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हिमाचल प्रदेश के उद्योगों में बनी 14 दवाइयों के सैंपल फेल, CDSCO ने जारी किया अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में बनीं 14 दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं. केन्द्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने ड्रग अलर्ट जारी किया है. पढ़ें पूरी खबर... (medicine sample fail)

Samples of medicines made in Himachal failed
हिमाचल प्रदेश के उद्योगों में बनी 14 दवाइयों के सैंपल फेल
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Published : Jul 20, 2023, 8:13 PM IST

सोलन: देशभर में बनी कुल 48 दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं. जिसमें 14 दवाएं प्रदेश में बनी हैं. सीडीएससीओ ने देशभर से 1273 दवाओं के सैंपल जांच के लिए भरे थे, जिसमें से 1225 दवाओं के सैंपल स्टैंडर्ड जबकि 48 दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं. हिमाचल के बाद महाराष्ट्र की 8, उत्तराखंड की 7, गुजरात की 6, उत्तर प्रदेश की 3, हरियाणा, सिक्किम व हैदराबाद की 2-2, पंजाब, कर्नाटक व पश्चिम बंगाल की 1-1 दवा का सैंपल फेल हुआ है.

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में बनी 7, संसारपुर टैरस व ऊना की 2-2 और पांवटा साहिब, कालाअंब व परवाणू की एक-एक दवा के सैंपल फेल हुए हैं. जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं उसमें हार्ट, अस्थमा, एंटीबायोटिक, हाई ब्लड प्रैशर समेत अन्य बीमारियों की दवाएं शामिल हैं. बता दें कि हिमाचल प्रदेश में बनीं 14 दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं.

केन्द्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने ड्रग अलर्ट जारी किया है. प्रदेश में इस वर्ष जनवरी से लेकर जुलाई तक 107 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं. राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह का कहना है कि संबंधित उद्योगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों के सैंपल फेल हुए हैं उन उद्योगों का ड्रग इंस्पैक्टर निरीक्षण करेंगे ताकि गुणवत्ता को सुधारा जा सके. मारवाह ने कहा कि ज्यादा सैंपल लेने से खराब गुणवत्ता वाली दवाओं का पता लगता है इसलिए विभाग ज्यादा सैंपल भर रहा है. इन दवाओं को सुधारने के लिए विभाग ने 3 कैटेगरी में जांच को बांटा है, जिसके अनुसार काम किया जा रहा है.

सीडीएससीओ के मुताबिक सैलूस फार्मास्युटिकल बद्दी की एस्पिरिन क्लोपिडोग्रेल कैप्सूल का बैच नम्बर एसपीसी 221847, सीएमजी बॉयोटेक संसारपुर टैरस की नीकुमालोन टैबलेट का बैच नम्बर सीटी 22231818, एलवस हैल्थकेयर नालागढ़ की दवा इरिथ्रोमाइसिन टैबलेट 250 एमजी का बैच नम्बर एटी 22356, ग्नोसिसि फार्मा ऊना की दवा केराबूस्ट विटामिन का बैच नम्बर जीटी 200998, स्टैनफॉर्ड लैब.

ऊना की न्यू हैंज का बैच नम्बर डी 222427 व डी 222376, सीएमजी बॉयोटैक संसारपुर टैरस की मनोकास्ट 5 का बैच नम्बर सीटी 22230271ए, ओक्सालिस लैब बद्दी की फ्लेटरोल का बैच नम्बर एनएसबी 2206ए, सार बॉयोटैक बद्दी की मुपिरोसिन ऑइंटमेंट का बैच नम्बर 002, डीएम फार्मा बद्दी की दवा टेल्मिसर्टन का बैच का डीटी 0862बी, जी लैबोरट्रीज पावंटा साहिब की दवा एसीटाजोलैमाइड का बैच नम्बर 423-27.

विग्स बॉयोटैक एलएलपी बद्दी की दवा ऑनरेक्स कफ सिरप का बैच नम्बर ओएनसीएस 1713, फाइटोकेम हैल्थकेयर की दवा पैंटोप्राजोल का बैच नम्बर पीएचसी-21252 व हनुकैम लैबोरेट्रेजी परवाणू की दवा टेल्मीसार्टन टैबलेट 40एमजी का बैच नम्बर एचसीएल 2317 शामिल हैं.

