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तीसरे चरण की वोटिंग से पहले झलकी जमीन केस पर सियासी जंग, जानिए क्या है पूरा मामला ? - Jhalki land case - JHALKI LAND CASE

झलकी जमीन रजिस्ट्री विवाद पर सियासी जंग तेज हो गई है. रविवार को रायपुर में कांग्रेस ने इस केस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रायपुर से बीजेपी प्रत्याशी बृजमोहन अग्रवाल को घेरा. जानिए छत्तीसगढ़ की राजनीति में झलकी पर क्यों विवाद हो रहा है.

Jhalki land dispute
झलकी जमीन केस पर सियासी जंग (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : May 5, 2024, 6:25 PM IST

झलकी जमीन केस पर सियासी जंग (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

रायपुर: महासमुंद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 23 अप्रैल को झलकी जमीन की रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर दिया है. यह जमीन छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री एवं रायपुर से भाजपा उम्मीदवार बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल के नाम पर थी. कांग्रेस ने इस केस में जमीन के खरीदार और जमीन बेचने वाले दोनों पर कार्रवाई की मांग की है. कांग्रेस की तरफ से लगातार इस केस में बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल पर कई आरोप लगाए हैं. उस समय के तत्कालीन भाजपा सरकार के संरक्षण में गलत तरीके से जमीन कब्जा करने की भी बात कही थी, अब एक बार फिर कांग्रेस इस मामले को तूल देते हुए बृजमोहन सहित भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है.

"महासमुंद जिला न्यायालय के 23 अप्रैल के फैसले से इस केस में बिल्कुल साफ हो गया. भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने महासमुंद के तुमगांव के ग्राम झलकी में जलाशय की जमीन को गलत तरीके से खरीदकर कब्जा किया था": दीपक बैज, पीसीसी चीफ

"1994 में ग्राम झलकी में किसान ईश्वर प्रसाद ने अपना खसरा नंबर 117 रकबा 4.124 हेक्टेयर दान में भूमि जल संसाधन विभाग को दिया था. जलाशय बनाने रजिस्ट्रीकृत दान पत्र के द्वारा इसे दिया गया. उसके बाद जल संसाधन विभाग राजस्व प्रपत्र में इसका नामांतरण नहीं करा पाई.": सुशील आनंद शुक्ला, प्रवक्ता कांग्रेस

सुशील आनंद शुक्ला ने बृजमोहन अग्रवाल पर लगाए आरोप: सुशील आनंद शुक्ला ने इस केस में बृजमोहन अग्रवाल पर झलकी जमीन केस में गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि "बृजमोहन अग्रवाल राज्य में जब जल संसाधन मंत्री थे. उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी. बृजमोहन अग्रवाल ने ग्राम झलकी जिला तुमगांव महासमुंद में रिसोर्ट निजी भूमि खरीदकर बनाया. उस समय वह चूकि मंत्री थे तब उन्हें जानकारी थी कि अगल-बगल की जमीन जल संसाधन विभाग की है. जल संसाधन विभाग ने सरकारी खर्च कर जलाशय बनाया था. यह जलाशय 15 एकड़ से ज्यादा भूमि में बनी हुई है. तब बृजमोहन अग्रवाल पूर्व जल संसाधन मंत्री ने यह जानते हुए कि ईश्वर प्रसाद के दान देने के बाद जमीन के मालिक ईश्वर प्रसाद उनके वारिसान नहीं है. ईश्वर प्रसाद की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र विष्णु, किशुन, कृष्ण लाल साहू के नाम राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 117 रकबा 4.124 हेक्टेयर भूमि चढ़ाकर अपनी पत्नी सरिता अग्रवाल के नाम खरीद लिया. उसके बाद यह केस कोर्ट में गया. जिस पर फैसला आया है. कोर्ट ने इसे शून्य घोषित किया है. कोर्ट ने 23 अप्रैल 2024 को फैसला सुनाया और आदेश दिया, कि प्रतिवादी 1 से 3 द्वारा सरिता अग्रवाल पति बृजमोहन अग्रवाल के पक्ष के निष्पादित पंजीकृत विक्रय पत्र 17.07.2009 को प्रारंभ से शून्य घोषित किया जाता है. इस जमीन को दो महीने के अंदर राज्य सरकार को सौंपने का आदेश भी कोर्ट ने सुनाया है "

जमीन की खरीद करने और बेचने वालों पर केस चलाने की मांग: कांग्रेस ने झलकी जमीन की खरीद करने वाले और इसको बेचने वालों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की मांग की है.

क्या है झलकी जमीन विवाद: झलकी जमीन विवाद का पहली बार खुलासा साल 2017 में हुआ. राज्य शासन की रिपोर्ट में महासमुंद के सिरपुर क्षेत्र की सरकारी वन भूमि पर पूर्व मंत्री और उनके परिजनों का कब्जा पाया गया. इस सरकारी जमीन पर बना रिसॉर्ट तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल और बेटे अभिषेक अग्रवाल के नाम था. जमीन का मालिकाना हक़ कैसे प्राइवेट व्यक्ति को सौंप दिया गया , इसकी जांच राज्य के मुख्य सचिव ने की थी. जांच में कहा गया था कि यह सरकारी जमीन गलत तरीके से मंत्री के परिजनों ने खरीदी. यह जमीन स्थीनीय किसानों ने 2009 में नहर के निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग को दान में दी थी. इस जमीन को बाद में जल संसाधन विभाग ने वन विभाग को सौंप दिया था.लेकिन साल 2012 में गुपचुप ढंग से यह जमीन मंत्री के परिजनों के स्वामित्व में चली गई. जांच रिपोर्ट के बाद महासमुंद जिले के डीएम को इस जमीन की रजिस्ट्री शून्य करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद यह मामला न्यायालय में था और अब इसका फैसला आया है.

