नई दिल्ली : कोविड-19 महामारी की वजह से सेक्स वर्कर्स की स्थिति बहुत ही खराब हो गई है, जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान सेक्स वर्कर्स की परेशानियों का संज्ञान लिया है. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वह सेक्स वर्कर्स की पहचान के बिना राशन मुहैया करवांए.
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि एक गैर सरकारी संगठन द्वारा सेक्स वर्कर्स की समस्याओं को लेकर दायर जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. पिछली सुनवाई में अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा था.
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देशित किया कि वह एक महीने में जवाब दें कि उन्होंने सेक्स वर्कर्स के लिए क्या किया है और उनमें से कितने को सूखा राशन मुहैया कराया है. अदालत ने केंद्र से पूछा कि क्या वह ट्रांसजेंडरों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता सेक्स वर्कर्स को भी दी है.