हैदराबाद : मौसम हर इंसान के जीवन से जुड़ा है. इसका सकरात्मक और नकरात्मक असर सभी पर पड़ता है. मौसम के बिगड़ने से जहां कोई एक व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से बीमार पड़ सकता है. वहीं इसका असर किसी देश या पूरे विश्व की अर्थव्यस्था पर अल्पकालीक और दीर्धकालीक पड़ता है. मौसम में बदलाव को तो रोका नहीं जा सकता है. लेकिन मौसम का पूर्वानुमान कर इसके कहर से बचा जा सकता है. साथ ही इसके अनुरूप फसल का चयन, कारोबार, यात्रा प्लान सहित अन्य प्लानिंग संभव है. मौसम के बारे में पूर्वानुमान के लिए जरूरी है कि समय के अनुरूप आधुनिक मौसम विज्ञान प्रयोगशालाएं हो. संयोगवश 15 जनवरी 1875 में कोलकाता में भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) स्थापित किया जा चुका था. 2025 में इसके 150 साल पूरा हो रहे हैं.
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The India Meteorological Department (IMD) @Indiametdept is the apex principal national institution for meteorology and allied services in 🇮🇳. On Jan 15, 2025, the remarkable IMD will complete its 150th foundation day, pic.twitter.com/jD4LKHmYhX
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— MoES GoI (@moesgoi) September 19, 2023
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों के अनुसार 150 वर्ष पूरा होने पर एक भव्य कार्यक्रमों की श्रृंखला का आयोजन होने जा रहा है. साल भर चलने वाले इस आयोजन में कई प्रकार के कार्यक्रम होंगे. इसके तहत वर्कशाप, अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, प्रदर्शनी, छात्रों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों का आयोजन तय है. इन आयोजनों का उद्देश्य मौसम विज्ञान केंद्रों के काम-काज के बारे में लोगों को अवगत कराना, युवाओं और बच्चों के इस फिल्ड में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
15-16 जनवरी को विज्ञान भवन में भव्य प्रदर्शनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 150 साल की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए विज्ञान भवन में 15 और 16 जनवरी 2024 को भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया जायेगा. उद्योग, शिक्षा, शैक्षणिक संस्थान, वैज्ञानिक समुदाय सहित अन्य फिल्ड के प्रतिनिधि कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.
IMD की जिम्मेदारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग की जिम्मेदारी आम जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए मौसम और जलवायु संबंधित डेटा, जानकारी व पूर्वानुमान को आम लोगों और संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित तौर पर जानकारी शेयर करना है. एक तरह से कहें तो इस संस्था ता राष्ट्र के विकास में अमूल्य योगदान है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग के प्रभाग
भारत मौसम विज्ञान विभाग के काम का दायरा काफी विस्तृत है. बेहतर कार्य संचालन और समन्वय के लिए के लिए इसे कई प्रभागों में बांटा गया है. सभी प्रभागों की अपनी-अपनी जिम्मेदारी है. इन प्रभागों के अलावा किसी बड़े आयोजन या मौसम संबंधी बदलाव या समस्याओं को ध्यान में रखकर विशेष प्रभागों को स्थापित किया जाता है.
- प्रशिक्षण
- उपकरण
- भूकंप विज्ञान
- नागरिक उड्डयन
- कृषि मौसम विज्ञान
- जलवायुविज्ञानशास्र
- जल मौसम विज्ञान
- मौसम संबंधी दूरसंचार
- स्थितीय खगोल विज्ञान
- उपग्रह मौसम विज्ञान
- क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का विकास:
- 1875 में अपनी स्थापना के बाद से आईएमडी, विकास के कई चरणों से गुजरा है. यह संस्था राष्ट्र की प्रगति, गौरव और सेवा का प्रमाण रहा है.
- आईएमडी की स्थापना के बाद भारत में सभी मौसम संबंधी कार्यों को इसके दायरे में लाया गया था. भारत में पहली भूकंपीय गतिविधि 1877 में अलीपुर, कोलकाता में स्थापित किया गया था.
- 1875 में मामूली शुरुआत से लेकर वर्तमान में आईएमडी के पास बेहतर अवलोकन और भविष्यवाणी के लिए 39 डॉपलर मौसम रडार हैं. साथ ही INSAT 3D/3DR समर्पित मौसम उपग्रह हर 15 मिनट में क्लाउड इमेजरी प्रदान करते हैं.
- भारत मौसम विज्ञान विभाग 500 से अधिक सेंटरों, 13 रेडियो पवन स्टेशनों, 45 रडार और 6 उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग प्रणाली के विशाल नेटवर्क का एक समूह है.
- भारत मौसम विज्ञान विभाग में 4000 से अधिक वैज्ञानिक कर्मचारी कार्यरत हैं और यह उन्नत मौसम संबंधी उपकरणों, अत्याधुनिक कंप्यूटिंग प्लेटफार्मों, मौसम और जलवायु भविष्यवाणी मॉडल, सूचना प्रसंस्करण और पूर्वानुमान प्रणाली और चेतावनी प्रसार प्रणाली का घर है.
- मौसम सेवाओं को सर्वव्यापी बनाने के लिए, आईएमडी ने डायनामिक मेटियोग्राम "मौसम ग्राम" जैसे नवीन समाधान लाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया है जो किसी भी समय (हर हर मौसम, हर घर मौसम) सभी स्थानों पर मौसम की जानकारी प्रदान करता है.
- आईएमडी का दिल्ली में मुख्यालय के अलावा देश भर में 6 क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों (आरएमसी) हैं. साथ राज्य स्तर पर 26 मौसम विज्ञान केंद्रों (एमसी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जो क्षेत्रीय मौसम के बारे में जानकारी, सलाह और चेतावनियों को प्रसारित करता है.
- पूर्व के अनुपात में आज के समय में सभी प्रकार की गंभीर मौसम घटनाओं के लिए पूर्वानुमान सटीकता में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
- आईएमडी देश में जिला स्तर, क्षेत्रीय पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं के अलावा लगभग 1200 स्टेशनों के लिए पूर्वानुमान करता है.
- आईएमडी भारी वर्षा के लिए 24 घंटे के पूर्वानुमान की सटीकता लगभग 80 फीसदी, तूफान के लिए 86 फीसदी गर्मी और शीत लहर के लिए लगभग 88 फीसदी है.
- नदी जलग्रहण क्षेत्रों के लिए पूर्वानुमान की अवधि 2020 में 3 दिन से बढ़कर 5 दिन और 2023 में 7 दिन हो गई. साइक्लोजेनेसिस पूर्वानुमान की अवधि 24 घंटे से बढ़कर 3 दिन हो गई है.
- आईएमडी न केवल भारतीय सीमा क्षेत्र को सेवाएं प्रदान कर रहा है, बल्कि सार्क देशों को पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं के साथ-साथ 13 उत्तरी हिंद महासागर देशों को चक्रवात पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाएं भी प्रदान करता है.