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रायपुर: महासमुंद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 23 अप्रैल को झलकी जमीन की रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर दिया है. यह जमीन छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री एवं रायपुर से भाजपा उम्मीदवार बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल के नाम पर थी. कांग्रेस ने इस केस में जमीन के खरीदार और जमीन बेचने वाले दोनों पर कार्रवाई की मांग की है. कांग्रेस की तरफ से लगातार इस केस में बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल पर कई आरोप लगाए हैं. उस समय के तत्कालीन भाजपा सरकार के संरक्षण में गलत तरीके से जमीन कब्जा करने की भी बात कही थी, अब एक बार फिर कांग्रेस इस मामले को तूल देते हुए बृजमोहन सहित भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है.

"महासमुंद जिला न्यायालय के 23 अप्रैल के फैसले से इस केस में बिल्कुल साफ हो गया. भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने महासमुंद के तुमगांव के ग्राम झलकी में जलाशय की जमीन को गलत तरीके से खरीदकर कब्जा किया था": दीपक बैज, पीसीसी चीफ

"1994 में ग्राम झलकी में किसान ईश्वर प्रसाद ने अपना खसरा नंबर 117 रकबा 4.124 हेक्टेयर दान में भूमि जल संसाधन विभाग को दिया था. जलाशय बनाने रजिस्ट्रीकृत दान पत्र के द्वारा इसे दिया गया. उसके बाद जल संसाधन विभाग राजस्व प्रपत्र में इसका नामांतरण नहीं करा पाई.": सुशील आनंद शुक्ला, प्रवक्ता कांग्रेस

सुशील आनंद शुक्ला ने बृजमोहन अग्रवाल पर लगाए आरोप: सुशील आनंद शुक्ला ने इस केस में बृजमोहन अग्रवाल पर झलकी जमीन केस में गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि "बृजमोहन अग्रवाल राज्य में जब जल संसाधन मंत्री थे. उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी. बृजमोहन अग्रवाल ने ग्राम झलकी जिला तुमगांव महासमुंद में रिसोर्ट निजी भूमि खरीदकर बनाया. उस समय वह चूकि मंत्री थे तब उन्हें जानकारी थी कि अगल-बगल की जमीन जल संसाधन विभाग की है. जल संसाधन विभाग ने सरकारी खर्च कर जलाशय बनाया था. यह जलाशय 15 एकड़ से ज्यादा भूमि में बनी हुई है. तब बृजमोहन अग्रवाल पूर्व जल संसाधन मंत्री ने यह जानते हुए कि ईश्वर प्रसाद के दान देने के बाद जमीन के मालिक ईश्वर प्रसाद उनके वारिसान नहीं है. ईश्वर प्रसाद की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र विष्णु, किशुन, कृष्ण लाल साहू के नाम राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 117 रकबा 4.124 हेक्टेयर भूमि चढ़ाकर अपनी पत्नी सरिता अग्रवाल के नाम खरीद लिया. उसके बाद यह केस कोर्ट में गया. जिस पर फैसला आया है. कोर्ट ने इसे शून्य घोषित किया है. कोर्ट ने 23 अप्रैल 2024 को फैसला सुनाया और आदेश दिया, कि प्रतिवादी 1 से 3 द्वारा सरिता अग्रवाल पति बृजमोहन अग्रवाल के पक्ष के निष्पादित पंजीकृत विक्रय पत्र 17.07.2009 को प्रारंभ से शून्य घोषित किया जाता है. इस जमीन को दो महीने के अंदर राज्य सरकार को सौंपने का आदेश भी कोर्ट ने सुनाया है "

जमीन की खरीद करने और बेचने वालों पर केस चलाने की मांग: कांग्रेस ने झलकी जमीन की खरीद करने वाले और इसको बेचने वालों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की मांग की है.

क्या है झलकी जमीन विवाद: झलकी जमीन विवाद का पहली बार खुलासा साल 2017 में हुआ. राज्य शासन की रिपोर्ट में महासमुंद के सिरपुर क्षेत्र की सरकारी वन भूमि पर पूर्व मंत्री और उनके परिजनों का कब्जा पाया गया. इस सरकारी जमीन पर बना रिसॉर्ट तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल और बेटे अभिषेक अग्रवाल के नाम था. जमीन का मालिकाना हक़ कैसे प्राइवेट व्यक्ति को सौंप दिया गया , इसकी जांच राज्य के मुख्य सचिव ने की थी. जांच में कहा गया था कि यह सरकारी जमीन गलत तरीके से मंत्री के परिजनों ने खरीदी. यह जमीन स्थीनीय किसानों ने 2009 में नहर के निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग को दान में दी थी. इस जमीन को बाद में जल संसाधन विभाग ने वन विभाग को सौंप दिया था.लेकिन साल 2012 में गुपचुप ढंग से यह जमीन मंत्री के परिजनों के स्वामित्व में चली गई. जांच रिपोर्ट के बाद महासमुंद जिले के डीएम को इस जमीन की रजिस्ट्री शून्य करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद यह मामला न्यायालय में था और अब इसका फैसला आया है.

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