पटना: बिहार में जातीय गणना को लेकर पटना हाईकोर्ट में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी. 5 मई को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई की अपील की थी, लेकिन अपील को खारिज करते हुए पटना हाईकोर्ट ने कहा था कि सुनवाई 3 जुलाई को ही होगी. मामले पर सोमवार को सुनवाई हुई और कल भी सुनवाई जारी रहेगी.
पढ़ें- Bihar Caste Census : जातीय गणना पर बिहार सरकार को हाईकोर्ट से झटका, जानिए पटना हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जातीय गणना पर कल भी जारी रहेगी सुनवाई: बता दें कि बिहार सरकार द्वारा जातीय गणना और आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी. चीफ जस्टिस केवी चंद्रन की खंडपीठ इन याचिकायों पर सुनवाई कर रही है.
'ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत' : आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है. उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के बाहर है. ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है.
दोनों पक्षों ने रखी अपनी बात : अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है. ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है. उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पांच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है. दूसरी तरफ राज्य सरकार राज्य सरकार का कहना था कि जन कल्याण की योजनाएं बनाने और सामाजिक स्तर सुधारने के लिए ये सर्वेक्षण किया कराया जा रहा है.
14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था. साथ ही इस मामले को पटना हाईकोर्ट के समक्ष पुनः सुनवाई के लिए भेज दिया था. सुप्रीम कोर्ट में इन याचिकायों पर 14 जुलाई, 2023 को सुनवाई की तिथि निर्धारित किया गया है. प्रदेश में जाति आधारित गणना को लेकर पिछले 2 सालों से सियासत हो रही है. पिछले साल जातीय गणना करने का निर्णय हुआ.
हाईकोर्ट ने लगाया है रोक: कैबिनेट से 500 करोड़ की स्वीकृति भी दी गई. इस साल 7 जनवरी से पहले चरण की गणना हुई. पहले चरण की जातीय गणना समाप्ति के बाद 15 अप्रैल से जातीय गणना का दूसरा चरण का काम शुरू हुआ, लेकिन पटना हाईकोर्ट से रोक के बाद गणना का काम पूरा नहीं हो सका.
हाईकोर्ट से झटका के बाद सुप्रीम अपील: बता दें कि 5 मई को बिहार सरकार की ओर से जल्द सुनवाई की याचिका कोर्ट में दी गई थी. कोर्ट ने 9 मई को सुनवाई की तिथि तय की. वहीं 9 मई को पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार की याचिका खारिज कर दी. जिसके बाद 10 मई को सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई.
बिहार में क्यों सरकार कराना चाहती है जाति आधारित जनगणना?: बिहार में 215 जातियों की गणना कराने का लक्ष्य है. जिनसे सरकार 17 तरह की जानकारी इकट्ठा करेगी. जातीय गणना से बिहार सरकार का उद्देश्य है कि सभी जातियों का सही-सही आंकड़ा सरकार को मिले. ताकि आर्थिक और सामाजिक आधार पर उनके लिए योजनाएं बनाई जा सके.