ये भी पढे़ं- साहब! '1 महीने से घर में ही कैद हो चुके हैं, एक पड़ोसी पुलिस में है रसूख से डराता है, पंचायत प्रधान भी देता है धमकी'

सोलन: देशभर में बनी कुल 48 दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं. जिसमें 14 दवाएं प्रदेश में बनी हैं. सीडीएससीओ ने देशभर से 1273 दवाओं के सैंपल जांच के लिए भरे थे, जिसमें से 1225 दवाओं के सैंपल स्टैंडर्ड जबकि 48 दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं. हिमाचल के बाद महाराष्ट्र की 8, उत्तराखंड की 7, गुजरात की 6, उत्तर प्रदेश की 3, हरियाणा, सिक्किम व हैदराबाद की 2-2, पंजाब, कर्नाटक व पश्चिम बंगाल की 1-1 दवा का सैंपल फेल हुआ है.

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में बनी 7, संसारपुर टैरस व ऊना की 2-2 और पांवटा साहिब, कालाअंब व परवाणू की एक-एक दवा के सैंपल फेल हुए हैं. जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं उसमें हार्ट, अस्थमा, एंटीबायोटिक, हाई ब्लड प्रैशर समेत अन्य बीमारियों की दवाएं शामिल हैं. बता दें कि हिमाचल प्रदेश में बनीं 14 दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं.

केन्द्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने ड्रग अलर्ट जारी किया है. प्रदेश में इस वर्ष जनवरी से लेकर जुलाई तक 107 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं. राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह का कहना है कि संबंधित उद्योगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों के सैंपल फेल हुए हैं उन उद्योगों का ड्रग इंस्पैक्टर निरीक्षण करेंगे ताकि गुणवत्ता को सुधारा जा सके. मारवाह ने कहा कि ज्यादा सैंपल लेने से खराब गुणवत्ता वाली दवाओं का पता लगता है इसलिए विभाग ज्यादा सैंपल भर रहा है. इन दवाओं को सुधारने के लिए विभाग ने 3 कैटेगरी में जांच को बांटा है, जिसके अनुसार काम किया जा रहा है.

सीडीएससीओ के मुताबिक सैलूस फार्मास्युटिकल बद्दी की एस्पिरिन क्लोपिडोग्रेल कैप्सूल का बैच नम्बर एसपीसी 221847, सीएमजी बॉयोटेक संसारपुर टैरस की नीकुमालोन टैबलेट का बैच नम्बर सीटी 22231818, एलवस हैल्थकेयर नालागढ़ की दवा इरिथ्रोमाइसिन टैबलेट 250 एमजी का बैच नम्बर एटी 22356, ग्नोसिसि फार्मा ऊना की दवा केराबूस्ट विटामिन का बैच नम्बर जीटी 200998, स्टैनफॉर्ड लैब.

ऊना की न्यू हैंज का बैच नम्बर डी 222427 व डी 222376, सीएमजी बॉयोटैक संसारपुर टैरस की मनोकास्ट 5 का बैच नम्बर सीटी 22230271ए, ओक्सालिस लैब बद्दी की फ्लेटरोल का बैच नम्बर एनएसबी 2206ए, सार बॉयोटैक बद्दी की मुपिरोसिन ऑइंटमेंट का बैच नम्बर 002, डीएम फार्मा बद्दी की दवा टेल्मिसर्टन का बैच का डीटी 0862बी, जी लैबोरट्रीज पावंटा साहिब की दवा एसीटाजोलैमाइड का बैच नम्बर 423-27.

विग्स बॉयोटैक एलएलपी बद्दी की दवा ऑनरेक्स कफ सिरप का बैच नम्बर ओएनसीएस 1713, फाइटोकेम हैल्थकेयर की दवा पैंटोप्राजोल का बैच नम्बर पीएचसी-21252 व हनुकैम लैबोरेट्रेजी परवाणू की दवा टेल्मीसार्टन टैबलेट 40एमजी का बैच नम्बर एचसीएल 2317 शामिल हैं.

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