आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति हमारी पुरातन चिकित्सा परंपरा है, जिससे भारत देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में लोग मानते हैं. आयुर्वेद के बारे में कहा जाता है कि इस चिकित्सा पद्धति में बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए उपचार दिया जाता है. धन्वंतरी जयंती के अवसर पर आयुर्वेद के जनक तथा आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के देवता कहे जाने वाले भगवान धन्वंतरी को सम्मान देने के उद्देश्य से हर साल धनतेरस के अवसर पर को 'राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस' मनाया जाता है. इस वर्ष 13 नवंबर को 'आयुर्वेदा फॉर कोविड-19 ' की थीम पर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है.
आयुष मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में जारी किए गए एक वक्तव्य में बताया गया है कि जन-जन को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में होने वाले उपचारों, नियमों तथा रोग को जड़ से खत्म करने की क्षमता के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाया जाता है. इस दिवस को मनाए जाने के पीछे एक और उद्देश्य यह है धन्वंतरी जयंती को सिर्फ धनतेरस के रूप में ना देखते हुए लोगों के हित में समर्पित आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सम्मान देने के लिए विशेष अवसर के रूप में मनाया जाए. कोविड-19 के मद्देनजर इस वर्ष आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर विशेष निर्देशिकाओं जारी की है.
आयुर्वेद
भारत की पारंपरिक चिकित्सा और दुनिया में स्वास्थ्य सेवा की सबसे पुरानी प्रणाली है आयुर्वेद. यह निवारक और उपचारात्मक दोनों प्रकार की विधियों से युक्त प्रणाली है. जिसका प्रयोग 5 हजार वर्षों से भी अधिक समय से किया जा रहा है. आयुर्वेद को संस्कृत में वेद नामक पवित्र ग्रंथों में दर्ज किया गया था. आयुर्वेद के बारे में वर्तमान ज्ञान मुख्य रूप से 'बृहत् त्रयी' नामक तीन महान ग्रंथों पर आधारित है, जिनमें 'चरक संहिता', 'सुश्रुत संहिता' और 'अष्टांग हृदय' शामिल हैं. इन पुस्तकों में उन मूल सिद्धांतों और नियमों का वर्णन किया गया है, जिनसे आधुनिक आयुर्वेद विकसित हुआ है.
आयुर्वेदिक उपचार के फायदे
- आयुर्वेदिक उपचार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह रोग को जड़ से खत्म करता है. आयुर्वेदिक उपचार के कुछ विशेष फायदे इस प्रकार हैं.
- आयुर्वेदिक पद्धति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी व्याख्या व्यक्ति को उसके शरीर की प्रकृति के बारे में पता चलता है, जिसके आधार पर अपने खान-पान और जीवनशैली को सुनिश्चित कर बीमारी मुक्त जीवन व्यतीत कर सकता है.
- आयुर्वेदिक चिकित्सा का मुख्य लाभ यह भी है कि इनमें कोई हानिकारक तत्व नहीं होते हैं और इनका उपयोग करना काफी सुरक्षित होता है.
आयुर्वेद के नियम
- व्यक्ति का स्वास्थ्य तथा उसके शरीर की प्रकृति, दिन और रात, मौसमी बदलाव, आहार, जीवन शैली तथा विभिन्न आंतरिक, बाहरी व पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होती रहती है. आयुर्वेद बीमारी से बचाव पर बहुत जोर देता है. इसलिए व्यक्ति को उसके शरीर की प्रकृति तथा मौसम के आधार पर खानपान को अपनाने की सलाह देता है.
- आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति तीन गुणों पर आधारित रहती है, इन्हें साधारणतः शारीरिक दोष कहा जाता है. इन दोषों को वात, पित्त और कफ के नाम से भी जाना जाता है.
- आयुर्वेदिक चिकित्सा के विद्वानों का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति में तीन दोषों का एक नपा-तुला संतुलन है. व्यक्तिगत दोष लगातार परिवर्तित होते रहते हैं. ये व्यक्ति के भोजन, व्यायाम और अन्य कारकों से प्रभावित होते हैं.
