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जयपुर : हजारों साल पुराना महादेव मंदिर, जहां पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना

सावन माह आते ही सभी शिवालयों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है. सावन के सोमवार को भोलेनाथ के भक्त अपनी-अपनी मनोकामनाएं लिए शिवालयों में जलाभिषेक करने पहुचते हैं. सुबह से ही भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं. वहीं कावड़िए भी जल लेकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए सुबह से ही लाइनों में लग जाते हैं.

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Published : Aug 5, 2019, 8:37 PM IST

जयपुर. राजधानी से 35 किलोमीटर दूर जमवारामगढ़ तहसील के टोडा गांव में टोडेश्वर महादेव मंदिर हजारों साल पुराना है. इस मंदिर का इतिहास काफी रोचक रहा है. मंदिर की खासियत है कि यहां पर पूरे 12 महीने अखंड ज्योति जलती है.

जयपुर में हजारों साल पुराना महादेव मंदिर

टोडेश्वर महादेव मंदिर में सावन के महीने में मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है. यहां पर दूर-दूर से भक्त भगवान भोलेनाथ के धोक लगाने के लिए पहुंचते हैं. भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के लिए अखंड ज्योति भी जलाते हैं. जो पूरे साल भर अखंड रहती है. इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन से आने से भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है. खासतौर पर सावन के महीने में कावड़ियों की धूम रहती है. दूर-दूर से कावड़िए जल लेने के लिए इस मंदिर में आते हैं. इसके साथ ही लोग अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर सवामणी और सहस्त्रघट भी करते हैं. सावन के महीने में खासतौर पर भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक, दुग्ध अभिषेक और बिल्वपत्र चढ़ाए जाते हैं.

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मंदिर परिसर में 6 कुंड बने हुए हैं. जहां पर कभी भी पानी की कमी नहीं रहती. गंगा कुंड का जल भगवान शिव का जलाभिषेक करने में उपयोग किया जाता है. ब्रह्मा कुंड में संत स्नान करते हैं. जनाना कुंड में महिलाएं स्नान करती हैं. सूर्य कुंड में पुरुष स्नान करते हैं. बाकी दो कुंड सामान्य है जहां पर कोई भी स्नान कर सकता है. शिव भक्त कानाराम मीणा ने बताया कि टोडेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यहां पर पूरे साल घी के अखंड दीप जलते हैं. सावन मास में भक्तों की ज्यादा भीड़ रहती है.

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उन्होंने बताया कि इतिहास के मुताबिक इस मंदिर में पांडवों ने भी तपस्या की थी. इसके साथ ही कई ऋषि-मुनियों ने भी यहां पर तपस्या की है. मंदिर पुजारी कानाराम योगी ने बताया कि टोडेश्वर महादेव मंदिर में तीन खास बातें है. यहां पर तीन चीजें अखंड रहती है अखंड ज्योति, अखंड धूणा और अखंड जल. यह तीनों चीजें हमेशा अखंड रहती हैं. ग्रामीण की मांग हैं कि इस मंदिर में विकास किया जाए. ताकि भक्तों को बेहतर सुविधाएं मिल सके.

जयपुर. राजधानी से 35 किलोमीटर दूर जमवारामगढ़ तहसील के टोडा गांव में टोडेश्वर महादेव मंदिर हजारों साल पुराना है. इस मंदिर का इतिहास काफी रोचक रहा है. मंदिर की खासियत है कि यहां पर पूरे 12 महीने अखंड ज्योति जलती है.

जयपुर में हजारों साल पुराना महादेव मंदिर

टोडेश्वर महादेव मंदिर में सावन के महीने में मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है. यहां पर दूर-दूर से भक्त भगवान भोलेनाथ के धोक लगाने के लिए पहुंचते हैं. भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के लिए अखंड ज्योति भी जलाते हैं. जो पूरे साल भर अखंड रहती है. इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन से आने से भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है. खासतौर पर सावन के महीने में कावड़ियों की धूम रहती है. दूर-दूर से कावड़िए जल लेने के लिए इस मंदिर में आते हैं. इसके साथ ही लोग अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर सवामणी और सहस्त्रघट भी करते हैं. सावन के महीने में खासतौर पर भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक, दुग्ध अभिषेक और बिल्वपत्र चढ़ाए जाते हैं.

