नई दिल्ली: शिक्षा निदेशालय द्वारा सरकारी स्कूलों में छात्रों की बुनियादी स्तर की शिक्षा मजबूत करने के लिए 2018 में 'मिशन बुनियाद' के नाम से एक मुहिम शुरू हुई. जिसकी सफलता के बाद सत्र 2019-20 की शुरुआत भी मिशन बुनियाद से होने जा रही है. बता दें कि पिछले साल मिशन बुनियाद को गर्मियों की छुट्टियों में चलाया गया था. जिसमें छात्रों को नव निष्ठा के स्तर से निष्ठा और प्रतिभा के स्तर तक पहुंचाया गया था. वहीं इस वर्ष सत्र के शुरुआत से ही मिशन बुनियाद चलाया जाएगा.
एक अप्रैल से 10 मई तक मिशन बुनियाद
बता दें कि शैक्षणिक सत्र 2019-20 में मिशन बुनियाद 1 अप्रैल से 10 मई तक चलाया जाएगा. जिसमें उन छात्रों को एक-एक घंटा हिंदी उर्दू और गणित से संबंधित गतिविधियों को कराया जाएगा जो हिंदी लिखने और बोलने में सक्षम नहीं है और गणित के जोड़ घटा और भाग के सवाल हल नहीं कर सकते. 2 घंटे की एक्टिविटी के बाद मुख्य विषयों से फर्स्ट टर्म के सिलेबस के कुछ हल्की फुल्की शीर्षक छात्रों के साथ पढ़े जा सकेंगे.वहीं शिक्षा निदेशालय ने नोटिस जारी कर इसकी जानकारी सभी स्कूलों को दी. बता दें कि गत वर्ष जिस तरह के गतिविधियों के इस्तेमाल से छात्रों में सुधार आया था उसी गतिविधियों पर आधारित तरीकों से ही इस वर्ष भी छात्रों को पढ़ाना है जिसके लिए डीबीटीबी अलग से किताबें मुहैया कराएगी.
27 अप्रैल को होगी पेरेंट्स टीचर मीटिंग
अभिभावकों को मिशन बुनियाद के प्रति जागरूक करने और समस्त जानकारी देने के लिए सभी स्कूलों में 27 अप्रैल यानी शनिवार को पेरेंट्स मीटिंग रखी गई है. जिसमें अभिभावकों को समर कैंप के बारे में जानकारी दी जाएगी. साथ ही उन्हें इस बात को लेकर राजी किया जाएगा कि वह अपने छात्रों को समर कैंप के दौरान स्कूल भेजें. शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सभी स्कूलों में केवल निष्ठा और प्रतिभा के ही दो ग्रुप बनेंगे और छात्रों को उनकी प्रतिभा के अनुसार बांट दिया जाएगा.
मिशन बुनियाद से पढ़ने लिखने में हुआ सुधार
गत वर्ष स्कूलों द्वारा शिक्षा निदेशालय के पास भेजे गए आंकड़ों के अनुसार मिशन बुनियाद की वजह से तीसरी क्लास के 63 फीसदी बच्चे कहानी पढ़ने में सक्षम हुए तो वहीं 84 फीसदी बच्चे घटा का सवाल और 54 फीसदी बच्चे भाग का सवाल करने में सक्षम हो गए थे. वहीं चौथी कक्षा के 73 फ़ीसदी बच्चे कहानी पढ़ने लग गए थे. 91 फ़ीसदी बच्चे घटा का सवाल करने में सक्षम हो गए थे और 64 फ़ीसदी ने भाग भी सीख लिया. वहीं पांचवी कक्षा में 80 फीसदी बच्चे कहानी आसानी से पढ़ सकते थे, जबकि 94 फीसदी बच्चे घटा का सवाल कर पाए और 75 फीसदी तक के बच्चे भाग का सवाल करने में सक्षम हो गए.
स्कूलों से मिले इन आंकड़ों से प्रोत्साहित होकर इस वर्ष भी शिक्षा निदेशालय ने मिशन बुनियाद सभी स्कूलों में सत्र की शुरुआत से ही शुरू करने का फैसला किया है जिसके बाद समर कैंप में अलग से 3 घंटे की कक्षा लगाई जाएगी. बता दें कि समर कैंप में आठवीं कक्षा के सभी छात्रों का भाग लेना अनिवार्य है. इसके अलावा सातवीं और आठवीं के केवल वही छात्र समर कैंप का हिस्सा बनेंगे जिनके बुनियादी अंग्रेजी और हिंदी की जानकारी बहुत कमजोर है.
क्या है मिशन बुनियाद
बता दें कि सरकारी स्कूलों में छात्रों के शैक्षिक स्तर को देखते हुए उन्हें तीन भागों में विभाजित किया गया था. नव- निष्ठा, निष्ठा और प्रतिभा. नव - निष्ठा में उन छात्रों को रखा गया था. जिनकी बुनियाद बिल्कुल कमजोर थी, जिसकी वजह से लगातार सरकारी स्कूलों का रिजल्ट खराब आ रहा था. इसी को संज्ञान में लेते हुए शिक्षा निदेशालय ने सत्र 2018-19 की गर्मियों की छुट्टियां जाया ना करके उसमें समर कैंप के साथ-साथ मिशन बुनियाद की शुरुआत की. मिशन बुनियाद के अंतर्गत तीसरी से आठवीं तक के छात्रों को बुनियादी शिक्षा दी जाती थी जिसमें केवल नव - निष्ठा और निष्ठा के छात्रों ने ही भाग लिया था.
मिशन बुनियाद का उद्देश्य था छात्रों को इस स्तर तक लाना की हिंदी में वह कोई भी कहानी आसानी से पढ़ सके और गणित में जोड़, घटा, गुणा और भाग के सवाल आसानी से हल कर सके. मिशन बुनियाद को जुलाई में एक महीने तक के लिए बढ़ा दिया गया था और समय-समय पर शिक्षकों द्वारा छात्रों में हो रहे सुधार का आंकलन भी किया गया था. जिसके बाद सुधार के अनुसार छात्रों को निष्ठा और प्रतिभा भागों में भेज दिया गया और नव निष्ठा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था.