रांचीः राजधानी रांची के पद्मश्री रामदयाल मुंडा स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय बांग्ला सांस्कृतिक मेला का रविवार को समापन हो गया. बांग्ला युवा मंच द्वारा आयोजित इस मेला के समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम शामिल हुए. इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मातृभाषा और स्थानीय भाषा का विकास किसी भी देश और राज्य के विकास में बेहद सहायक होता है.
अधिकारियों को झारखंड की स्थानीय भाषाओं का ज्ञान होना जरूरीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हाल ही में प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हमने पूछा कि राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले कितने अधिकारी नागपुरी, खोरठा, कुड़माली जैसी बोली और भाषाएं जानते और समझते हैं. आश्चर्य की बात है कि उच्च शिक्षा प्राप्त ये अधिकारी स्थानीय भाषा नहीं जानते. जब ये अधिकारी रांची शहर से 15-20 किलोमीटर बाहर की भाषा नहीं जानेंगे तो कैसे जनता की समस्याओं को समझ पाएंगे. बिजली आती है या नहीं, घर में नल का पानी पहुंचता है या नहीं ? सरकार की योजनाएं उनतक पहुंची है या नहीं यह कैसे अधिकारी जान और समझ पायेंगे ? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हम यह नहीं कहते कि स्थानीय झारखंडी भाषाओं में हमारे अधिकारी कोई डिग्री प्राप्त कर लें, लेकिन उन्हें इतना तो स्थानीय भाषा समझना ही होगा कि वह आम झारखंडी के दुख-दर्द, समस्याओं को समझ सकें.
बांग्ला भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांगः बांग्ला युवा मंच के संरक्षक और झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्या ने कहा कि झारखंड में ज्यादातर इलाकों में बांग्ला बोलते और समझते हैं. स्कूलों और कॉलेजों के बांग्ला भाषा की पढ़ाई की पूरी व्यवस्था नहीं है. उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बांग्ला भाषा और शिक्षा के विकास के लिए सरकार पहल करें.
मातृभाषा का सम्मान सबसे जरूरी, यह जाति और धर्म से भी ऊपरः इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि मातृभाषा का सम्मान सबसे ज्यादा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान भाषा के नाम पर ही एक अलग देश बन गया. यह भाषा के महत्व को दर्शाता है. मातृभाषा में पढ़ाई और इस्तेमाल से भाषा का विकास होता है. बांग्ला महोत्सव के दौरान आयोजकों और बांग्ला भाषियों की ओर से मुख्यमंत्री से मांग की गई कि राज्य में प्राथमिक स्तर से ही स्कूलों में बांग्ला भाषा की बेहतर पढ़ाई की व्यवस्था की जाए और बांग्ला शिक्षकों के खाली पदों को भरा जाए.