कोविड-19 के दौर में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धती
कोविड-19 के इस दौर में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को काफी बेहतरीन माना जा रहा है. आयुर्वेदिक काढे और आयुर्वेदिक दवाइयां ना सिर्फ हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं, बल्कि किसी भी प्रकार के संक्रमण तथा बीमारी को जड़ से खत्म करने का कार्य करती हैं. कोविड-19 के शुरुआती दौर से ही आयुष मंत्रालय की पहल पर आयुष काढों का वितरण तथा इस रोग से बचने के लिए जरूरी उपचारों तथा उपायों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया.
कोविड-19 में आयुर्वेद के अनुसार आदर्श जीवन शैली
हमारी रोजमर्रा की जीवन शैली में कुछ साधारण से नियम हमें सिर्फ कोरोनावायरस ही नहीं बल्कि कई तरह की बीमारियों से बचा सकते हैं तथा हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं.
सुबह की दिनचर्या
- आयुर्वेद में सूर्य उगने के लगभग 45 मिनट पहले यानी प्रातः 4:30 से 5:00 बजे के बीच में सो कर उठने को आदर्श माना जाता है.
- जागने के उपरांत एक से तीन ग्लास गर्म पानी पिए.
- इसके उपरांत गंदूशा तथा कवाला पद्धति के तहत पहले एक चम्मच तिल या नारियल के तेल से कुल्ला कर गर्म पानी से कुल्ला करना चाहिए.
- गर्म पानी में नमक और हल्दी डालकर गरारे करने चाहिए. हल्दी के अलावा त्रिफला यष्टिमधु, सुधा तनकाना तथा मधुदका का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
- नाक तथा मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन प्रतिमर्श नस्य के तहत नाक में तिल या नारियल के तेल की दो-दो बूंद डालनी चाहिए.
- आयुष मंत्रालय के अनुसार प्रतिदिन प्राणायाम, मेडिटेशन तथा अन्य योगासनों का अभ्यास जरूर करना चाहिए.
- इन सब कार्यों के बाद गर्म पानी से स्नान करना चाहिए.
दोपहर की दिनचर्या
- दोपहर में सोने से बचना चाहिए.
- स्वयं को व्यस्त तथा प्रसन्न रखने के लिए पेंटिंग, बागवानी, संगीत सुनने जैसी अपनी पसंदीदा गतिविधियों में स्वयं को व्यस्त रखना चाहिए.
शाम की दिनचर्या
- कम से कम 30 मिनट तक प्राणायाम तथा मेडिटेशन करना चाहिए.
- घर के अंदर ही विभिन्न गतिविधियों में स्वयं को व्यस्त रखना चाहिए.
खाने के नियम
- हमेशा भूख लगने पर और जरूरत के अनुसार ही खाना चाहिए, कम भोजन तथा आवश्यकता से अधिक भोजन दोनों ही शरीर को नुकसान देते हैं.
- हमेशा गर्म, ताजा तथा सुपाच्य खाना खाना चाहिए.
- रात का खाना सूर्यास्त के लगभग 3 घंटे के अंदर यानी लगभग 8 बजे तक खा लेना चाहिए.
- खाना खाने के कम से कम 2 से 3 घंटे बाद ही सोना चाहिए. अच्छी नींद हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी होती है.
अन्य जरूरी नियम
- जागरूक तथा सचेत रहें.
- हाइजीन बनाए रखें.
- सामाजिक दूरी के नियम का पालन करें.
- बच्चों, बुजुर्गों तथा ऐसे लोग जिन्हें कोमोरबिड तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता से संबंधित बीमारियां हैं, का ध्यान रखें.
- तनाव से बचें.
- घर से बाहर निकलते समय मास्क तथा अन्य सुरक्षा साधनों का उपयोग करें.
- नियमित तौर पर व्यायाम तथा मेडिटेशन करें.
कोविड-19 से स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए बहुत जरूरी है कि सभी जरूरी सावधानियों का पालन किया जाए तथा अपने शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रयास किया जाए. यदि आप एक बार कोरोनावायरस से ठीक भी हो गए हैं, तो जरूरी नहीं है कि आपको दोबारा यह रोग नहीं होगा. बहुत जरूरी है कि सामाजिक दूरी का पालन किया जाए.