पटनाः बिहार सरकार का दावा है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में बिहार का विकास दर देश से अधिक होने वाला है. योजना विकास विभाग के सचिव मनीष वर्मा ने यह दावा मंत्री महेश्वर हजारी की मौजूदगी में किया. हालांकि सरकार की तरफ से किये जा रहे दावे पर अर्थशास्त्री सवाल खड़ा कर रहे हैं.
योजना विकास विभाग के सचिव मनीष वर्मा का कहना है कि बिहार में 2018-19 का सकल घरेलू उत्पाद ( जीएसडीपी) 557490 करोड़ है. इसके अनुसार विकास दर 15 फीसदी रहेगा. वहीं, देश का केवल 11.2 फीसदी होने का अनुमान है. वर्मा ने बताया कि इस आकलन का वेरिफिकेशन केंद्र सरकार सीएसएस के माध्यम करायेगी.
देश से अधिक रहेगा बिहार का ग्रोथ
बता दें कि बिहार का विकास पिछले एक दशक से डबल डिजीट में रहा है. इस साल भी सरकार सरकार कर रही है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी बिहार के विकास की रफ्तार पूरे देश में सबसे अधिक रहेगी. योजना विकास विभाग के सचिव के मुताबिक वित्तीय वर्ष में आकलन के अनुसार देश के विकास 11.2 जबिक बिहार का का 15 फीसदी रहने का अनुमान है. बिहार सरकार के दावे का केंद्र सरकार की ओर से वेरीफिकेशन करेगी जिसमें 2 साल लग जायेंगे. मनीष वर्मा का यह भी दावा है कि बिहार परकैपिटा इनकम है उसमें भी ग्रोथ देश से अधिक है.
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सरकार के दावे पर सवाल
बिहार सरकार के दावे पर अर्थशास्त्री एनके चौधरी सवाल ने खड़ा किया है. चौधरी के अनुसार बिहार का प्रति व्यक्ति आय कम है. शिक्षा-स्वास्थ्य की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है. वहीं, दूसरी तरफ पलायन के साथ कुपोषण की भी समस्या है.
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सरकार के दावे पर 2 साल बाद लगेगी मुहर
बिहार सरकार की तरफ से केंद्र को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में डाटा उपलब्ध कराया जाता है. वहीं, वेरिफिकेशन केंद्र सरकार के सेंट्रल स्टैटिकल सर्वे (सीएसएस) की तरफ से की जाती है. इसमें कार्य में तकरीबन 2 साल लग जाते है. यानी बिहार सरकार के दावे पर 2 साल बाद ही मुहर लगेगा.