जयपुर. गुर्जर आरक्षण आंदोलन के प्रणेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का पार्थिव देह आज पंचतत्व में विलीन होगा. दोपहर करीब साढ़े 3 बजे बैंसला का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव मुंडिया में (Kirori Singh Bainsla Cremation in Mundiya) किया जाएगा. इससे पहले आज जयपुर से उनका पार्थिव देह मुंडिया के लिए रवाना हुआ. नम आंखों से वहां मौजूद लोगों ने बाबा तेरी नेक कमाई, तूने सोती कौम जगाई नारे के साथ उन्हें बिदा किया. पार्थिव देह करीब 8 स्थानों पर अंतिम दर्शनों और श्रद्धांजलि के लिए रखा जाएगा.
जयपुर से मुंडिया के बीच कानोता,दौसा,भांडारेज, खेड़ली, दुब्बी कलाई, सिकंदरा, मानपुरा मोड़, बालाजी, पाटोली, पीपलखेड़ा, महुआ,गाजीपुर, खेडला,सलेमपुर थाना, देवलेन मोड, नयागांव, पाटकटरा,सैलपुरा होते हैं उनके पैतृक निवास मुंडिया पहुंचेगी. यहां अंतिम संस्कार की धार्मिक रीति रिवाज करने के बाद करीब 3:30 बजे पार्थिव देह का अंतिम संस्कार किया जाएगा. बैंसला के प्रति लोगों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए उनके पार्थिव देह को करीब 8 स्थानों पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा.
दौसा में अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब: कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का पार्थिव देह जयपुर से रवाना होकर सुबह दौसा कलेक्ट्रेट सर्किल पर पहुंचा. जहां कर्नल बैंसला के अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा. इस दौरान गुर्जर समाज के महिला और पुरुष हर कोई कर्नल बैंसला के अंतिम दर्शन के लिए लालायित नजर आया. दौसा के कलेक्ट्रेट सर्किल भांडारेज मोड़, दुब्बी, सिकंदरा, पाटोली -पीपलखेड़ा, महुआ, गाजीपुर सहित करीब एक दर्जन जगहों पर पार्थिव देह को दर्शनों के लिए रोका जा रहा है. जगह-जगह समाज के लोगों ने कर्नल बैंसला के पार्थिव देह पर पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि दी.
गुरुवार को ली अंतिम सांस: गुर्जर समाज के प्रतिनिधि और राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने 81 साल की उम्र में गुरुवार 31 मार्च को अंतिम सांस ली. दो बार कोरोना की चपेट में आने के बाद लंबे समय से बीमार चल रहे कर्नल की गुरुवार सुबह अचानक तबीयत खराब हुई थी. जिसके बाद उनके बेटे विजय बैंसला सीकर रोड स्थित मणिपाल अस्पताल लेकर पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
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गुर्जर आंदोलन से मिली खास पहचान: सेना में 20 साल गुजारने के बाद बैंसला गांव लौटे तो उन्होंने 2007 में पहली बार गुर्जर समाज को आरक्षण (Face of Gurjar agitation) दिलवाने के लिए एक बड़े मूवमेंट की शुरुआत की. आंदोलन पीक पर पहुंचा तो सड़क से लेकर रेल की पटरियों तक पर उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन (yadon mein Col Bainsla) जारी रखा. अपनी इसे जुझारू व्यक्तित्व के कारण वो गुर्जर समाज के आइकन बनकर उभरे.