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मिड-डे मील में अंडा बांटने पर गायत्री परिवार नाराज, सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन - egg feeding

आंगनबाड़ियों में मध्यान भोजन खिलाने के खिलाफ गायत्री परिवार ने प्रदर्शन किया. साथ ही सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

गायत्री परिवार का प्रदर्शन
गायत्री परिवार का प्रदर्शन
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Published : Dec 17, 2019, 8:45 PM IST

Updated : Dec 17, 2019, 9:45 PM IST

बालोद : शासन-प्रशासन की ओर से स्कूलों और आंगनबाड़ियों में मध्यान भोजन में अंडा देने का निर्णय लिया गया है. ये अंडा सप्ताह में एक दिन दिए जाने है. इस अंडे पर विवाद एक बार फिर छिड़ गया है. गायत्री परिवार के सदस्यों ने मध्यान भोजन में अंडा खिलाने के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया है.

गायत्री परिवार का प्रदर्शन

दरअसल, गायत्री परिवार के सदस्य झलमला बसस्टैंड के पास गायत्री परिवार के सदस्यों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. साथ ही इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार से सवाल भी किए.

पढ़ें : बघेल ने लोगों का जताया आभार, बोले- अभी बहुत काम करना बाकी

गायत्री परिवार के समन्वयक राजेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि 'नैतिक बौद्धिक विकास के लिए अंडा देना जरूरी नहीं है. शाकाहारी भोजन देकर भी बौद्धिक विकास किया जा सकता है. साथ ही शारीरिक कुपोषण भी दूर किया जा सकता है. लेकिन सरकार की ओर से नैतिकता को खत्म करते हुए अंडा परोसा जा रहा है ये बिल्कुल भी सही नहीं है. हम लोगों ने ज्ञापन के साथ ही मौखिक रूप से भी शासन प्रशासन से मांग की है. लेकिन हमारी इन मांगों पर किसी तरह का कोई ध्यान नहीं दिया गया. इसके कारण यहां स्थिति ऐसी हो गई कि हम सभी को सड़क पर उतरना पड़ रहा है.

पढ़ें : PCC चीफ ने बताया कैसे किसानों को 2500 रुपए समर्थन मूल्य देगी उनकी सरकार

अंडे के विषय पर जाति समाज का कहना है कि 'हमारा धर्म हमें इसकी इजाजत नहीं देता कि शिक्षा के मंदिर में अंडा परोसा जाए. लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से किस स्तर पर यह निर्णय लिया गया है यह समझना मुश्किल है'.

बालोद : शासन-प्रशासन की ओर से स्कूलों और आंगनबाड़ियों में मध्यान भोजन में अंडा देने का निर्णय लिया गया है. ये अंडा सप्ताह में एक दिन दिए जाने है. इस अंडे पर विवाद एक बार फिर छिड़ गया है. गायत्री परिवार के सदस्यों ने मध्यान भोजन में अंडा खिलाने के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया है.

गायत्री परिवार का प्रदर्शन

दरअसल, गायत्री परिवार के सदस्य झलमला बसस्टैंड के पास गायत्री परिवार के सदस्यों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. साथ ही इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार से सवाल भी किए.

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गायत्री परिवार के समन्वयक राजेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि 'नैतिक बौद्धिक विकास के लिए अंडा देना जरूरी नहीं है. शाकाहारी भोजन देकर भी बौद्धिक विकास किया जा सकता है. साथ ही शारीरिक कुपोषण भी दूर किया जा सकता है. लेकिन सरकार की ओर से नैतिकता को खत्म करते हुए अंडा परोसा जा रहा है ये बिल्कुल भी सही नहीं है. हम लोगों ने ज्ञापन के साथ ही मौखिक रूप से भी शासन प्रशासन से मांग की है. लेकिन हमारी इन मांगों पर किसी तरह का कोई ध्यान नहीं दिया गया. इसके कारण यहां स्थिति ऐसी हो गई कि हम सभी को सड़क पर उतरना पड़ रहा है.

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अंडे के विषय पर जाति समाज का कहना है कि 'हमारा धर्म हमें इसकी इजाजत नहीं देता कि शिक्षा के मंदिर में अंडा परोसा जाए. लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से किस स्तर पर यह निर्णय लिया गया है यह समझना मुश्किल है'.

Intro:बालोद

शासन-प्रशासन की ओर से स्कूलों और आंगनबाड़ियों में मध्यान भोजन में सप्ताह में 1 दिन अंडा पर उसने का निर्णय लिया गया है अंडा पर उतना शुरू भी हो गया है जिसका विरोध अब गायत्री परिवार द्वारा किया जा रहा है गायत्री परिवार के सदस्य गण झलमला बस स्टैंड के समीप सड़क किनारे धरने पर बैठे हैं और शासन प्रशासन पर जमकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं वे शासन प्रशासन से पूछ रहे हैं कि पौष्टिकता के लिए क्या अंडा देना ही सही विकल्प है उसके जगह और भी विकल्प अपनाया जा सकते हैं इस दौरान वे सड़क किनारे बैठ कर जमकर नारेबाजी कर रहे हैं साथ ही उन्होंने शासन प्रशासन पर उनकी मांगों को लेकर सूचना लेने का आरोप भी लगाए।


Body:वीओ - गायत्री परिवार के समन्वयक राजेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि नैतिक बौद्धिक विकास के लिए अंडा देना जरूरी नहीं है यहां जो शादी देकर भी बौद्धिक विकास किया जा सकता है साथ ही शारीरिक रूप से भी कुपोषण दूर किया जा सकता है परंतु सरकार द्वारा नैतिकता को खत्म करते हुए अंडा परोसा जा रहा है जोकि बिल्कुल भी सही नहीं है हम लोगों द्वारा ज्ञापन व अन्य मौखिक रूप से शासन प्रशासन से मांग की गई परंतु हमारी इन मांगों पर किसी तरह का कोई ध्यान नहीं दिया गया जिसके कारण यहां स्थिति ऐसी हो गई कि हम सब को सड़क पर उतरना पड़ रहा है।

वीओ - अंडे के विषय पर जाति समाज का कहना है कि हमारा धर्म हमें इसकी इजाजत नहीं देता कि शिक्षा के मंदिर में अंडा परोसा जाए परंतु शासन और प्रशासन द्वारा किस स्तर पर यह निर्णय लिया गया है यह अब तक समझ से परे है उन्होंने कहा कि हम इसका कड़ा विरोध करते हैं


Conclusion:उन्होंने बताया कि हम जैसे लोगों को आगे आकर विरोध करना पड़ रहा है गायत्री परिवार ने बताया कि 1 सप्ताह तक हम धरना प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि शासन-प्रशासन तो जागे उनका कहना है कि हम नियमों के तहत आराम से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं 1 सप्ताह बाद यदि शासन प्रशासन का कोई आश्वासन ना मिला तो हम अपने धरने को अलग रूप देंगे।

बाइट - राजेन्द्र सिन्हा, ज़िला समन्वयक गायत्री परिवार

बाइट - भुनेश्वर सिन्हा, सदस्य गायत्री परिवार
Last Updated : Dec 17, 2019, 9:45 PM IST
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