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15 जिलों में नहीं मिला एक भी संदिग्ध मीसाबंदी, महानगरों में बाकी है सत्यापन

मीसाबंदियों पेंशन मामले में जांच करवा रही प्रदेश सरकार की 15 जिलों में जांच पूरी हो गई है और अब तक की इस जांच में एक संदिंग्ध मीसांबदी सामने नहीं आया है, फिलहाल प्रदेश की राजधानी समेत महानगरों में इसकी जांच बकाया है.

बल्लभ भवन, भोपाल फाइल फोटो.
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Published : Mar 3, 2019, 11:43 PM IST

भोपाल। मीसाबंदियों की पेंशन पर रोक लगाने के बाद प्रदेश सरकार इस मामले की जांच करा रही है. मीसाबंदियों के सत्यापन का कार्य 15 जिलों में पूरा हो गया है. बताया जा रहा है कि 15 जिलों में कराई गई जांच में एक भी मीसाबंदी फर्जी नहीं पाया गया है. हालांकि, अभी प्रदेश के 4 बड़े शहरों में यह जांच होना बाकी है.

मीसाबंदियों की पेंशन पर रोक लगाने को लेकर प्रदेश की राजनीति जमकर गरमाई थी. हालांकि, इसके बाद विभाग ने एक आदेश जारी कर मीसाबंदियों की जांच कराने के आदेश दिये थे ताकि पता लगाया जा सके कि प्रदेश में फर्जी तरीके से मीसाबंदी के तौर पर सम्मान निधि का लाभ तो नहीं लिया जा रहा.

बताया जा रहा है कि अभी तक प्रदेश के 15 जिलों में करीब एक हजार मीसाबंदियों का सत्यापन करा लिया गया है. लेकिन, इनमें से कोई भी मीसाबंदी संदिग्ध नहीं पाया गया है. जिन जिलों में मीसाबंदियों के सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है, उनमें खरगोन, झाबुआ, अलीराजपुर, बुरहानपुर, उज्जैन, रतलाम, गुना, सीधी, अनूपपुर, उमरिया, राजगढ़, होशंगाबाद, कटनी, मंडला और डिंडौरी शामिल हैं.

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वल्लभ भवन भोपाल.

हालांकि अभी तक प्रदेश के चार बड़े शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में मीसाबंदियों के सत्यापन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है. गौरतलब है कि प्रदेश में 2 हजार 715 मीसाबंदी पंजीबद्ध हैं. कांग्रेस ने सत्ता पर काबिज होते ही इस मामले की जांच करना और फर्जी मीसाबंदियों के खिलाफ कार्रवाई करना शुरू किया था.

भोपाल। मीसाबंदियों की पेंशन पर रोक लगाने के बाद प्रदेश सरकार इस मामले की जांच करा रही है. मीसाबंदियों के सत्यापन का कार्य 15 जिलों में पूरा हो गया है. बताया जा रहा है कि 15 जिलों में कराई गई जांच में एक भी मीसाबंदी फर्जी नहीं पाया गया है. हालांकि, अभी प्रदेश के 4 बड़े शहरों में यह जांच होना बाकी है.

मीसाबंदियों की पेंशन पर रोक लगाने को लेकर प्रदेश की राजनीति जमकर गरमाई थी. हालांकि, इसके बाद विभाग ने एक आदेश जारी कर मीसाबंदियों की जांच कराने के आदेश दिये थे ताकि पता लगाया जा सके कि प्रदेश में फर्जी तरीके से मीसाबंदी के तौर पर सम्मान निधि का लाभ तो नहीं लिया जा रहा.

बताया जा रहा है कि अभी तक प्रदेश के 15 जिलों में करीब एक हजार मीसाबंदियों का सत्यापन करा लिया गया है. लेकिन, इनमें से कोई भी मीसाबंदी संदिग्ध नहीं पाया गया है. जिन जिलों में मीसाबंदियों के सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है, उनमें खरगोन, झाबुआ, अलीराजपुर, बुरहानपुर, उज्जैन, रतलाम, गुना, सीधी, अनूपपुर, उमरिया, राजगढ़, होशंगाबाद, कटनी, मंडला और डिंडौरी शामिल हैं.

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वल्लभ भवन भोपाल.

हालांकि अभी तक प्रदेश के चार बड़े शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में मीसाबंदियों के सत्यापन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है. गौरतलब है कि प्रदेश में 2 हजार 715 मीसाबंदी पंजीबद्ध हैं. कांग्रेस ने सत्ता पर काबिज होते ही इस मामले की जांच करना और फर्जी मीसाबंदियों के खिलाफ कार्रवाई करना शुरू किया था.

Intro:प्रदेश की सत्ता में आने के बाद मीसाबंदी की पेंशन पर रोक लगाने के बाद सरकार द्वारा कराई जा रही जांच का कार्य 15 जिलों में पूरा हो गया है बताया जा रहा है कि 15 जिलों मैं कराई गई जांच में एक भी मीसाबंदी फर्जी नहीं पाया गया है हालांकि अभी प्रदेश के 4 बड़े शहरों में मीसा बंदियों की जांच की जाना बाकी है।


Body:मीसा बंदियों की पेंशन पर रोक लगाने को लेकर जमकर प्रदेश की राजनीति गरमाई थी हालांकि इसके बाद विभाग ने एक आदेश जारी कर मीसा बंदियों की जांच कराने के आदेश दिए थे ताकि पता लगाया जा सके की प्रदेश में कितने फर्जी तरीके से मीसा बंदी के तौर पर सम्मान निधि का लाभ ले रहे है। बताया जा रहा है कि अभी तक प्रदेश के 15 जिलों में करीब 1000 मीसा बंदियों का सत्यापन करा लिया गया है लेकिन इनमें से कोई भी मीसा बंदी संदिग्ध नहीं पाया गया है। जिन जिलों में मीसा बंदियों कि सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है उनमें खरगोन झाबुआ अलीराजपुर बुरहानपुर उज्जैन रतलाम गुना सीधी अनूपपुर उमरिया राजगढ़ होशंगाबाद कटनी मंडला डिंडोरी शामिल है हालांकि अभी तक प्रदेश के चारों बड़े शहरों भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में मीसा बंदियों की सत्यापन का कार्य शुरू नहीं हो पाया। गौरतलब है कि प्रदेश में 2715 मीसाबंदी पंजीबद्ध है।


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