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मंदिर परिसर में 6 कुंड बने हुए हैं. जहां पर कभी भी पानी की कमी नहीं रहती. गंगा कुंड का जल भगवान शिव का जलाभिषेक करने में उपयोग किया जाता है. ब्रह्मा कुंड में संत स्नान करते हैं. जनाना कुंड में महिलाएं स्नान करती हैं. सूर्य कुंड में पुरुष स्नान करते हैं. बाकी दो कुंड सामान्य है जहां पर कोई भी स्नान कर सकता है. शिव भक्त कानाराम मीणा ने बताया कि टोडेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यहां पर पूरे साल घी के अखंड दीप जलते हैं. सावन मास में भक्तों की ज्यादा भीड़ रहती है.

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उन्होंने बताया कि इतिहास के मुताबिक इस मंदिर में पांडवों ने भी तपस्या की थी. इसके साथ ही कई ऋषि-मुनियों ने भी यहां पर तपस्या की है. मंदिर पुजारी कानाराम योगी ने बताया कि टोडेश्वर महादेव मंदिर में तीन खास बातें है. यहां पर तीन चीजें अखंड रहती है अखंड ज्योति, अखंड धूणा और अखंड जल. यह तीनों चीजें हमेशा अखंड रहती हैं. ग्रामीण की मांग हैं कि इस मंदिर में विकास किया जाए. ताकि भक्तों को बेहतर सुविधाएं मिल सके.

Intro:जयपुर
एंकर- सावन के महीने में सभी शिवालयों में भक्तों का हुजूम लगा रहता है। सावन के सोमवार को भोलेनाथ के भक्त अपनी मनोकामनाएं लिए शिवालयों में जलाभिषेक करने पहुचते हैं। अल सुबह से ही भक्तों की लंबी लंबी लाइनें लग जाती है। वहीं कावड़िए भी जल लेकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए सुबह से ही लाइनों में लग जाते हैं। राजधानी जयपुर के नजदीक एक ऐसा मंदिर जहां पर पूरे 12 महीने ही अखंड ज्योति जलती है और रोजाना भक्तों का तांता लगा रहता है।


Body:राजधानी जयपुर से 35 किलोमीटर दूर जमवारामगढ़ तहसील के टोडा गांव में टोडेश्वर महादेव मंदिर हजारो वर्ष पुराना है। इस मंदिर का इतिहास काफी रोचक रहा है। मंदिर की खासियत है कि यहां पर पूरे 12 महीने अखंड ज्योति जलती है। टोडेश्वर महादेव मंदिर में सावन के महीने में मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है। यहां पर दूर-दूर से भक्त भगवान भोलेनाथ के धोक लगाने के लिए पहुंचते हैं। भक्त अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने के लिए अखंड ज्योति भी जलाते हैं। जो पूरे साल भर अखंड रहती है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन से आने से भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। खासतौर पर सावन के महीने में कावड़ियों की धूम रहती है। दूर-दूर से कावड़िया जल लेने के लिए इस मंदिर में आते हैं। इसके साथ ही लोग अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर सवामणी और सहस्त्रघट भी करते हैं। सावन के महीने में खासतौर पर भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक, दुग्ध अभिषेक और बिल्वपत्र चढ़ाए जाते हैं।
मंदिर परिसर में 6 कुंड बने हुए हैं। जहां पर कभी भी पानी की कमी नहीं रहती। गंगा कुंड का जल भगवान शिव का जलाभिषेक करने में उपयोग किया जाता है। ब्रह्मा कुंड में संत स्नान करते हैं। जनाना कुंड में महिलाएं स्नान करती हैं। सूर्य कुंड में पुरुष से स्नान करते हैं। बाकी दो कुंड सामान्य है जहां पर कोई भी स्नान कर सकता है।
शिव भक्त कानाराम मीणा ने बताया कि टोडेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यहां पर पूरे साल घी के अखंड द्वीप जलते हैं। सावन मास में भक्तों की ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि इतिहास के मुताबिक इस मंदिर में पांडवों ने भी तपस्या की थी। इसके साथ ही कई ऋषि-मुनियों ने भी यहां पर तपस्या की है।
मंदिर पुजारी कानाराम योगी ने बताया कि टोडेश्वर महादेव मंदिर में तीन खास बातें है। यहां पर तीन चीजें अखंड रहती है अखंड ज्योति, अखंड धूणा और अखंड जल। यह तीनों चीजें हमेशा अखंड रहती है।
ग्रामीण की मांग हैं कि इस मंदिर में विकास किया जाए ताकि भक्तों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

बाईट- कानाराम योगी, मंदिर पुजारी
बाईट- कानाराम मीणा, भक्त
बाईट- छितर मल, स्थानीय निवासी
बाईट- भेरूराम, ग्रामीण
बाईट- गगन कुमार, कावड़ यात्री
बाईट- लकी, कावड़ यात्री
बाईट- गिर्राज प्रसाद, भक्त











Conclusion:
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