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मुरैना में नवजात को सिर्फ 36 फीसदी महिलाएं कराती हैं स्तनपान - मुरैना न्यूज

प्रदेश का मुरैना जिला संस्थागत प्रसव में 93 फीदसी के साथ तो टॉप पर है, लेकिन जन्म के बाद तुंरत बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाएं सिर्फ 36 फीसदी ही हैं. यही वजह है कि कुपोषण वाले जिलों में मुरैना भी शामिल है.

36 फीसदी महिलाएं कराती हैं स्तनपान
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Published : Aug 2, 2019, 6:06 AM IST

मुरैना। विश्व स्तनपान सप्ताह एक से आठ अगस्त तक माना जाना है. इस बीच जिले से चौंकाने वाला आंकड़े सामने आया हैं. प्रदेश का मुरैना जिला संस्थागत प्रसव में 93 फीदसी के साथ तो टॉप पर है, लेकिन जन्म के बाद तुंरत बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाएं सिर्फ 36 फीसदी ही हैं, जबकि 6 माह तक मांग का दूध पिलाने वाली महिलाओं की संख्या 38 प्रतिशत है, जो एक चिंता का विषय है.

36 फीसदी महिलाएं कराती हैं स्तनपान

विश्व स्तनपान सप्ताह के माध्यम से जिले की इन आंकड़ों को सुधारने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जागरुकता कार्यक्रम कर रहा है. नवजात शिशुओं को कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने इस तरह के जागरुक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

स्तनपान के आंकड़ों में सुधार लाने के लिए बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग एक अमला तैयार किया है, जो लोगों के घर-घर जाकर महिलाओं को जागरुक करेगा. हालांकि इस तरह की योजनाएं हर साल बनती हैं, लेकिन आंकड़ों में न तो सुधार दिखता है और न ही यथार्थ की स्थिति बदलती है.

मुरैना। विश्व स्तनपान सप्ताह एक से आठ अगस्त तक माना जाना है. इस बीच जिले से चौंकाने वाला आंकड़े सामने आया हैं. प्रदेश का मुरैना जिला संस्थागत प्रसव में 93 फीदसी के साथ तो टॉप पर है, लेकिन जन्म के बाद तुंरत बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाएं सिर्फ 36 फीसदी ही हैं, जबकि 6 माह तक मांग का दूध पिलाने वाली महिलाओं की संख्या 38 प्रतिशत है, जो एक चिंता का विषय है.

36 फीसदी महिलाएं कराती हैं स्तनपान

विश्व स्तनपान सप्ताह के माध्यम से जिले की इन आंकड़ों को सुधारने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जागरुकता कार्यक्रम कर रहा है. नवजात शिशुओं को कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने इस तरह के जागरुक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

स्तनपान के आंकड़ों में सुधार लाने के लिए बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग एक अमला तैयार किया है, जो लोगों के घर-घर जाकर महिलाओं को जागरुक करेगा. हालांकि इस तरह की योजनाएं हर साल बनती हैं, लेकिन आंकड़ों में न तो सुधार दिखता है और न ही यथार्थ की स्थिति बदलती है.

Intro:विश्व स्तनपान सप्ताह आज से 8 अगस्त तक मनाया जाना है दिसंबर ना जिले के लिए चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं मध्यप्रदेश में मुरैना जिला संस्थागत प्रसव 93 फ़ीसदी होकर शीर्ष पर है वही जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराने वाली महिलाएं सिर्फ 36 फ़ीसदी हैं तो 6 माह तक मां का दूध पिलाने वाली महिलाओं की संख्या 38 फ़ीसदी है जो प्रदेश के साथ साथ मुरैना जिले के लिए भी चिंताजनक है ।


Body:विश्व स्तनपान सप्ताह के माध्यम से मुरैना जिले की इन आंकड़ों को सुधारने के लिए और नवजात शिशुओं को कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपने पूरे अमले को तैनात कर जन जागरूकता कार्यक्रम घर-घर जाकर चलाने की तैयारी की जा रही है हालांकि इस तरह की योजनाएं हर साल बनती है और उस पर काम भी होते हैं लेकिन ना आंकड़े सुधारते हैं और ना ही यथार्थ में स्थिति बदलती है ।


Conclusion:जिले में कुपोषण को समूल नष्ट करना है तो नवजात शिशु को मां का पहला दूध पिलाने से लेकर 6 माह तक निरंतर मां का दूध ही पिलाना अत्यावश्यक है क्योंकि किसी भी शिशु और बच्चे के लिए मां के दूध से ज्यादा संतुलित ना कोई भोजन है और ना ही उसके शरीर के तापमान के अनुरूप खाद्य और पेय पदार्थ अगर वास्तव में नवजात शिशुओं को कुपोषण से मुक्ति दिलाने से लेकर जीवन के प्रारंभिक काल में होने वाली अनेक बीमारियों से मुक्ति के लिए मां का दूध अत्यावश्यक है जिसमें स्तनपान सप्ताह के तहत तैयार की जाने वाली कार्य योजना जमीनी हकीकत में बदलती है तो बड़े बदलाव होना कोई खास नही है ।
बाईट - तरुण भटनागर - सीईओ जिला पंचायत मुरैना
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