद्द नहीं करती है तो वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे ताकि प्रकृति के विनाश को रोका जा सके.

पीपुल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू

वन संरक्षण की जरूरत

हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान देश में ऑक्सीजन की भारी मात्रा में कमी से लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों को बचाने की जरूरत है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी मन की बात में पर्यावरण संरक्षण की मंशा जाहिर की थी.

पढ़ें- बायतु में ऑक्सीजन प्लांट लगने पर मंत्री कैलाश चौधरी और हरीश चौधरी के बीच 'क्रेडिट वॉर', दोनों इसे बता रहे अपनी उपलब्धि

जाजू के अनुसार उन्होंने पत्र लिखकर बताया है कि जंगल में लाखों वन्य जीव और 2,15,875 महत्वपूर्ण प्रजातियों के वृक्ष हैं. जिसमें 40 हजार सागौन के पेड़ हैं. इसके अलावा पीपल, बरगद, तेंदू, जामुन, बहेड़ा और अर्जुन जैसे कई औषधीय पेड़ हैं.

वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश

सरकार हीरे से धन कमाने की लालसा के चलते लाखों बहुमूल्य पेड़ों को काटने और वन्यजीवों को मौत के घाट उतारकर प्रकृति के विनाश पर आमादा हो रही है. इस वजह से देशभर के वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश है.

पढ़ें- राजस्थान पुलिस विभाग में 32 पुलिस निरीक्षकों के हुए तबादले

पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ेगा विपरीत असर

सरकार पेड़ों और वन्यजीवों की कीमत पर हीरे की तलाश कर रही है. ताजा सर्वे में मध्यप्रदेश में 100 वर्ग किमी जंगल में कमी हुई है. इसके बावजूद वृक्षों की कटाई होने से जंगल खत्म होंगे. लाखों वन्यजीव और करोड़ों छोटे-छोटे कीट-पतंगें काल के मुंह में समा जाएंगे, जिससे पारिस्थितिक तंत्र पर विपरीत असर पड़ेगा.

पन्ना टाइगर रिजर्व पर भी पड़ेगा असर

आवंटित की जाने वाली भूमि पन्ना टाइगर रिजर्व के करीब है. ऐसे में अगर लाखों की संख्या में पेड़ कटते हैं तो पन्ना टाइगर रिजर्व को बहुत बड़ा खतरा है. जाजू ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि बकस्वाहा में तेंदुएं, भालू, बारहसिंघा, हिरण, बाज सहित अन्य वन्यजीवों के होने के बावजूद आवंटन के चक्कर में सरकार ने इन्हेें ताजातरीन रिपोर्टोंं से नदारद कर दिया है.

भीलवाड़ा: पीपुल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी और इन्टेक चेप्टर कन्वीनर बाबूलाल जाजू ने बकस्वाहा में हीरे की तलाश के लिए किए गए भूमि आवंटन का विरोध किया है. जाजू ने कहा है कि भूमि आवंटन रद्द कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को 1 लाख पत्र लिखे जाएंगे. लाखों पेड़ों और वन्यजीवों को बचाने का प्रयास किया जाएगा.

जाजू के मुताबिक भीलवाड़ा से 5 हजार और प्रदेशभर से 1 लाख पोस्टकार्ड पीएम मोदी को भेजे जाएंगे. फिर भी मध्य प्रदेश सरकार भूमि आवंटन रद्द नहीं करती है तो वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे ताकि प्रकृति के विनाश को रोका जा सके.

पीपुल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू

वन संरक्षण की जरूरत

हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान देश में ऑक्सीजन की भारी मात्रा में कमी से लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों को बचाने की जरूरत है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी मन की बात में पर्यावरण संरक्षण की मंशा जाहिर की थी.

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जाजू के अनुसार उन्होंने पत्र लिखकर बताया है कि जंगल में लाखों वन्य जीव और 2,15,875 महत्वपूर्ण प्रजातियों के वृक्ष हैं. जिसमें 40 हजार सागौन के पेड़ हैं. इसके अलावा पीपल, बरगद, तेंदू, जामुन, बहेड़ा और अर्जुन जैसे कई औषधीय पेड़ हैं.

वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश

सरकार हीरे से धन कमाने की लालसा के चलते लाखों बहुमूल्य पेड़ों को काटने और वन्यजीवों को मौत के घाट उतारकर प्रकृति के विनाश पर आमादा हो रही है. इस वजह से देशभर के वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश है.

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पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ेगा विपरीत असर

सरकार पेड़ों और वन्यजीवों की कीमत पर हीरे की तलाश कर रही है. ताजा सर्वे में मध्यप्रदेश में 100 वर्ग किमी जंगल में कमी हुई है. इसके बावजूद वृक्षों की कटाई होने से जंगल खत्म होंगे. लाखों वन्यजीव और करोड़ों छोटे-छोटे कीट-पतंगें काल के मुंह में समा जाएंगे, जिससे पारिस्थितिक तंत्र पर विपरीत असर पड़ेगा.

पन्ना टाइगर रिजर्व पर भी पड़ेगा असर

आवंटित की जाने वाली भूमि पन्ना टाइगर रिजर्व के करीब है. ऐसे में अगर लाखों की संख्या में पेड़ कटते हैं तो पन्ना टाइगर रिजर्व को बहुत बड़ा खतरा है. जाजू ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि बकस्वाहा में तेंदुएं, भालू, बारहसिंघा, हिरण, बाज सहित अन्य वन्यजीवों के होने के बावजूद आवंटन के चक्कर में सरकार ने इन्हेें ताजातरीन रिपोर्टोंं से नदारद कर दिया है.

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