बिलासपुर: जिला मुख्यालय बिलासपुर में धौलरा की पहाड़ियों पर बाबा नाहर सिंह का खूबसूरत मंदिर है. प्रतापी राजा दीपचंद ने ही बाबा नाहर सिंह का मंदिर धौलरा में अपने महल के समीप बनवाया था. यहां हर रोज सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं.
कहा जाता है कि बाबा नहर सिंह कहलूर रियासत के प्रतापी राजा दीपचंद की रानी कुमकुम देवी के साथ कुल्लू से बिलासपुर आए थे. राजा दीपचंद ने 1653 से 1665 तक कहलूर रियासत का राजकाज संभाला था. राजा दीपचंद जब कुल्लू में कुमकुम राजकुमारी को विवाह कर लाने गए थे. विदाई के समय राजकुमारी की डोली एकाएक भारी हो गई और कहार डोली को नहीं उठा पाए. जोर आजमाइश के बाद भी डोली अपनी जगह हिली तक नहीं.
राजा ने अपने राजपुरोहित से इसका रहस्य पूछा. पुरोहित ने कहा कि देवता नाराज हैं और यह देवता रानी के साथ कहलूर जाना चाहते हैं. इस बात पर राजा ने हामी भर दी और डोली एका एक फूलों की तरह हल्की हो गई. कहते हैं कि उसके बाद बाबा नाहर सिंह वीर की चरण पादुका राजकुमारी कुमकुम देवी की डोली के साथ कहलूर यानि बिलासपुर आई थी.
कुल्लू रियासत के राजा के महल के साथ ऊपर की तरफ बाबा नार सिंह का प्राचीन मंदिर आज भी दर्शकों व श्रद्धालुओं का आकर्षण केंद्र बना हुआ है. कुल्लू में भी इसी देवता की पूजा लोग श्रद्धा और विश्वास से करते हैं. बाबा नाहर सिंह कुल्लू के राजपरिवार के भी कुल देवता हैं.
वहीं, कई श्रद्धालुओं को नंगे पांव माथा टेकने आते हैं. बाबा को आटे का मीठा रोट, सुपारी, गूगल धूप, लौंग इलाइची पसंद है. नई फसल आने पर लोग यहां बाबा के मंदिर में रोट चढ़ाते हैं. मन्नत मांगते हैं. शादी, पुत्र जन्म की बधाई जात्रा लेकर नाचते गाते पहुंचते हैं.
बाबा नाहर सिंह को वीर भजिया के रूप में भी भक्तजन मानते हैं. धार्मिक ग्रंथों में 52 वीरों का वर्णन मिलता है. उन 52 वीरों में से बाबा नाहर सिंह भी एक है. यहां मंदिर में हर साल जयेष्ठ महीने के हर मंगलवार को मेला लगता है.
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