मुरैना। विश्व स्तनपान सप्ताह एक से आठ अगस्त तक माना जाना है. इस बीच जिले से चौंकाने वाला आंकड़े सामने आया हैं. प्रदेश का मुरैना जिला संस्थागत प्रसव में 93 फीदसी के साथ तो टॉप पर है, लेकिन जन्म के बाद तुंरत बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाएं सिर्फ 36 फीसदी ही हैं, जबकि 6 माह तक मांग का दूध पिलाने वाली महिलाओं की संख्या 38 प्रतिशत है, जो एक चिंता का विषय है.
विश्व स्तनपान सप्ताह के माध्यम से जिले की इन आंकड़ों को सुधारने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जागरुकता कार्यक्रम कर रहा है. नवजात शिशुओं को कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने इस तरह के जागरुक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
स्तनपान के आंकड़ों में सुधार लाने के लिए बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग एक अमला तैयार किया है, जो लोगों के घर-घर जाकर महिलाओं को जागरुक करेगा. हालांकि इस तरह की योजनाएं हर साल बनती हैं, लेकिन आंकड़ों में न तो सुधार दिखता है और न ही यथार्थ की स्थिति बदलती है.