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बीजापुर : नक्सलियों ने पर्चा जारी कर शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल - नक्सलियों का सहयोगी

छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था पर पर्चा जारी कर नक्सलियों ने नाराजगी जताई है.

नक्सलियों ने नोट जारी किया
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Published : Nov 15, 2019, 2:46 PM IST

बीजापुर: शिक्षा पर प्रेस नोट जारी कर नक्सलियों ने सवाल उठाए हैं. पर्चे में साफ तौर पर लिखा है कि शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है , इसके विरोध में विद्यार्थी अपनी मांग को लेकर आगे बढ़ें.

नोट में नक्सलियों ने लिखा कि 'जिले के शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है, अंदरूनी क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में एक ही शिक्षक हैं, उन्हें भी पोटा अधीक्षक बनाकर नियुक्त किया जा रहा है. जिले के नयापारा, तुमनारा स्कूल में एक शिक्षक था जिसे अधीक्षक बनाया गया. जिसकी वजह से स्कूल में शिक्षक नहीं है, स्कूलों में बच्चे नहीं आ रहे हैं'.

आउटसोर्सिंग की वजह से बेरोजगार हो रहे लोग

नक्सलियों की ओर से जारी नोट में लिखा है कि 'आश्रम और पोटा केबिन के शिक्षक को अधीक्षक नहीं बनाना चाहिए. हर स्थान पर अलग अधीक्षकों की वजह से शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है, शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए नक्सलियों ने प्रेस नोट में लिखा कि 'जिन स्कूलों में शिक्षक का ट्रांसफर हुआ है, वहां के शिक्षकों ने बिना रिलीवर के ही रिलीव कर दिया गया. आउटसोर्सिंग होने की वजह से स्थानीय लोगों को बेरोजगार होना पड़ रहा है'.

राज्य सरकार पर लगाया आरोप

राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए नक्सलियों ने कहा कि 'बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा कर सरकार में आई पार्टियों ने अभी तक बेरोजगारों के लिए कुछ भी काम नहीं किया है. ये सरकार सिर्फ मीडिया के सामने केवल ढोंग रचने का काम करती आ रही है. शिक्षाकर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की जिंदगी बदतर होती जा रही है, इसके लिए मोदी सरकार कुछ नहीं कर रहे हैं'.

बीजापुर: शिक्षा पर प्रेस नोट जारी कर नक्सलियों ने सवाल उठाए हैं. पर्चे में साफ तौर पर लिखा है कि शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है , इसके विरोध में विद्यार्थी अपनी मांग को लेकर आगे बढ़ें.

नोट में नक्सलियों ने लिखा कि 'जिले के शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है, अंदरूनी क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में एक ही शिक्षक हैं, उन्हें भी पोटा अधीक्षक बनाकर नियुक्त किया जा रहा है. जिले के नयापारा, तुमनारा स्कूल में एक शिक्षक था जिसे अधीक्षक बनाया गया. जिसकी वजह से स्कूल में शिक्षक नहीं है, स्कूलों में बच्चे नहीं आ रहे हैं'.

आउटसोर्सिंग की वजह से बेरोजगार हो रहे लोग

नक्सलियों की ओर से जारी नोट में लिखा है कि 'आश्रम और पोटा केबिन के शिक्षक को अधीक्षक नहीं बनाना चाहिए. हर स्थान पर अलग अधीक्षकों की वजह से शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है, शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए नक्सलियों ने प्रेस नोट में लिखा कि 'जिन स्कूलों में शिक्षक का ट्रांसफर हुआ है, वहां के शिक्षकों ने बिना रिलीवर के ही रिलीव कर दिया गया. आउटसोर्सिंग होने की वजह से स्थानीय लोगों को बेरोजगार होना पड़ रहा है'.

राज्य सरकार पर लगाया आरोप

राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए नक्सलियों ने कहा कि 'बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा कर सरकार में आई पार्टियों ने अभी तक बेरोजगारों के लिए कुछ भी काम नहीं किया है. ये सरकार सिर्फ मीडिया के सामने केवल ढोंग रचने का काम करती आ रही है. शिक्षाकर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की जिंदगी बदतर होती जा रही है, इसके लिए मोदी सरकार कुछ नहीं कर रहे हैं'.

Intro:जिले में नक्सलियों ने पहली बार शिक्षण व्यवस्था को लेकर प्रेस नोट जारी करते हुए विद्यार्थियों ने अपने अधिकार के लिए संघर्ष करने की बात की है ।नक्सलियों ने दिए विज्ञप्ति में कहा कि विद्यार्थियों ने अपने अधिकार के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया है ।जिले के शिक्षा व्यवस्था को निजी करण के साथ भगवाकरण बनाने की कोशिश की जा रही है। अंदरूनी क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में एक ही शिक्षक है उन शिक्षकों को भी पोटा केबिन अधीक्षक बनाकर प्रभारी नियुक्त किया जा रहा है


Body:जिले के नयापारा तुम नारा स्कूल में 1 शिक्षक था जिसे अधीक्षक बनाया गया जिसके चलते स्कूल में शिक्षक नहीं है स्कूलों में बच्चे नहीं आ रहे हैं कहते हुए इस इसे हाथों में देने की बात कहीं जा रही है लखनऊ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में का है कि आश्रम और पोटा केबिन के शिक्षक को अधीक्षक नहीं बनाना चाहिए स्थान पर अलग अधीक्षकों के चलते शिक्षा व्यवस्था चरमरा जा रही है शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन स्कूलों में शिक्षक का ट्रांसफर हुआ है वहां के शिक्षकों ने बिना रिलीवर की उसको छोड़ दिया जिसकी वजह से स्कूल में शिक्षक नहीं है वही आउटसोर्सिंग होने की वजह से स्थानीय लोगों को बेरोजगार होना पड़ रहा है। राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए नक्सलियों ने कहा कि बेरोजगारों को रोजगार देने से मुक्त कराने का वादा कर सरकार में आई पार्टियों ने अभी तक बेरोजगारों के लिए कुछ भी काम नहीं किया है यह सरकार सिर्फ मीडिया के सामने केवल ढोंग रचने का काम करती आ रही है शिक्षा कर्मियों अनुदेशकों प्रेरक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की जिंदगी निजी होती जा रही है इसके लिए मोदी सरकार कुछ नहीं कर रहे हैं अपनी मांग को लेकर समान वेतन समान अधिकार को लेकर संघर्ष करने की बात कही है इसके साथ साथ पुलिस प्रशासन के ऊपर भी आरोप लगाते हुए दी गई विज्ञप्ति में उल्लेख है कि छात्रों से पूछताछ भी नहीं करते और नक्सलियों का सहयोग बताकर उन्हें जेल में ठूस देते हैं।


Conclusion:जिसकी वजह से हेमला राजू परेशानियों को झेल रहा है जिसके लिए छात्रों को आंदोलन करने की जरूरत है भूपेश सरकार का वादा खोखला है मध्यान भोजन में अंडा खिलाना का निर्णय लिया गया है उसकी जगह पर बादाम काजू खिलाना चाहिए था पोस्टिक आहार से आदिवासी दलित मुस्लिम ईसाई बच्चों को मांसाहार से वंचित करना उनके शारीरिक व बौद्धिक विकास को बाधित करने का खुलासा षडयंत्र है। नक्सलियों द्वारा पहली बार शिक्षण संस्था के बारे में प्रेस विज्ञप्ति को लेकर जगह-जगह चर्चा का विषय बना हुआ है।
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