बेंगलुरु: कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान प्रबंधन महासंघ ने चेतावनी दी है कि अगर हिजाब पहनने वाली मुस्लिम छात्राओं को एग्जाम सेंटर में प्रवेश करने रोका गया तो वह राज्य सरकार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगा.
महासंघ के अध्यक्ष एडवोकेट सी आर मुहम्मद इम्तियाज ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने परीक्षा केंद्रों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने वाले सरकार के सर्कूलर को पहले ही रद्द कर दिया है.
शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा थी शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने की प्रथा पर प्रतिबंध जारी रहेगा. इस पर इम्तियाज ने कहा, "चूंकि मामला अदालत में है, इसलिए राज्य सरकार इस पर कोई और निर्णय नहीं लेगी.. अदालत द्वारा जो अनुमति दी गई है, वह बनी रहेगी."
'अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर प्रतिबंध लागू नहीं होता'
इम्तियाज ने कहा कि खंडपीठ ने 22 फरवरी, 2022 के अपने आदेश में 5 फरवरी, 2022 के सरकारी परिपत्र को खारिज कर दिया, जिसमें परीक्षाओं के दौरान हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई थी. इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर प्रतिबंध लागू नहीं होता है.
उन्होंने आगे बताया कि हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि अल्पसंख्यक छात्रों को परेशान न किया जाए या उन्हें परीक्षा देने से न रोका जाए. इम्तियाज ने मधु बंगरप्पा से एक परिपत्र जारी करने का आग्रह किया, जिसमें परीक्षा अधिकारियों और केंद्र के अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे अल्पसंख्यक संस्थानों की छात्राओं को हिजाब पहनकर परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने दें.
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल लागू नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा, "अगर शिक्षा मंत्री सहित अधिकारी हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करने में विफल रहते हैं, तो हम अदालत की अवमानना याचिका दायर करेंगे."
उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि अदालत के फैसले के बावजूद, कुछ अधिकारी शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए एसएसएलसी और पीयूसी परीक्षाओं में हिजाब पहनने वाली छात्राओं को शामिल होने से रोकने के लिए परिपत्र जारी करना जारी रखेंगे.
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए इम्तियाज के संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी के साथ रिमाइंडर भेजे हैं.