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महाशिवरात्रि विशेष: कोटा का गेपरनाथ महादेव मंदिर जहां प्रकृति खुद करती है भोलेनाथ का जलाभिषेक - कोटा का गेपरनाथ मंदिर

शिव को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. लेकिन राजस्थान में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां प्रकृति खुद भगवान शिव का जलाभिषेक करती है. यह मंदिर कोटा में स्थित है. जो करीब 16वीं शताब्दी में बनवाया गया था. कोटा से 15 किमी दूर यह मंदिर स्थित है. गेपरनाथ महादेव के नाम से प्रचलित यह मंदिर 400 फीट की गहराई में पहाड़ों में स्थित है.

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कोटा का गेपरनाथ मंदिर
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Published : Feb 20, 2020, 5:45 PM IST

कोटा. जिले से महज 15 किमी दूर रावतभाटा रोड स्थित चंबल नदी की कराइयों में महादेव शिव का एक ऐसा मंदिर है, जहां स्वयं जलधारा भगवान का अभिषेक करती है. मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंचने के लिए करीब 350 सीढ़ियां उतरकर नीचे जाना होता है. यह मंदिर है भगवान गेपरनाथ का.

कोटा का गेपरनाथ मंदिर

राजा भोज की पत्नी ने करवाया था निर्माण

गेपरनाथ महादेव मंदिर के पुजारी ने बताया, कि यह मंदिर 500 साल पुराना है. जिसे राजा भोज की पत्नी ने 16वीं शताब्दी में बनवाया था. साल 1961 से इस मंदिर को पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन कर लिया और संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया.

चंबल नदी की कराइयों में विराजमान हैं भगवान शिव

चंबल नदी के किनारे स्थित कराइयो में मंदिर स्थापित है. यहां का दृश्य देखते ही बनता है. दूरदराज से लोग यहां पर महादेव के दर्शन करने के लिए आते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने बताय कि यहां का विकास और विस्तार करना चाहिए, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके. लोग दूर-दराज के इलाकों में हिल स्टेशनों पर भ्रमण करने के लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें दूर जाने की जगह इस सुंदर जगह पर ही आना चाहिए.

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भगवान भोलेनाथ का प्रकृति स्वंय करती है अभिषेक

प्रकृतिक जलधारा करती है शिव का अभिषेक

चम्बल नदी की कराइयों में विराजमान शिव के दर्शन करने के लिए करीब 350 सीढ़िया उतरकर नीचे गर्भगृह में जाना होता है. मंदिर में शिव के ऊपर एक 1 प्राकृतिक जलधारा गिरती है, जो सालों दर साल से ऐसे ही गिरती रहती है. मंदिर के नीचे दो कुंड बने हुए हैं, जिनमें पानी भरा रहता है. इस कुंड में जानवर और पंछी अपनी प्यास बुझाने आते हैं.

2008 में एक हादसे के बाद यह स्थान देशभर में चर्चा का विषय बन गया. मंदिर के रास्ते की सीढ़ियां ढहने से कराई में 35 महिलाएं और 20 बच्चे फंस गए थे. इन्हें मुश्किल से बाहर निकाला गया था. घटना में 1 की मौत हो गई थी.

हर शिवरात्रि पर लगता है मेला

गेपेरनाथ मंदिर में हर साल शिवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में दूर-दूर से शिव भक्त भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं. प्रकृति के बीच स्थित इस मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है.

कोटा. जिले से महज 15 किमी दूर रावतभाटा रोड स्थित चंबल नदी की कराइयों में महादेव शिव का एक ऐसा मंदिर है, जहां स्वयं जलधारा भगवान का अभिषेक करती है. मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंचने के लिए करीब 350 सीढ़ियां उतरकर नीचे जाना होता है. यह मंदिर है भगवान गेपरनाथ का.

कोटा का गेपरनाथ मंदिर

राजा भोज की पत्नी ने करवाया था निर्माण

गेपरनाथ महादेव मंदिर के पुजारी ने बताया, कि यह मंदिर 500 साल पुराना है. जिसे राजा भोज की पत्नी ने 16वीं शताब्दी में बनवाया था. साल 1961 से इस मंदिर को पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन कर लिया और संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया.

चंबल नदी की कराइयों में विराजमान हैं भगवान शिव

चंबल नदी के किनारे स्थित कराइयो में मंदिर स्थापित है. यहां का दृश्य देखते ही बनता है. दूरदराज से लोग यहां पर महादेव के दर्शन करने के लिए आते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने बताय कि यहां का विकास और विस्तार करना चाहिए, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके. लोग दूर-दराज के इलाकों में हिल स्टेशनों पर भ्रमण करने के लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें दूर जाने की जगह इस सुंदर जगह पर ही आना चाहिए.

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भगवान भोलेनाथ का प्रकृति स्वंय करती है अभिषेक

प्रकृतिक जलधारा करती है शिव का अभिषेक

चम्बल नदी की कराइयों में विराजमान शिव के दर्शन करने के लिए करीब 350 सीढ़िया उतरकर नीचे गर्भगृह में जाना होता है. मंदिर में शिव के ऊपर एक 1 प्राकृतिक जलधारा गिरती है, जो सालों दर साल से ऐसे ही गिरती रहती है. मंदिर के नीचे दो कुंड बने हुए हैं, जिनमें पानी भरा रहता है. इस कुंड में जानवर और पंछी अपनी प्यास बुझाने आते हैं.

2008 में एक हादसे के बाद यह स्थान देशभर में चर्चा का विषय बन गया. मंदिर के रास्ते की सीढ़ियां ढहने से कराई में 35 महिलाएं और 20 बच्चे फंस गए थे. इन्हें मुश्किल से बाहर निकाला गया था. घटना में 1 की मौत हो गई थी.

हर शिवरात्रि पर लगता है मेला

गेपेरनाथ मंदिर में हर साल शिवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में दूर-दूर से शिव भक्त भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं. प्रकृति के बीच स्थित इस मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है.

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