आणंद: डेयरी प्रमुख अमूल ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) से बाहर निकलने के मोदी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह देश में किसान की आय को दोगुना करने और लगभग 10 करोड़ डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम है.
बता दें कि चार नवबंर को पीएम मोदी ने आरसीईपी में शामिल होने से इंकार कर दिया था. पीएम मोदी ने कहा था कि उनका विवेक उन्हें इसमें आरसीईपी में शामिल होने की अनुमति नहीं दे रहा है.
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इसी मुद्दों पर बात करने के लिए ईटीवी भारत ने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी से बातचीत की. सोढ़ी ने कहा कि सरकार का यह स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा कि सरकार ने जो वादा किया था उसे सरकार ने कर दिखाया.
सोढ़ी ने कहा कि देश के डेयरी किसान इस बात से चिंतित थे कि अगर भारत इस सौदे में शामिल होता है तो डेयरी उत्पादों को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे दूध-अधिशेष देशों से डंप किया जाएगा जिससे उन्हें भारी घाटा होगा.
डेयरी उद्योग पर आर्थिक मंदी का असर नहीं
सोढ़ी ने ईटीवी के एक सवाल के जवाब में कहा कि डेयरी सेक्टर में किसी तरह की आर्थिक मंदी नहीं है. उन्होंने डेयरी प्रोडक्ट रोजाना खपत वाली चीजें हैं. इसलिए इसकी मांग और बढ़ी ही है. अमूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में अमूल का टर्नओवर में 14% तेजी थी और इस साल जुलाई तक बढ़कर 25% के आसपास आ गई है.
न्यूजीलैंड की डेयरी कंपनियों का भारत में स्वागत
सोढ़ी ने कहा कि अमूल और भारत के डेयरी उद्योग विदेशी डेयरी उद्योग का भारत में आकर निवेश करने के खिलाफ नहीं है. वे अपना निवेश भारत लेकर आएं लेकिन दूध यहां के किसानों से खरीदें ना कि अपने देश से लेकर आएं.